Immigration Consultancy Scam Delhi : अक्सर लोग बेहतर करियर, सुरक्षित भविष्य और नई जिंदगी की उम्मीद के साथ सपनों का घर बसाने के लिए सरहदों के पार जाने का ख्वाब देखते हैं। लेकिन जब उन्हीं सपनों को हकीकत में बदलने के लिए कोई कंसल्टेंसी दावा करती है और बदले में सिर्फ इंतजार और निराशा मिले, तो ये सपना धीरे-धीरे बोझ बन जाता है। ऐसा ही एक मामला दिल्ली से सामने आया है, जहां करनाल रोड निवासी रेडियोलॉजिस्ट अर्पित गौर ने ऑस्ट्रेलिया में स्थायी निवास पाने की चाह में भारी रकम खर्च की, लेकिन न तो उन्हें कोई रोजगार हासिल हुआ और न ही उनकी मेहनत की कमाई वापस मिल सकी।
लेकिन करीब सात साल बाद 16 मार्च को जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग, उत्तर-पश्चिम ने कंसल्टेंसी कंपनी सीएन इमीग्रेशन सर्विस को सेवा में दोषी ठहराते हुए छह फीसदी ब्याज सहित 47,000 रुपये लौटाने और 25,000 रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया। साथ ही आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि 30 दिनों के भीतर भुगतान नहीं किया गया, तो देय राशि पर 9 फीसदी ब्याज लागू होगा।
आयोग ने अपने आदेश में साफ तौर पर कहा कि कंसल्टेंसी कंपनी ने सर्विस लीगल एग्रीमेंट के तहत अपनी जिम्मेदारियों का पूरा निर्वहन नहीं किया और केवल अधूरा कार्य किया। आयोग ने यह भी माना कि समझौते में शामिल वह शर्त, जिसमें आईईएलटीएस में आवश्यक स्कोर न आने पर रिफंड से इनकार किया गया था, एकतरफा, अनुचित और कंपनी के पक्ष में झुकी हुई है। आयोग ने स्पष्ट किया कि कंसल्टेंसी की भूमिका केवल फीस लेने तक सीमित नहीं होती, बल्कि उसे पूरे प्रोसेस के दौरान आवेदक का मार्गदर्शन करना भी उतना ही जरूरी होता है।
ऐसे में कंपनी की जिम्मेदारी थी कि वह शिकायतकर्ता को समय रहते उचित सलाह देती। जैसे दोबारा आईईएलटीएस परीक्षा देने का सुझाव देना या पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखना। खासकर तब जब उसने खुद आवेदन मई 2019 तक पूरा होने की संभावना जताई थी। ऐसे में आयोग ने उपलब्ध तथ्यों के आधार पर शिकायतकर्ता के पक्ष में निर्णय सुनाते हुए कार्रवाई के आदेश दिए।
आईईएलटीएस स्कोर बना अड़चन, कंसल्टेंसी ने रोकी प्रक्रिया
शिकायतकर्ता रेडियोलॉजिस्ट अर्पित गौर ने वर्ष 2018 में ऑस्ट्रेलिया में बसने के उद्देश्य से कंसल्टेंसी कंपनी सीएन इमीग्रेशन सर्विस से संपर्क किया। कंपनी ने वीजा कंसल्टेंसी, जॉब असिस्टेंट और पीआर प्रक्रिया में मदद का भरोसा दिलाते हुए उनसे कुल 1,44,000 रुपये की फीस वसूली। सभी आवश्यक दस्तावेज जमा कराने के बाद अर्पित और उनकी पत्नी को प्रारंभिक चरण में योग्य भी घोषित कर दिया गया, जिससे उनके विदेश में बसने की उम्मीद और मजबूत हो गई। आगे की प्रक्रिया के तहत अर्पित ने नवंबर 2018 में आईईएलटीएस परीक्षा दी, लेकिन वह अनिवार्य 7 बैंड स्कोर हासिल नहीं कर सके।
एग्रीमेंट में यह शर्त जरूर शामिल थी कि आवश्यक स्कोर न आने पर फीस वापस नहीं होगी, लेकिन शिकायतकर्ता का आरोप है कि कंसल्टेंसी ने इसी आधार पर पूरी प्रक्रिया को बीच में ही रोक दिया और आगे कोई मार्गदर्शन नहीं दिया।अर्पित का यह भी कहना था कि बार-बार ईमेल और संपर्क करने के बावजूद केस इंचार्ज की ओर से न तो संतोषजनक जवाब मिला और न ही कोई ठोस समाधान दिया गया, जिससे उनका भरोसा पूरी तरह टूट गया।
रिपोर्टर – प्रशांत चौहान


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