नई दिल्ली, 23 अप्रैल (आईएएनएस)। भारत में दक्षिण अफ्रीका के उच्चायुक्त अनिल सूकलाल ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की है कि वे पश्चिम एशिया युद्ध में शामिल देशों को आपस में जुड़े रहने और इंसानियत की भलाई के लिए शांति ढूंढने के लिए बढ़ावा दें।
आईएएनएस को दिए एक इंटरव्यू में सूकलाल ने कहा कि पश्चिम एशिया में युद्ध का दुनिया पर बहुत बुरा असर पड़ रहा है, खासकर ऊर्जा सुरक्षा के मामले में। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बयान को दोहराया कि अभी युद्ध का समय नहीं है।
उन्होंने उम्मीद जताई कि अगर अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता होती है तो इसका अच्छा नतीजा निकल सकता है।
उन्होंने कहा, “हमें उम्मीद रखनी होगी क्योंकि यही इस समय की जरूरत है। अगर जंग जारी रही, तो इसका हम सभी पर बहुत बुरा असर पड़ेगा। इसका पहले से ही बहुत बुरा असर पड़ा है, खासकर ऊर्जा सुरक्षा के मामले में, लेकिन इसका असर हमारी जिंदगी के दूसरे सभी क्षेत्रों पर भी पड़ता है। इस जंग की वजह से हमारा आर्थिक विकास रुक रहा है, मौके कम हो रहे हैं। जैसा कि प्रधानमंत्री मोदी ने बार-बार कहा है, अभी जंग का समय नहीं है। हमें शांति के बारे में बात करने की जरूरत है। मुझे उम्मीद है कि शांति से फायदा होगा, जो मिडिल ईस्ट और दुनियाभर में शांति ला सकता है।”
डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने ईरान के साथ सीजफायर बढ़ा दिया है, जबकि समुद्री नाकेबंदी को पूरी तरह से बनाए रखा है। व्हाइट हाउस ने कहा है कि बातचीत के लिए कोई डेडलाइन नहीं है और तेहरान पर लगातार आर्थिक दबाव का संकेत दिया है।
दक्षिण अफ्रीका के राजदूत ने बताया, “जाहिर है, यह बढ़ेगा। जैसा कि दक्षिण अफ्रीका के मामले में देखा है, बातचीत से ही आप मतभेदों को सुलझाते हैं और एक आम समझौता और पक्की शांति पाते हैं। इसलिए, हमें पार्टियों को जुड़े रहने और एक-दूसरे से बातचीत जारी रखने के लिए बढ़ावा देना होगा ताकि हम इंसानियत की भलाई के लिए शांति का फायदा पा सकें।”
जब पूछा गया कि क्या पश्चिम एशिया की लड़ाई रिन्यूएबल एनर्जी को अपनाने की रफ्तार को धीमा कर रही है, तो राजदूत सूकलाल ने जवाब दिया, “बेशक, यह रिन्यूएबल एनर्जी और सभी तरह के एनर्जी सहयोग को अपनाने की रफ्तार को धीमा कर रही है। जैसा कि मैंने कहा, यह जंग इंसानियत पर एक दाग है। जंग में कोई नहीं जीतता। हम सब हारे हैं, सिर्फ इस जंग में शामिल पार्टियां ही नहीं, बल्कि पूरी इंसानियत। जितनी जल्दी हम शांति ला सकते हैं, हम सभी को इसका फायदा होगा।”
उन्होंने कहा कि दुनिया मल्टीपोलैरिटी की ओर बढ़ रही है। मुझे लगता है कि सिर्फ चीन और अमेरिका के बीच ही नहीं, बल्कि ग्लोबल पावर में बदलाव हो रहा है। हम एक मल्टीपोलर दुनिया की ओर बढ़ रहे हैं और मुझे लगता है कि यह ग्लोबल कम्युनिटी के लिए अच्छा है। हम नहीं चाहते कि हमारी कलेक्टिव दुनिया में क्या होता है, यह एक या दो पावर तय करें। मुझे लगता है कि हम सभी एक मल्टीपोलर दुनिया देखना चाहेंगे जहां पावर पूरे वैश्विक समुदाय में फैली हो और हम सभी को इससे फायदा हो।”
उन्होंने कहा, “मुझे लगता है कि वो दिन बीत चुके हैं और हम एक नए दौर में जा रहे हैं, जहां हम दुनिया के देशों के बीच पावर के कई पोल बनाने की इच्छा देख रहे हैं, जिसमें अफ्रीका भी इसे तय करने में मेनस्ट्रीम का हिस्सा है। मुझे लगता है कि ग्लोबल साउथ, भारत भी ग्लोबल साउथ का एक लीडिंग देश है और कई दूसरे देशों, खासकर ब्रिक्स देशों के साथ मिलकर एक नए मल्टीपोलर ग्लोबल सिस्टम का आकार तय करने में एक बड़ी भूमिका निभाएगा, और निभा रहा है।”
उन्होंने जी20 समिट के लिए दक्षिण अफ्रीका को न बुलाने के अमेरिका के फैसले की आलोचना की और जोर देकर कहा कि समूह को हथियार बना दिया गया है। दक्षिण अफ्रीका अगले साल जी20 समिट में हिस्सा लेगा और यह सुनिश्चित करने में एक अहम भूमिका निभाता रहेगा कि जी20 चुनौतियों से निपटने और बड़े मौकों का फायदा उठाने के लिए मिलकर काम करे।
दक्षिण अफ्रीकी उच्चायुक्त ने कहा, “जी20 को भी हथियार बनाया गया है। दक्षिण अफ्रीका जी20 का पूर्ण सदस्य है और उसने हर समिट में हिस्सा लिया है, जिसमें वह समिट भी शामिल है जिसे हमने पिछले साल बहुत कामयाबी से होस्ट किया था और हमें इस साल मौजूदा होस्ट ने सभी कामों से बाहर रखा है। लेकिन हम अगले साल जी20 टेबल पर अपनी जगह लेंगे। हम पूर्ण सदस्य रहे हैं और यह सुनिश्चित करने में एक अहम भूमिका निभाते रहेंगे कि जी20 एक कलेक्टिव अलायंस है और हम चुनौतियों से निपटने के लिए सामूहिक रूप से काम करते हैं।”
सूकलाल ने कहा कि दक्षिण अफ्रीका ने अपना संविधान बनाते समय भारतीय संविधान से प्रेरणा ली। दक्षिण अफ्रीका के संविधान दिवस की 30वीं सालगिरह पर, सूकलाल ने कहा, “संविधान दिवस बहुत जरूरी है। हम एक संवैधानिक लोकतंत्र हैं। हमें 1994 में आजादी मिली। 1996 में हमारा नया संविधान लागू हुआ। अपना नया संविधान बनाते समय, हमने भारतीय संविधान से भी प्रेरणा ली ताकि यह पक्का हो सके कि हमारा संविधान उन सभी मूल्यों को अपनाए जो हम एक नया देश बनाने के लिए देखना चाहते हैं और यह सुनिश्चित किया जा सके कि नस्लवाद और रंगभेद से हुई तबाही दक्षिण अफ्रीकी समाज में फिर कभी अपना बुरा रूप न दिखाए।”
उन्होंने आगे कहा, “तो, जब हम अपनी आजादी को याद करते हैं, तो हमें अपने संविधान बनाने वालों पर बहुत गर्व है। हमारे यहां तीन दशक से ज्यादा समय से डेमोक्रेसी है और यह एक बहुत मजबूत संविधान पर टिका है जो गवर्नेंस के मामले में दक्षिण अफ्रीकी समाज के कई तरह के नेचर को ध्यान में रखता है। गवर्नेंस के तीन लेवल, ज्यूडिशियरी, एग्जीक्यूटिव और हमारे लेजिस्लेटिव पिलर अच्छी तरह से बने हुए हैं और बहुत अच्छे से काम करते हैं। हमें दुनिया की सबसे युवा डेमोक्रेसी में से एक होने पर गर्व है और साथ ही भारत के साथ जुड़ने पर भी गर्व है जो न सिर्फ दुनिया की सबसे वाइब्रेंट बल्कि सबसे बड़े लोकतंत्र में से एक है।”
–आईएएनएस
केके/एबीएम
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