मुंबई : गत सप्ताह भी विदेशी निवेशकों की भारी-भरकम बिकवाली से भारतीय शेयर बाजारों में हडक़म्प मचा हुआ है। डेढ़ महीने के अंतराल निवेशकों की अरबों रुपए की रकम डूब गयी। विदेशी नीतियों के अलावा आरबीआई की होने वाली ब्याज दरों की बैठक का भारतीय शेयर बाजारों पर मंदे का प्रभाव रहा। बीएसई गत सप्ताह 36227.14 की तुलनात्मक अंतिम सत्र में 34376.99 मंदे में ब्लास्ट हुआ। इसी तरह एनएसई भी इसी अवधि में 10930.45 से गिरते हुए अंत में 10316.45 अंक पर बंद हुआ। बीएसई में गत पूरे सप्ताह 1800 अंक से अधिक की गिरावट रही तथा एनएसई में 600 अंक से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गयी। विदेशी शेयर बाजार में मंदे से यहां भी गिरावट का रुख रहा। वहां भी निवेशक बिकवाल एवं विदेशी बाँड्स की ओर निवेश करने के संकेत मिले।
आलोच्य सप्ताह भी विदेशी निवेशकों ने अपनी बिकवाली बनाये रखते हुए भारतीय शेयर बाजारों को मंदे में धराशायी कर दिया। पिछले डेढ़-दो महीने से विदेशी निवेशकों की औसतन बिकवाली करीब 80 प्रतिशत शेयरों में होने से बीएसई व एनएसई सूचकांक गत पूरे सप्ताह लुढक़ते ही रहे। निवेशकों सूत्रों की रिपोर्ट के अनुसार उक्त अवधि में लगभग अरबों रुपए की रकम खतम हो गयी। लगभग 85 प्रतिशत विदेशी शेयर बाजारों का भी यही हाल सुनने को मिल रहा था।
रुपये की गिरावट से लड़खड़ाया शेयर बाजार, दो दिन में डूबे 5 लाख करोड़ रुपये
पिछले महीने यूएस फैड रिजर्व की ब्याज दर बढऩे की जो सूचना रही उसमें वहां की आर्थिक स्थिति काफी मजबूत होने के संकेत मिल रहे हैं, जिसमें कि मार्केट विश्लेषकों के समाचार के अनुसार यूएस अमेरिका की रोजगार दर में इजाफा, मुद्रास्फीति नियंत्रित एवं कम अवधि से लेकर लाँग टर्म के बाँड्स में भारी-भरकम निवेश की खबर सुनी गयी। इसका प्रभाव भारतीय शेयर बाजारों पर गिरावट के रूप में देखने को मिला।
यहां भारतीय रुपया डॉलर, यूरो व पौंड की तुलनात्मक निचले स्तर (डेपरीसिएट) चले जाने से निवेशकों द्वारा विदेशी मुद्राएं भारी मात्रा में बैक-टू-पवेलियन किये जाने से रुपये में भारी गिरावट आ गयी है, जिसमें कि कच्चे तेल वैश्विक बाजारों में ऊंचा होता जा रहा है, डॉलर की कीमत ऊंची होने से आयात महंगा हो गया है, जिससे चालू खाता घाटा (सीएडी) बढऩे लगा है तथा यहां पेट्रोलियम पदार्थ की कीमत ऊंची हो गयी है। तेल व ऑटो कम्पनियों के शेयर ध्वस्त हो गये हैं। वहीं कम्पनियों की बिक्री गिर जाने एवं उपभोक्ताओं की खरीद कमजोर पडऩे से परचेचिंग मैनेजिंग इंडैक्स (पीएमआई) गिरने के समाचार थे।


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