वॉशिंगटन, 17 जुलाई (आईएएनएस)। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने खुफिया और कानून प्रवर्तन से जुड़े दस्तावेजों के एक बड़े संग्रह को सार्वजनिक करने का आदेश दिया है। ट्रंप का दावा है कि ये दस्तावेज अमेरिकी मतदाताओं के डेटा में चीनी सेंधमारी, चुनाव में विदेशी हस्तक्षेप के खतरों और देश की चुनावी व्यवस्था की गंभीर कमियों को उजागर करते हैं।
ट्रंप ने गुरुवार रात देशभर में प्रसारित एक भाषण में कहा, “आज रात, मैं हमारे चुनावी इंफ्रास्ट्रक्चर में मौजूद चौंकाने वाली कमियों को उजागर करने वाली अहम खुफिया जानकारी को तुरंत सार्वजनिक करने और जारी करने की घोषणा कर रहा हूं।”
ट्रंप ने कहा कि ये दस्तावेज़ व्हाइट हाउस की ‘गवर्नमेंट ट्रांसपेरेंसी टास्क फोर्स’ ने तैयार किए थे और राष्ट्रपति के ‘इंटेलिजेंस एडवाइजरी बोर्ड’ तथा वरिष्ठ खुफिया अधिकारियों की मदद से इनकी समीक्षा की गई थी।
उन्होंने कहा कि रिकॉर्ड्स के पहले समूह से पता चला है कि चीन ने 22 करोड़ अमेरिकी वोटरों की फाइलें हासिल कर ली थीं। इन फाइलों में नाम, पते, टेलीफोन नंबर, राजनीतिक जुड़ाव और ऐसी अन्य जानकारी शामिल थी, जिसका इस्तेमाल चुनाव से जुड़े कामों में किया जा सकता था।
व्हाइट हाउस की एक अलग टास्क फोर्स के बयान में कहा गया कि राज्य-विशेष जुड़ाव के बिना 20 करोड़ से अधिक वोटर रिकॉर्ड्स की सुरक्षा में सेंध लगी थी, जबकि कम से कम 18 राज्यों से जुड़े रिकॉर्ड्स भी प्रभावित हुए थे। बयान में सार्वजनिक रूप से 16 क्षेत्रों की पहचान की गई, जिनमें अलास्का, अर्कांसस, कोलोराडो, कनेक्टिकट, फ्लोरिडा, जॉर्जिया, मैरीलैंड, मिशिगन, न्यूयॉर्क, नॉर्थ कैरोलिना और ओहियो शामिल हैं।
ट्रंप ने इंटेलिजेंस कम्युनिटी के अधिकारियों पर चीन की गतिविधियों के बारे में जानकारी छिपाने का आरोप लगाया और कहा कि उनके पहले कार्यकाल के दौरान उन्हें यह जानकारी नहीं दी गई थी।
उन्होंने ‘ऑफिस ऑफ द डायरेक्टर ऑफ नेशनल इंटेलिजेंस’, जस्टिस डिपार्टमेंट, एफबीआई और सीआईए से इस बात की जांच करने को कहा कि कथित तौर पर यह जानकारी क्यों छिपाई गई। उन्होंने यह भी मांग की कि किसी भी गलत काम में शामिल अधिकारियों को नौकरी से निकाला जाए और जहां जरूरी हो, उन पर कानूनी कार्रवाई की जाए।
जारी किए गए रिकॉर्ड में ऐसी रिपोर्टें शामिल हैं, जिनमें आरोप लगाया गया है कि चीन ने ट्रंप को राजनीतिक रूप से कमजोर करने, अमेरिकी बिजनेस लीडर्स और पत्रकारों को प्रभावित करने और अमेरिका में नस्लीय, आर्थिक, इमिग्रेशन और पार्टी-आधारित मतभेदों का फायदा उठाने की कोशिश की।
अन्य दस्तावेजों में चीन द्वारा वोटर-रजिस्ट्रेशन की जानकारी और व्यक्तिगत पहचान वाले डेटा को इकट्ठा करने का जिक्र है। एक आकलन में कहा गया है कि जनवरी 2022 में कोलोराडो, कनेक्टिकट, फ्लोरिडा, मिशिगन, ओक्लाहोमा और रोड आइलैंड से वोटर की सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारी को एक संदिग्ध चीनी साइबर एक्टर ने कमर्शियल वेबसाइटों से डाउनलोड किया था। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि उस एक्टर ने ओहियो के वोटर-रजिस्ट्रेशन एप्लीकेशन को डाउनलोड करने की भी कोशिश की थी, लेकिन वह सफल नहीं हो पाया।
ट्रंप ने मिशिगन में कथित तौर पर धोखाधड़ी वाले वोटर-रजिस्ट्रेशन आवेदनों की जांच से जुड़े एफबीआई रिकॉर्ड्स का भी जिक्र किया। इन रिकॉर्ड्स में गवाहों के आरोपों, डेटाबेस की जांच और कई सालों तक चली फेडरल जांच का ब्यौरा है। आखिरकार प्रॉसिक्यूटर्स ने आरोप लगाने से इनकार कर दिया और बाद में एफबीआई ने यह कहते हुए केस बंद कर दिया कि जांचकर्ताओं को ऐसा कोई फेडरल उल्लंघन नहीं मिला, जिस पर मुकदमा चलाया जा सके।
राष्ट्रपति ने कहा कि उनका प्रशासन गवर्नरों, लॉमेकर्स और राज्य के अधिकारियों को उनके अधिकार क्षेत्र में पाई गई कमियों के बारे में सूचित करेगा। उन्होंने कांग्रेस से ऐसा कानून पास करने का भी आग्रह किया जिसमें वोटिंग के लिए फोटो पहचान-पत्र और नागरिकता का सबूत जरूरी हो, साथ ही मेल बैलेट का इस्तेमाल बहुत कम किया जाए।
होमलैंड सिक्योरिटी विभाग और साइबर सिक्योरिटी एंड इंफ्रास्ट्रक्चर सिक्योरिटी एजेंसी की एक अलग रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि चोरी किए गए वोटर डेटा का इस्तेमाल एब्सेंटी बैलेट (गैर-मौजूदगी में वोट) की मांग करने, वोटर का पता या पोलिंग लोकेशन बदलने और रजिस्ट्रेशन जोड़ने या हटाने के लिए किया जा सकता है। रिपोर्ट में कहा गया है कि सभी 50 राज्यों में वोटर-रजिस्ट्रेशन सिस्टम को निशाना बनाया गया था और कम से कम 20 राज्यों में सिस्टम के साथ छेड़छाड़ की पुष्टि हुई है।
–आईएएनएस
ओपी/एएस
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