पाकिस्तान: पश्तून कार्यकर्ताओं की रिहाई के लिए मानवाधिकार संगठन ने उठाई आवाज

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इस्लामाबाद, 30 अप्रैल (आईएएनएस)। पाकिस्तान में मानवाधिकार संगठन एमनेस्टी इंटरनेशनल ने गुरुवार को दो पश्तून मानवाधिकार कार्यकर्ताओं—हनिफ पश्तीन और नूरुल्लाह तारीन—की तत्काल रिहाई की मांग की है। संगठन ने अधिकारियों से दोनों कार्यकर्ताओं के ठिकाने का खुलासा करने और उनकी जानकारी परिजनों को उपलब्ध कराने को भी कहा है। यह मांग उस समय आई है जब दोनों कार्यकर्ताओं के कथित तौर पर लापता होने को लेकर चिंता बढ़ती जा रही है। संगठन ने यह मांग खैबर पख्तूनख्वा के मुख्यमंत्री सोहैल अफरीदी को लिखे एक पत्र में की है। इसमें कहा गया है कि दोनों कार्यकर्ता ‘पश्तून तहफ्फुज मूवमेंट’ से जुड़े…

इस्लामाबाद, 30 अप्रैल (आईएएनएस)। पाकिस्तान में मानवाधिकार संगठन एमनेस्टी इंटरनेशनल ने गुरुवार को दो पश्तून मानवाधिकार कार्यकर्ताओं—हनिफ पश्तीन और नूरुल्लाह तारीन—की तत्काल रिहाई की मांग की है।

संगठन ने अधिकारियों से दोनों कार्यकर्ताओं के ठिकाने का खुलासा करने और उनकी जानकारी परिजनों को उपलब्ध कराने को भी कहा है।

यह मांग उस समय आई है जब दोनों कार्यकर्ताओं के कथित तौर पर लापता होने को लेकर चिंता बढ़ती जा रही है।

संगठन ने यह मांग खैबर पख्तूनख्वा के मुख्यमंत्री सोहैल अफरीदी को लिखे एक पत्र में की है। इसमें कहा गया है कि दोनों कार्यकर्ता ‘पश्तून तहफ्फुज मूवमेंट’ से जुड़े हैं और 12 नवंबर 2025 को पेशावर में प्रांतीय विधानसभा से बाहर निकलते समय पुलिस हिरासत में लिए गए थे।

एमनेस्टी इंटरनेशनल के अनुसार, ये दोनों कार्यकर्ता खैबर पख्तूनख्वा सरकार की ओर से बुलाई प्रांतीय विधानसभा की बैठक में शामिल हुए थे। समुदाय के प्रतिनिधियों के रूप में उन्हें अपनी बात रखने का अवसर नहीं मिला, जिसके बाद उन्होंने बैठक का बहिष्कार किया और परिसर से बाहर निकल गए थे।

संगठन ने कहा कि बाहर निकलने के तुरंत बाद पुलिस ने सात सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल को रोक लिया। चश्मदीदों के हवाले से बताया गया कि पेशावर के सिटी पुलिस अधिकारी मौके पर मौजूद थे और उन्होंने सातों को पुलिस वाहनों में ले जाने का निर्देश दिया।

एमनेस्टी इंटरनेशनल के अनुसार, इसके बाद किसी के बारे में कोई जानकारी नहीं मिल पाई। बाद में 18 जनवरी 2026 को इनमें से पांच लोगों को पंजाब प्रांत की अटक जेल से रिहा कर दिया गया, लेकिन हनिफ पश्तीन और नूरुल्लाह तारीन अब भी लापता हैं।

संगठन ने कहा कि दोनों कार्यकर्ताओं को “जबरन हिरासत” में रखा गया है, जो अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत गंभीर मानवाधिकार उल्लंघन है। इससे उनकी सुरक्षा, जीवन और स्वास्थ्य को गंभीर खतरा पैदा हो गया है।

एमनेस्टी इंटरनेशनल ने चिंता जताई कि वर्तमान हालात मेें उनके साथ दुर्व्यवहार और यातना की आशंका बढ़ जाती है। साथ ही, पारदर्शिता की कमी उनके परिवारों की चिंता को और बढ़ा रही है।

मानवाधिकार संगठन ने कहा कि यह मामला कोई अलग घटना नहीं है, बल्कि पाकिस्तान में ‘पश्तून तहफ्फुज मूवमेंट’ के कार्यकर्ताओं के खिलाफ चल रही व्यापक कार्रवाई का हिस्सा है, जिसमें मनमानी गिरफ्तारी, उत्पीड़न, धमकी और जबरन गायब किए जाने की घटनाएं शामिल हैं।

एमनेस्टी ने पाकिस्तान सरकार से अपील की है कि वह दोनों कार्यकर्ताओं के ठिकाने का तत्काल खुलासा करे, उन्हें कानूनी प्रक्रिया के तहत पेश करे और सभी आरोपों की पारदर्शी जांच सुनिश्चित करे।

–आईएएनएस

केआर/

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