पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह ने केंद्र सरकार पर पंजाब के साथ “सौतेला” व्यवहार करने का आरोप लगाते हुए बुधवार को यहां धरना दिया। अमरिंदर सिंह के नेतृत्व में पंजाब से कांग्रेस के सभी विधायकों और सांसदों ने यहां जंतर मंतर पर धरना दिया। लोक इंसाफ पार्टी के विधायक सिमरनजीत सिंह बैंस, पंजाबी एकता पार्टी के विधायक सुखपाल खैरा और शिरोमणि अकाली दल (डी) के विधायक परमिंदर सिंह ढींडसा भी धरना प्रदर्शन में शामिल हुए।

पंजाब के मुख्यमंत्री ने कहा कि आम आदमी पार्टी को धरने में शामिल नहीं होने के लिए कहा गया क्योंकि दिल्ली में उनकी सरकार ने किसानों को बचाने के लिए संशोधन विधेयक पारित नहीं किये। कांग्रेस सहित कई विपक्षी पार्टियों का आरोप है कि केंद्र द्वारा हाल ही में लाए गए कृषि कानून किसानों के हितों के विरोधी हैं और कार्पोरेट घरानों के हित में हैं।
हालांकि केंद्र ने जोर दिया है कि नए कानून किसानों के हित में हैं। पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह ने बुधवार को प्रवर्तन विभाग (ईडी) द्वारा उनके और उनके परिवार के सदस्यों को जारी किए गए विभिन्न नोटिसों के ‘टाइिंमग’ पर सवाल उठाते और कहा कि केंद्रीय कृषि कानूनों के प्रभाव को नकारने के लिए राज्य सरकार के पारित विधेयकों के चलते ऐसा किया गया।
आईटी-ईडी नोटिस की टाइमिग पर उठाए सवाल
जंतर-मंतर पर धरने के दौरान एक मीडिया से बातचीत में एक सवाल का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि ईडी के नोटिस के अलावा, उनको और उनकी पत्नी परनीत कौर को भी आईटी ने नोटिस दिया था। सिंह ने खुलासा किया कि उनकी दो पोतियां, जिनमें से एक कानून की छात्रा है और दूसरी की सगाई की तैयारी चल रही है, साथ ही एक किशोर पोते, को भी नहीं बख्शा गया और नोटिस दिया गया। सिंह ने कहा, मुझे नहीं पता कि इन पर क्या कहना चाहिए, क्योंकि ये सभी नोटिस केंद्रीय एजेंसियों द्वारा उनकी सरकार के कृषि संशोधन बिल विधानसभा में पारित करने के बाद दिए गए हैं।
आंदोलनकारी किसानों के खिलाफ ‘शहरी नक्सलवाद’ के आरोपों को खारिज करते हुए, मुख्यमंत्री ने किसानों को विरोध करने के लिए उकसाने के आरोपों का भी खंडन किया। उन्होंने कहा कि समस्याएं केंद्र की बनाई हुई हैं। पंजाब केवल शांति चाहता है जिसमें किसान और उद्योग सहित सभी लोग कामयाब हों। भारतीय जनता पार्टी के इस दावे पर पलटवार करते हुए कि केंद्रीय कृषि कानून किसानों को आजाद करने के लिए है, मुख्यमंत्री ने कहा कि सच्चाई इसके विपरीत है। किसानों को कॉरपोरेट के हवाले किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि यह सिर्फ पंजाब के किसानों के लिए ही नहीं बल्कि हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, उत्तर प्रदेश, सहित अन्य राज्यों के लोगों के साथ भी अन्याय है। आम आदमी पार्टी के धरने में शामिल नहीं होने के सवाल पर अमरिंदर सिंह ने उनके डबल स्टैंडर्ड पर सवाल उठाया और पूछा कि उनके विधायक राज्यपाल से मिलने के लिए विधानसभा से पास प्रस्ताव की प्रति सौंपने क्यों गए थे।


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