कोलंबो, 15 अप्रैल (आईएएनएस)। ‘आईआरआईएस देना’ नामक ईरान का एक नौसैनिक जहाज, जो मार्च की शुरुआत में अमेरिकी हमले में डूब गया था, उसके बचे हुए लोग अब श्रीलंका से ईरान वापस चले गए हैं। श्रीलंका के एक वरिष्ठ सैन्य अधिकारी ने यह जानकारी दी।
समाचार एजेंसी सिन्हुआ की रिपोर्ट के अनुसार, श्रीलंका के उप रक्षा मंत्री अरुणा जयसेकरा ने बताया कि 32 बचे हुए लोगों को ‘आईआरआईएस बुशहर’ नाम के दूसरे ईरानी जहाज पर सवार 200 से ज्यादा लोगों के साथ वापस भेजा गया। सभी को मंगलवार को विशेष उड़ान से श्रीलंका से रवाना किया गया।
‘आईआरआईएस देना’ पर अमेरिका की एक पनडुब्बी ने हमला किया था, जो श्रीलंका के पास के समुद्री इलाके में हुआ। इस हादसे के बाद श्रीलंकाई नौसेना ने रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया, जिसमें 87 शव बरामद किए गए और 32 लोगों को जिंदा बचाया गया।
‘आईआरआईएस बुशहर’ ने मार्च की शुरुआत में श्रीलंका के पानी में आने की इजाजत मांगी थी। 6 मार्च को इस जहाज पर मौजूद लोगों को श्रीलंकाई नौसेना ने कोलंबो पोर्ट पर उतारा, और तब से वे श्रीलंका की निगरानी में थे।
इसी बीच, एक और ईरानी जहाज ‘आईआरआईएस लवन’ को तकनीकी खराबी की वजह से भारत के केरल राज्य के कोच्चि में रुकने की इजाजत दी गई। यह फैसला ऐसे समय में लिया गया जब एक अन्य ईरानी युद्धपोत के अमेरिकी टॉरपीडो से डूबने की घटना से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हलचल मची हुई थी।
‘आईआरआईएस लवन’ चार मार्च को कोच्चि पहुंचा था, जब भारत सरकार ने ईरान की इमरजेंसी रिक्वेस्ट को मंजूरी दी। जहाज में 28 फरवरी को तकनीकी खराबी आई थी, जिसके बाद ईरान ने भारत से मदद मांगी थी।
यह जहाज इंटरनेशनल फ्लीट रिव्यू में हिस्सा लेने के लिए इस इलाके में आया था। एक मार्च को भारत सरकार ने इसे कोच्चि पोर्ट में आने की अनुमति दे दी।
नौ मार्च को विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने राज्यसभा में बताया कि भारत की ओर से ‘आईआरआईएस लवन’ को कोच्चि में रुकने देने के फैसले के लिए ईरान ने धन्यवाद जताया है।
उन्होंने कहा, “ईरान ने 20 फरवरी 2026 को तीन जहाजों को हमारे पोर्ट पर आने की अनुमति मांगी थी। एक मार्च को हमने इसकी मंजूरी दे दी। ‘आईआरआईएस लवन’ चार मार्च को कोच्चि पहुंचा। उसका क्रू अभी भारतीय नौसेना की सुविधाओं में है। हमें लगता है कि हमने सही और इंसानियत भरा कदम उठाया है। ईरान के विदेश मंत्री ने इसके लिए धन्यवाद कहा है।”
–आईएएनएस
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