अल जजीरा की रिपोर्ट के मुताबिक अधिकारियों ने कहा, पाकिस्तानी पुलिस ने ईशनिंदा के आरोप में चार लोगों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तारी उस समय की गई, जब उन्होंने एक ‘इमाम’ (धार्मिक मौलवी) से इस बात पर बहस की कि क्या एक ईसाई पड़ोसी के अंतिम संस्कार की घोषणा मस्जिद से की जा सकती है।यह मामला 18 नवंबर को पूर्वी शहर लाहौर के पास खोड़ी खुशाल सिंह गांव में हुआ, एक स्थानीय पुलिस अधिकारी फरयाद ने गुरुवार को अल जजीरा को बताया।
उन्होंने कहा, पुरुषों को हिरासत में लिया गया है और हमने उन्हें अदालत में पेश किया है।प्रारंभिक पुलिस रिपोर्ट में कहा गया है कि मुस्लिम थे। उन्होंने मस्जिद से एक ईसाई व्यक्ति के अंतिम संस्कार की घोषणा करने से इनकार करने के बाद एक स्थानीय मौलवी के साथ बहस की।रिपोर्ट में लिखा है, जैसे ही वे (मस्जिद में) पहुंचे। उन्होंने मस्जिद के इमाम को कोसना शुरू कर दिया। मस्जिद का अपमान किया और इस्लाम का अपमान किया।चार लोगों को पाकिस्तान की दंड संहिता की धारा 295 और 298 के तहत आरोपित किया गया था, जिसमें दो साल तक की जेल की सजा का प्रावधान है।
पाकिस्तान ने कभी भी ईशनिंदा कानूनों के तहत किसी अपराधी को फांसी नहीं दी है, लेकिन अपराध के आरोपों के कारण भीड़ या व्यक्तियों द्वारा हत्या की जा रही है। अल जजीरा के टैली के अनुसार, 1990 के बाद से इस तरह की हिंसा में कम से कम 79 लोग मारे गए हैं।पाकिस्तानी मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने चार लोगों के खिलाफ मामले को निराधार बताया है। मानवाधिकार कार्यकर्ता और वकील नदीम एंथोनी ने कहा, अगर कोई मुस्लिम है, जो सद्भाव में इस तरह की घोषणा समुदाय में करना चाहता है, तो यह किसी के विश्वास पर हमला नहीं है, यह एक अच्छा कारण है। तो अगर कोई लाउडस्पीकर पर (अंतिम संस्कार) की घोषणा करता है, तो यह धार्मिक उल्लंघन कैसे है?


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