रिश्वत मामले में उत्तर प्रदेश ग्रामीण बैंक के पूर्व शाखा प्रबंधक को चार साल की सजा

Summary :

गाजियाबाद, 24 जुलाई (आईएएनएस)। केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) की विशेष अदालत ने रिश्वत लेने के एक मामले में उत्तर प्रदेश ग्रामीण बैंक की मछरा शाखा (मेरठ) के तत्कालीन शाखा प्रबंधक उमेश कुमार सिंघल को दोषी ठहराते हुए चार साल के कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने उन पर 10 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया। सीबीआई के अनुसार, यह मामला 28 अप्रैल 2016 को दर्ज किया गया था। आरोप था कि शाखा प्रबंधक उमेश कुमार सिंघल ने शिकायतकर्ता से 2.50 लाख रुपए का ऋण मंजूर करने और जारी करने के बदले 28 हजार रुपए की रिश्वत मांगी थी। यह…

गाजियाबाद, 24 जुलाई (आईएएनएस)। केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) की विशेष अदालत ने रिश्वत लेने के एक मामले में उत्तर प्रदेश ग्रामीण बैंक की मछरा शाखा (मेरठ) के तत्कालीन शाखा प्रबंधक उमेश कुमार सिंघल को दोषी ठहराते हुए चार साल के कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने उन पर 10 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया।

सीबीआई के अनुसार, यह मामला 28 अप्रैल 2016 को दर्ज किया गया था। आरोप था कि शाखा प्रबंधक उमेश कुमार सिंघल ने शिकायतकर्ता से 2.50 लाख रुपए का ऋण मंजूर करने और जारी करने के बदले 28 हजार रुपए की रिश्वत मांगी थी। यह ऋण ‘इंदिरा संयुक्त दायित्व समूह’ के लिए स्वीकृत किया जाना था, जिसका खाता उत्तर प्रदेश ग्रामीण बैंक की मछरा शाखा में था।

जांच के दौरान पता चला कि बातचीत के बाद आरोपी 25 हजार रुपए रिश्वत लेने पर राजी हो गया। शिकायत मिलने के बाद सीबीआई ने जाल बिछाया और उमेश कुमार सिंघल को शिकायतकर्ता से 25 हजार रुपए की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया।

मामले की जांच पूरी होने के बाद सीबीआई ने 24 जून 2016 को आरोपी के खिलाफ अदालत में आरोप पत्र दाखिल किया। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने आरोपी के खिलाफ पर्याप्त सबूत पेश किए, जिन्हें अदालत ने स्वीकार किया।

सभी पक्षों की दलीलें सुनने और साक्ष्यों की जांच के बाद सीबीआई की विशेष अदालत ने उमेश कुमार सिंघल को दोषी करार दिया। अदालत ने उन्हें चार साल के कारावास की सजा सुनाई और 10 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया।

इससे पहले 23 जुलाई को केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) के एक प्रवर्तन अधिकारी को रिश्वत लेने के आरोप में गिरफ्तार किया था। आरोपी अधिकारी ईपीएफओ के पटियाला जिला कार्यालय में तैनात था।

सीबीआई के अनुसार इस मामले में 22 जुलाई को आरोपी अधिकारी के खिलाफ रिश्वतखोरी का केस दर्ज किया गया था।

जांच एजेंसी ने बताया कि शिकायतकर्ता एक ईपीएफ कंसल्टेंट है। उसके क्लाइंट के खिलाफ कर्मचारी भविष्य निधि और विविध प्रावधान अधिनियम, 1952 की धारा 7ए के तहत ईपीएफओ अधिकारियों के सामने जांच चल रही थी।

–आईएएनएस

एसएचके/वीसी

(This content is sourced from a syndicated feed and is published as received. Punjab Kesari assumes no responsibility or liability for its accuracy, completeness, or content.)

News Desk