इन दिनों सोशल मीडिया पर फिल्म ‘हनुमान अंश’ का एक भक्ति गीत तेजी से ट्रेंड कर रहा है। इसके बोल हैं— ‘जब जिद पे आ गई पार्वती..’। साधु तिवारी द्वारा लिखे, गाए और संगीतबद्ध किए गए इस गीत ने आते ही इंटरनेट पर कई रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। यूट्यूब पर इसे और इसके ऑडियो ट्रैक्स को 1 करोड़ (10 मिलियन) से अधिक बार देखा जा चुका है, वहीं इंस्टाग्राम रील्स और फेसबुक पर भी इस पर लाखों वीडियो बनाए जा रहे हैं।
Hanuman Ansh Parvati Song गीत के पीछे की कहानी

यह गीत शिव पुराण के उस पावन प्रसंग पर आधारित है, जब माता पार्वती भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए कठिन तप कर रही थीं। राजा हिमालय की पुत्री को भोलेनाथ संग ब्याह की जिद पर अड़ा देख, उनके अटूट संकल्प की परीक्षा लेने और उन्हें समझाने के लिए ब्रह्मा जी के मानस पुत्र ‘सप्तऋषि’ वहां पहुंचे। फिल्म ‘हनुमान अंश’ का यह गीत इसी संवाद को ठेठ बुंदेलखंडी लोकगीत की धुन में पिरोकर पेश करता है। इसमें सप्तऋषि माता पार्वती को गांव के किसी बड़े-बुजुर्ग की तरह दुलार से समझाते दिखते हैं।
Parvati song lyrics
जब जिद पे आ गई पार्वती समझाने पहुंचे सप्तऋषि
काय जिद कर रही काय को मर रही ऐसे वर के लाने
जाके सीस पे गंगा और गले में डाले फिर रहे सांप
इतने सीधे-साधे हैं, सब कहते भोलेनाथ…
ना खपरा ना छपरा ना फूस की धरे मड़इया
का खावे को धरो वहां बस रोवत रहत लड़इया
भेष धरे अवधूत फिरे, अब तुमसे का कहे बिन्नू
डोरा डांगर ले घूमें वे इनके कछुए नइयां…
जटा लटा न कबहुं संवारे, दीसत महा भयंकर
मूड़ पे आधो चंदा और, बेला पे घूमे शंकर
राम नाम के रसिया हैं वे और उन्हें क्या चाहने
कामदेव के मर्दनहारी घर-गृहस्थी क्या जाने…
क्यों हर वर्ग की जुबान पर चढ़ रहा है यह गीत?
Parvati bhajan lyrics इसमें ‘काय’, ‘मड़इया’, ‘बिन्नू’, ‘खपरा’ जैसे बुंदेलखंडी देसज शब्दों का उपयोग हुआ है, जो हर सुनने वाले को अपनी माटी की महक से जोड़ता है। पारंपरिक शिव भजनों में दिखने वाले भारी-भरकम शोर या आक्रामक धुन के उलट, इस गाने की धुन बहुत ही सहज और शांत है। साधु तिवारी की ठेठ देसी और ताजा आवाज इस संवाद में आत्मीयता भर देती है।
रैप और हिप-हॉप सुनने वाली Gen-Z पीढ़ी भी इस भक्ति रस में डूब रही है। इस गीत ने साबित कर दिया है कि यदि संगीत में अपनापन और भारतीय लोक संस्कृति की खुशबू हो, तो उसे किसी बड़े बजट या पब्लिसिटी की जरूरत नहीं होती।
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