Nepal Bangladesh Gen-Z protests: सोनम वांगचुक 26 सितंबर से जोधपुर की जेल में बंद हैं। इस बीच सुप्रीम कोर्ट वांगचुक की पत्नी गीतांजलि जे. आंगमो द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रही है, जिसमें उन्होंने राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (एनएसए) के तहत उनकी गिरफ्तारी को चुनौती दी है।
इस बीच केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में वांगचुक की गिरफ़्तारी को लेकर तर्क दिया है कि लद्दाख में वे युवा पीढ़ी को पड़ोसी देशों नेपाल, बांग्लादेश और श्रीलंका में Gen-Z आंदोलनों से प्रेरित होने के लिए उकसा रहे थे।
दरअसल यह सुनवाई जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस पीबी वराले की सुप्रीम कोर्ट बेंच कर रही थी। वांगचुक की पत्नी आंगमो ने वांगचुक की राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम, 1980 के तहत हिरासत को अवैध बताते हुए चुनौती दी थी।
Tushar Mehta In Supreme Court : केंद्र की तरफ से क्या तर्क चले

शुरुआत में, केंद्र सरकार की तरफ से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि वांगचुक का भाषण, जिसमें वह जगह-जगह गांधीवादी सिद्धांतों का जिक्र करते हैं, जानबूझकर अपने भड़काऊ बातों को छिपाने के लिए है, जिसमें उन्हें युवा पीढ़ी को विरोध प्रदर्शनों के लिए उकसाते हुए देखा गया है, जिसमें आत्मदाह जैसे हिंसक तरीके भी शामिल हैं।
सॉलिसिटर मेहता ने पहले स्पष्ट किया कि कोर्ट की न्यायिक समीक्षा बहुत सीमित है। यह इस सवाल में नहीं जा सकता कि हिरासत सही थी या नहीं, बल्कि यह कि प्रक्रिया का पालन किया गया ताकि हिरासत में लिए गए व्यक्ति के साथ अनुचित व्यवहार न हो। मेहता ने इस पहलू पर कुछ फैसलों का हवाला दिया।
इसमें जोड़ते हुए मेहता ने बताया कि NSA यानि national security act, 1980 के तहत कुछ इनबिल्ट सुरक्षा उपाय हैं। उदाहरण के लिए, जिला मजिस्ट्रेट की हिरासत के अधिकार की पुष्टि राज्य सरकार द्वारा की जानी चाहिए। हिरासत में लिए गए व्यक्ति को हाई कोर्ट के पूर्व जज की अध्यक्षता वाले सलाहकार बोर्ड के सामने विस्तृत प्रतिनिधित्व करने का अधिकार है। मेहता ने कहा कि हिरासत में लिए गए व्यक्ति ने न तो राज्य के उस आदेश को चुनौती दी, जिसमें उसकी हिरासत की पुष्टि की गई थी और न ही सलाहकार बोर्ड के आदेश को।
Tushar Mehta In Supreme Court : क्यों आया अरब स्प्रिंग का जिक्र

मेहता ने आगे कहा, “आप (वांगचुक) शुरुआत में और अंत में महात्मा गांधी को ढाल के रूप में इस्तेमाल कर सकते हैं। लेकिन आखिरकार, आप कह रहे हैं कि मुझे नेपाल जैसी स्थिति, बांग्लादेश जैसी स्थिति चाहिए, यह देखते हुए कि यह एक सीमावर्ती राज्य है, एक बहुत ही संवेदनशील सीमा है।”
मेहता ने फिर टिप्पणी की कि वांगचुक ने विरोध के एक रूप के रूप में आत्मदाह के बारे में भी बात की थी। उन्होंने कहा, “..अगर कोई सरकार बदलना चाहता है तो मुझे कोई दिक्कत नहीं है, लोकतांत्रिक प्रक्रिया का सहारा लेकर चुनाव लड़कर, कृपया अब इस पर ध्यान दें, यहीं से समस्या शुरू होती है।
“मैं कहूंगा, यह मुश्किल नहीं है, क्या आप सभी अरब स्प्रिंग की अवधारणा जानते हैं?” माई लॉर्ड्स, खून-खराबा हुआ और उस समय की सरकार को उखाड़ फेंका गया। इस तथाकथित अरब स्प्रिंग के कारण 6 देशों की सरकारों को हिंसक तरीके से उखाड़ फेंका गया. इसके पीछे कौन था? कोई राजा या बहादुर व्यक्ति नहीं बल्कि एक फल और सब्जी बेचने वाला।” वह भ्रष्ट नेताओं से तंग आ गया और उसने बाज़ार के बीच में खुद को आग लगा ली। वह चाहता है कि Gen-Z ऐसा ही करे। डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट यही होने से रोकना चाहते थे।”
मेहता ने आगे कहा, “यह खून-खराबे वाली सिविल वॉर में शामिल होने का न्योता है, जो अरब विद्रोह का उदाहरण दे रहा है… वह आसानी से प्रभावित होने वाले युवाओं को ऐसा करने के लिए उकसा रहा है।”
दरअसल, अरब स्प्रिंग, हिंसक आंदोलनों की एक ऐसी लहर थी जिसने धरना, विरोध-प्रदर्शन, दंगा तथा सशस्त्र संघर्ष की बदौलत पूरे अरब जगत के संग समूचे विश्व को हिला कर रख दिया। इसकी शुरूआत ट्यूनीशिया में 17 दिसमबर 2010 को मोहम्मद बउज़िज़ी के आत्मदाह के साथ हुई।
Sonam Wangchuk: किस मामले में जेल में बंद वांगचुक

आपको बता सोशल एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक 100 दिनों से अधिक समय से जेल में बंद हैं। उन पर NSA की धारा लगाई गई हैं। NSA act के तहत किसी भी संदिग्ध व्यक्ति या जिससे देश को खतरा हो उस व्यक्ति को बिना मुकदमे के हिरासत में लिया जा सकता है। सोनम वांगचुक लद्दाख को पूर्ण राज्य और संविधान की छठी अनुसूची लागू करने की मांग को लेकर आंदोलन पर थे। जहां से यह पूरा मामला शुरू हुआ। अब आज भी सोनम वांगचुक की गिरफ़्तारी पर सुनवाई जारी रहेगी।
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