Desferal Drug Shortage Delhi Hospitals: राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के प्रमुख सरकारी अस्पतालों में थैलेसीमिया मरीजों के लिए बेहद जरूरी दवा डेसफेरल (डेफेरोक्सामाइन) की कमी गंभीर चिंता का विषय बन गई है। लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज (एलएचएमसी), लोक नायक जय प्रकाश नारायण (एलएनजेपी) अस्पताल और गुरु तेग बहादुर (जीटीबी) अस्पताल जैसे बड़े स्वास्थ्य संस्थानों में पिछले कई महीनों से इस दवा का स्टॉक खत्म बताया जा रहा है।
फेमा के चीफ पैट्रन डॉ. रोहन कृष्णन बताते हैं कि थैलेसीमिया एक आनुवंशिक रक्त विकार है, जिसमें मरीजों को नियमित ब्लड ट्रांसफ्यूजन के साथ आयरन कीलेशन थेरेपी की आवश्यकता होती है। डेसफेरल इस थेरेपी का अहम हिस्सा है, जो शरीर में जमा अतिरिक्त आयरन को बाहर निकालने में मदद करती है। इसकी अनुपलब्धता से मरीजों में आयरन ओवरलोड का खतरा बढ़ रहा है, जिससे हृदय, लीवर और अन्य अंगों को गंभीर नुकसान हो सकता है। जमीनी स्तर पर की गई जांच में सामने आया है कि केंद्र और दिल्ली सरकार द्वारा संचालित इन अस्पतालों में दवा की भारी कमी है। मरीजों और उनके परिजनों ने बताया कि उन्हें महीनों से यह दवा नहीं मिल पा रही, जिससे उनका इलाज बाधित हो रहा है।
स्वास्थ मंत्रालय के संज्ञान पर अस्पतालों में बैठकों का दौर जारी
इस स्थिति को गंभीरता से लेते हुए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने हाल ही में एक आपात बैठक बुलाई। इस बैठक में राम मनोहर लोहिया अस्पताल, सफदरजंग अस्पताल और एलएचएमसी के अधिकारियों के साथ-साथ नेशनल थैलेसीमिया वेलफेयर सोसाइटी और थैलेसीमिया इंटरनेशनल फेडरेशन के प्रतिनिधि भी शामिल हुए। बैठक की अध्यक्षता कर रहे स्वास्थ्य सेवाओं के महानिदेशक ने दवा निर्माता कंपनी नोवार्टिस से इस मुद्दे पर चर्चा करने का निर्णय लिया। हालांकि, कंपनी ने सप्लाई में किसी भी कमी से इनकार करते हुए कहा कि वह पब्लिक टेंडर प्रक्रिया के तहत काम करती है और कुछ तकनीकी शर्तें सप्लाई में बाधा बन सकती हैं
सरकारी में नहीं, निजी अस्पतालों में दवा की उपलब्धता पर सवाल
मरीज संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द समाधान नहीं निकला, तो वे दिल्ली हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटा सकते हैं। इस बीच, निजी प्लेटफॉर्म्स पर दवा उपलब्ध होने से सप्लाई सिस्टम पर सवाल खड़े हो रहे हैं।


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