टकसाल सिनेमा शूटआउट मामले में बरी हुए अभय सिंह समेत 3 अन्य आरोपी, MP-MLA Court ने कहा सबूतों का अभाव

Taksal Cinema Firing Case in Varanasi

Taksal Cinema Firing Case in Varanasi : साल था 2002, जब वाराणसी में बाहुबली नेता धनंजय सिंह के काफिले पर टकसाल सिनेमा इलाके में अंधाधुंध फायरिंग की गई थी। इस घटना में 5 लोगों को गोली लगने की जानकारी सामने आई थी, जिससे पूरे क्षेत्र में उस समय दहशत फैल गई थी।

घटना के बाद पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच शुरू की और कई लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया। लंबे समय तक चली सुनवाई के दौरान यह केस कई चरणों से गुजरा और गवाहों के बयान, सबूतों और परिस्थितियों की गहन जांच की गई।

Varanasi Court on Taksal Case: कोर्ट का फैसला

आज इस मामले में MP-MLA कोर्ट का फैसला आया है. कोर्ट ने आरोपी अभय सिंह समेत तीन अन्य आरोपियों को इस मामले में बरी कर दिया है. कोर्ट का यह फैसला 24 साल बाद आया है.

बता दें, यह फायरिंग बाहुबली धनंजय सिंह के काफिले पर की गई थी जिसमें पांच लोगों को गोलियां लगी थी. अब सबूतों के अभाव में आरोपियों को राहत मिल गई है.

Taksal Cinema Firing Case in Varanasi : सबूतों का अभाव

Taksal Cinema Firing Case in Varanasi
Taksal Cinema Firing Case in Varanasi (Source: Social Media)

बता दें, अदालत ने पेश किए गए साक्ष्यों और सबूतों में पर्याप्त ठोस सबूतों की कमी पाई गई, जिसके चलते अभियोजन पक्ष आरोपियों के खिलाफ आरोप साबित करने में असफल रहा। इसी आधार पर एमपी-एमएलए कोर्ट ने आरोपी अभय सिंह समेत तीनों आरोपियों को बरी करने का फैसला सुनाया।

कोर्ट में जाते हुए विधायक अभय सिंह ने कहा था कि पिछले 24 सालों से वह इस फर्जी मुकदमे में परेशान हो गए हैं. बता दें, अभय सिंह के खिलाफ पूर्व सांसद धनंजय सिंह ने केस दर्ज कराया था कि जब वह अपने एक परिचित के यहां से वापस जौनपुर लौट रहे थे, इस दौरान कैंट थाना क्षेत्र के टकसाल सिनेमा के बाहर चार पहिया वाहन से आए विधायक अभय सिंह व एमएलसी विनीत सिंह और उनके कुछ समर्थकों ने फायरिंग की थी.

What is MP-MLA Court: क्या होता है एमपी एमएलए कोर्ट?

What is MP-MLA Court
What is MP-MLA Court (Source: Social Media)

एमपी एमएलए कोर्ट भारत में नेताओं के लिए स्पेशल कोर्ट है जहां नेताओं से जुड़े आपराधिक मामलों की तेजी से सुनवाई की जाती है. 2017 में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद इन मामलों को 1 साल के भीतर निपटने और राजनीति के अपराधीकरण को कम को कम करने के लिए इन्हें हर राज्य में बनाया गया है.

इस कोर्ट के माध्यम से वर्तमान और पूर्व जन प्रतिनिधियों के मामले में तेजी से सुनवाई और फ़ास्ट ट्रैक न्याय सुनिश्चित करने के लिए बनाया गया है.

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