US Senate Iran Resolution : अमेरिकी सीनेट में ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई सीमित करने से जुड़ा प्रस्ताव आगे नहीं बढ़ सका। गुरुवार को हुई वोटिंग में यह विधेयक बेहद कम अंतर यानी 49-50 से खारिज हो गया, क्योंकि पेन्सिलवेनिया से रिपब्लिकन सीनेटर डेव मैककॉर्मिक मतदान में शामिल नहीं हुए थे।
इस प्रस्ताव के पास होने पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के लिए ईरान पर हमले से पहले संसद की हरी झंडी लेना अनिवार्य हो जाता। हालांकि यह विधेयक खारिज हो गया है तो विपक्षी सांसदों के लिए जरूर एक सेटबेक जैसा है।
फिलहाल यह विधेयक विदेश मामलों की समिति में अटका है और इसे पूरे सीनेट में लाने के लिए सांसदों को नए सिरे से कोशिश करनी होगी। इस बीच, अमेरिकी हमलों और ईरानी जवाबी कार्रवाई से पूरे क्षेत्र में स्थिति बेहद तनावपूर्ण हो गई है।
एक तरफ प्रस्ताव, दूसरी तरफ हमले
बता दें, सीनेट में चल रही खींचतान के बीच अमेरिकी सेना ने देर रात ईरान के बंदर अब्बास, किश और क़ेश्म द्वीप जैसे रणनीतिक ठिकानों पर भीषण हवाई हमले किए।
इसके जवाब में ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) ने कुवैत और जॉर्डन में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइलें दागने का दावा किया।
ईरानी हमले की चपेट में उत्तरी कुवैत में काम कर रही एक चीनी कंपनी की इमारत भी आ गई, जहां एक कर्मचारी की मौत हो गई और कई लोग घायल हो गए। हालांकि, अमेरिकी ठिकानों को हुए नुकसान की स्वतंत्र पुष्टि अभी बाकी है।
लाल सागर में नए गठबंधन की तैयारी
ईरान, इजराइल और अमेरिका के बीच जारी इस जंग की लपटें अब मिस्र तक पहुंच चुकी हैं। मिस्र के एक बंदरगाह पर ड्रोन अटैक के बाद दो मालवाहक जहाजों में भीषण आग लग गई, जिसका शक ईरान समर्थित गुटों पर जताया जा रहा है।
दूसरी ओर, समुद्र में लगातार बढ़ते खतरों को देखते हुए सऊदी अरब ने लाल सागर में व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा के लिए कमर कस ली है। सऊदी अरब एक अंतरराष्ट्रीय गठबंधन बना रहा है, जिसमें अब तक करीब 14 देशों ने शामिल होने की सहमति जताई है।
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