वाशिंगटन, 24 मई (आईएएनएस)। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि वाशिंगटन और तेहरान एक बड़े शांति समझौते को अंतिम रूप देने के काफी करीब पहुंच चुके हैं। यह बातचीत मध्य पूर्व और दक्षिण एशिया के कई नेताओं के साथ हुई कॉल्स के बाद आगे बढ़ी, जिनमें पाकिस्तान के आर्मी चीफ जनरल आसिम मुनीर और खाड़ी देशों के नेता भी शामिल थे।
शनिवार को ‘ट्रुथ सोशल’ पर किए गए एक पोस्ट में ट्रंप ने कहा कि अमेरिका, ईरान और क्षेत्र के कई देशों के बीच समझौता लगभग तय हो चुका है और अब सिर्फ कुछ आखिरी बातें बाकी हैं।
ट्रंप ने लिखा, “मैं व्हाइट हाउस के ओवल ऑफिस में हूं, जहां अभी हमारी सऊदी अरब के प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान अल सऊद, यूएई के मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान, कतर के अमीर तमीम बिन हमद बिन खलीफा अल थानी, प्रधानमंत्री मोहम्मद बिन अब्दुलरहमान बिन जासिम बिन जाबेर अल थानी, कतर के मंत्री अली अल-थावादी, पाकिस्तान के फील्ड मार्शल सैयद आसिम मुनीर अहमद शाह, तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन, मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फतह अल-सीसी, जॉर्डन के राजा अब्दुल्ला द्वितीय और बहरीन के राजा हमद बिन ईसा अल खलीफा के साथ बहुत अच्छी बातचीत हुई। यह बातचीत ईरान और शांति से जुड़े एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर केंद्रित थी।”
ट्रंप ने कहा कि यह हाल के महीनों में ईरान और क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर उनकी सबसे बड़ी कूटनीतिक पहल में से एक है।
उन्होंने आगे कहा कि अमेरिका, ईरान और ऊपर बताए गए दूसरे देशों के बीच समझौता लगभग तय हो चुका है, बस अंतिम मंजूरी बाकी है।
ट्रंप ने बताया कि उन्होंने अलग से इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से भी बात की और वह भी बहुत अच्छी रही।
ट्रंप के मुताबिक, अब बातचीत समझौते की आखिरी शर्तों और विवरणों पर चल रही है। डील के अंतिम पहलुओं और बारीकियों पर चर्चा जारी है, और जल्द ही इसकी घोषणा की जाएगी।
ट्रंप के बयान का सबसे अहम हिस्सा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर था। यह एक बेहद महत्वपूर्ण समुद्री रास्ता है, जहां से दुनिया के बड़े हिस्से का तेल गुजरता है।
उन्होंने लिखा, “समझौते के कई दूसरे हिस्सों के साथ-साथ स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को भी खोला जाएगा।”
इस बयान पर भारत में भी खास नजर रहेगी, क्योंकि भारत अपनी तेल जरूरतों के लिए खाड़ी देशों से बड़े पैमाने पर आयात करता है और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में तनाव को हमेशा चिंता की नजर से देखता रहा है।
अगर ईरान से जुड़ा तनाव कम होता है, तो इससे तेल की कीमतों, शिपिंग में रुकावट और सप्लाई चेन से जुड़े जोखिमों को कम करने में मदद मिल सकती है।
हालांकि, ट्रंप ने इस प्रस्तावित समझौता ज्ञापन की पूरी जानकारी साझा नहीं की और न ही यह बताया कि इसमें कौन-सा देश क्या भूमिका निभाएगा। व्हाइट हाउस की तरफ से भी फिलहाल कोई अतिरिक्त जानकारी जारी नहीं की गई है।
–आईएएनएस
एवाई/एएस
(This content is sourced from a syndicated feed and is published as received. Punjab Kesari assumes no responsibility or liability for its accuracy, completeness, or content.)


Download Android App
Download iOS App



