Chhattisgarh News: छत्तीसगढ़ के वन मंत्री केदार कश्यप ने बस्तर पंडुम और राष्ट्रपति भवन में बस्तर के आदिवासी प्रतिनिधियों की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से हुई मुलाकात को लेकर कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज के बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि इस तरह के बयान केवल राजनीतिक टिप्पणी नहीं हैं, बल्कि आदिवासी समाज की संस्कृति और सम्मान को ठेस पहुंचाने वाले हैं।
केदार कश्यप ने कहा कि बस्तर पंडुम कोई सामान्य सरकारी कार्यक्रम नहीं है। यह बस्तर की समृद्ध जनजातीय परंपराओं, रीति-रिवाजों और सांस्कृतिक विरासत का बड़ा उत्सव है। इस आयोजन से हजारों लोक कलाकारों, पारंपरिक व्यवस्थाओं और आदिवासी समाज को अपनी संस्कृति दिखाने का अवसर मिलता है। ऐसे आयोजन पर सवाल उठाना पूरे समाज की भावनाओं को आहत करने जैसा है।
राष्ट्रपति भवन में मिला सम्मान ऐतिहासिक कदम
वन मंत्री ने कहा कि पहली बार बस्तर के आदिवासी प्रतिनिधियों को उनकी पारंपरिक वेशभूषा में राष्ट्रपति भवन बुलाया गया। वहां उन्हें सम्मान दिया गया और उनकी संस्कृति को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली। उन्होंने इसे बस्तर के लिए गर्व का क्षण बताया। कश्यप ने कहा कि इस उपलब्धि को राजनीतिक नजरिए से देखना उचित नहीं है। उनके अनुसार, यह सम्मान पूरे आदिवासी समाज का सम्मान है, न कि किसी एक सरकार का।
केदार कश्यप ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए पूछा कि लंबे समय तक सत्ता में रहने के दौरान उसने बस्तर की संस्कृति, लोक कलाकारों और पारंपरिक व्यवस्थाओं को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने के लिए कौन-से बड़े कदम उठाए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को पहले अपने कार्यकाल का हिसाब देना चाहिए, फिर वर्तमान सरकार पर सवाल उठाने चाहिए।
बस्तर की बदलती तस्वीर का किया जिक्र
वन मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में बस्तर तेजी से बदल रहा है। उनके मुताबिक, आज बस्तर शांति, विकास, पर्यटन और अपनी सांस्कृतिक पहचान के कारण नई पहचान बना रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार लगातार ऐसे प्रयास कर रही है, जिससे आदिवासी समाज की परंपराओं और संस्कृति को देशभर में सम्मान मिले। केदार कश्यप ने आरोप लगाया कि कांग्रेस सकारात्मक बदलाव को स्वीकार करने के बजाय हर मुद्दे पर राजनीति कर रही है।
उन्होंने कहा कि बस्तर पंडुम और राष्ट्रपति भवन में आदिवासी प्रतिनिधियों के सम्मान जैसे विषयों को भी राजनीतिक रंग देना दुर्भाग्यपूर्ण है। वन मंत्री ने कहा कि कांग्रेस के बयानों से केवल सरकार नहीं, बल्कि हजारों लोक कलाकार, मांझी-चालकी जैसी पारंपरिक व्यवस्थाएं और पूरा बस्तर खुद को अपमानित महसूस कर रहा है। उन्होंने कहा कि बस्तर की जनता विकास और बदलाव को देख रही है और सही समय आने पर इसका जवाब भी देगी।
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