छोटे व मंझोले व्यवसायियों के लिए सहयोग के दरवाजे खोले सरकार : कमल नोपानी

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कोरोना वायरस के कारण लॉकडाउन ने देश की गति को रोक दिया है। ऐसे में बड़ी परेशानी में फंस गए हैं छोटे व मंझोले व्यवसायी। इस संबंध में कैट बिहार चैप्टर के चेयरमैन कमल नोपानी ने कहा कि लोग सुरक्षित रहने के लिए घरों में हैं। यह वक्त की मांग है और इसे पूरा किया जा रहा है।

पटना. कोरोना वायरस के कारण लॉकडाउन ने देश की गति को रोक दिया है। ऐसे में बड़ी परेशानी में फंस गए हैं छोटे व मंझोले व्यवसायी। इस संबंध में कैट बिहार चैप्टर के चेयरमैन कमल नोपानी ने कहा कि लोग सुरक्षित रहने के लिए घरों में हैं। यह वक्त की मांग है और इसे पूरा किया जा रहा है। लेकिन इस लॉकडाउन की अवधि में सिर्फ घरों में रहने से ही सब सुरक्षित नहीं रह पाएंगे। लाखों छोटे व मंझोले व्यवसायी हैं, जिनका रोजगार पिछले डेढ माह से पूरी तरह ठप है। जो सामान उनलोगों ने खरीदा, उसकी कीमत के रूप में पूंजी भी लग गई और नहीं बिकने से उस पूंजी का उपयोग भी नहीं हो सका। इसी प्रकार तमाम छोटी फैक्ट्रियां भी बंद पड़ी हैं। 
कमल नोपानी ने कहा कि हफ्तों से बंद पड़े उद्योग क्षेत्रों पर बिजली बिल का अतिरिक्त बोझ आ रहा है। इन उद्योगों का संचालन तो ठप है लेकिन बिजली बिल उतना ही भेजा गया है, जितना पहले आता था। सभी से फिक्स्ड चार्ज वसूला जा रहा है। वहीं इन व्यापारियों की परेशानी कई गुना बढ़ गई है क्योंकि इनलोगों ने पहले से जो लोन लिया है, उसे चुकाने में परेशानी हो रही है। दुकानों का किराया देना असंभव हो रहा है। कई व्यापारी भुखमरी के कगार पर आ गए हैं। अगर इन परिस्थियों में सुधार नहीं हुआ तो कोरोना के बाद आर्थिक वायरस इस देश की बड़ी आबादी को जकड़ लेगा। 
उन्होंने कहा कि सरकार ने राहत के लिए कई बड़ी घोषणाएं की हैं, जो अच्छी बात है। मगर छोटे एवं मध्यम वर्ग के व्यवसायियों के लिए अब तक कुछ भी नहीं हुआ है। जबकि देश की अर्थव्यवस्था का बड़ा हिस्सा इन पर भी निर्भर है। वहीं कैट बिहार चैप्टर के सचिव अशोक कुमार वर्मा ने कहा कि सरकार जैसे अन्य क्षेत्रों में सुविधाओं की घोषणा कर रही है वैसे ही छोटे एवं मध्यम वर्ग के इंडस्ट्री एवं व्यवसायियों, दुकानदारों, ठेले खोमचे वाले के लिए भी सोचे एवं व्यवस्था करे।

Ujjwal Jain