Neet Paper Leak : राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट) में पारदर्शिता और सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग को लेकर फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया मेडिकल एसोसिएशन (फाइमा) ने एक बार फिर राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) और केंद्र सरकार की जवाबदेही पर सवाल उठाए हैं। फाइमा के चीफ पैट्रन डॉ. रोहन कृष्णन ने कहा कि संगठन ने नीट से जुड़े कथित पेपर लीक और परीक्षा प्रणाली में खामियों को लेकर सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका (पीआईएल) दायर की थी।
डॉ. कृष्णन ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने एनटीए और केंद्र सरकार को एक समिति गठित करने तथा यह बताने के लिए हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया था कि भविष्य में पेपर लीक जैसी घटनाओं को कैसे रोका जाएगा और परीक्षा प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी कैसे बनाया जाएगा। उन्होंने कहा कि इसके बाद डॉ. के. राधाकृष्णन के नेतृत्व में एनटीए ने अदालत के समक्ष प्रस्ताव रखा कि वर्ष 2027 से नीट परीक्षा पारंपरिक ऑफलाइन मोड के बजाय कंप्यूटर आधारित परीक्षा (सीबीटी) के माध्यम से आयोजित की जाएगी।
हालांकि, फाइमा का कहना है कि केवल परीक्षा का माध्यम बदल देना पर्याप्त नहीं है। डॉ. कृष्णन के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट ने भी इस बात पर गंभीर चिंता जताई कि सीबीटी लागू करने के साथ परीक्षा सुरक्षा, डेटा संरक्षण और साइबर सुरक्षा को लेकर कोई विस्तृत कार्ययोजना स्पष्ट नहीं की गई है।
इस वर्ष करीब 22 लाख अभ्यर्थियों ने नीट में हिस्सा लिया है
डॉ. रोहन ने कहा कि इस वर्ष करीब 22 लाख अभ्यर्थियों ने नीट में हिस्सा लिया है। ऐसे में यह जानना जरूरी है कि एनटीए परीक्षा को पूरी तरह सुरक्षित बनाने, डेटा लीक और हैकिंग से बचाने तथा किसी भी चूक की स्थिति में जवाबदेही तय करने के लिए क्या कदम उठा रहा है। फाइमा ने यह भी मांग की है कि सीबीटी परीक्षा के प्रारूप, अवधि, मॉक टेस्ट, अभ्यर्थियों की तैयारी और नई व्यवस्था से जुड़े सभी पहलुओं की विस्तृत जानकारी सार्वजनिक की जाए ताकि छात्र समय रहते खुद को नई प्रणाली के अनुरूप तैयार कर सकें। डॉ. कृष्णन ने कहा कि फाइमा बेहतर और पारदर्शी परीक्षा प्रणाली के पक्ष में सरकार के साथ खड़ा है, लेकिन सुप्रीम कोर्ट में एनटीए से जवाबदेही और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर स्पष्ट जवाब भी मांगेगा।



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