High Court News Update: दिल्ली हाईकोर्ट ने दिल्ली सरकार द्वारा एक अहम पोषण योजना को लागू करने के लिए अपनाई गई चयन प्रक्रिया को सही ठहराया है। कोर्ट ने कहा कि टेंडर से जुड़े मामलों में प्रशासनिक फैसलों में दखल देते समय अदालतों को संयम बरतना चाहिए, जब तक कि कोई साफ मनमानी या गलत इरादा साबित न हो जाए। जस्टिस अनिल क्षत्रपाल और जस्टिस अमित महाजन की खंडपीठ ने कई एनजीओ द्वारा दायर की गई रिट याचिकाओं के एक समूह को खारिज कर दिया।
पोषण 2.0′ योजना के तहत पूरक पोषण की आपूर्ति
इन एनजीओ ने ने महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा 20 फरवरी, 2023 को जारी अंतिम चयन सूची से खुद को बाहर किए जाने को चुनौती दी थी। यह सूची ‘सक्षम आंगनवाड़ी और पोषण 2.0’ योजना के तहत पूरक पोषण की आपूर्ति और वितरण के लिए जारी की गई थी। कोर्ट ने माना कि याचिकाकर्ता यह साबित करने में नाकाम रहे कि चयन प्रक्रिया में कोई गैर-कानूनी बात, अतार्किकता या प्रक्रियागत गड़बड़ी थी।
फैसला लेने की प्रक्रिया की जांच
कोर्ट ने इस बात पर ज़ोर दिया कि टेंडर से जुड़े मामलों में न्यायिक समीक्षा सिर्फ फैसला लेने की प्रक्रिया की जांच तक ही सीमित होती है, न कि फैसले के गुण-दोष की जांच तक। खंडपीठ ने कहा कि अदालतों को प्रशासनिक फ़ैसलों पर अपीलीय प्राधिकरण के तौर पर काम नहीं करना चाहिए, और न ही विशेषज्ञ निकायों के विचारों की जगह अपने विचार थोपने चाहिए।
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