रेस कोर्स मस्जिद मामला: दिल्ली हाई कोर्ट को केंद्र का आश्वासन- वक्फ बोर्ड का फैसला आने तक नहीं होगी तोड़फोड़

Summary :

यह विवादित मस्जिद प्रधानमंत्री आवास के पास स्थित करीब 53 एकड़ में फैले रेस कोर्स क्लब परिसर के भीतर है। सैयद अहमद सौद नामक नमाजी ने हाई कोर्ट में याचिका दायर कर मस्जिद को संभावित डिमोलिशन से बचाने और वहां इबादत का अधिकार बहाल करने की मांग की थी।

Delhi Race Course Masjid

Delhi Race Course Masjid: नई दिल्ली स्थित रेस कोर्स मस्जिद को डिमोलिशन से राहत मिलने की उम्मीद जगी है। केंद्र सरकार ने गुरुवार को दिल्ली हाई कोर्ट को भरोसा दिया कि जब तक इस मुद्दे पर दिल्ली वक्फ बोर्ड के रिप्रेजेंटेशन पर अंतिम फैसला नहीं हो जाता, तब तक मस्जिद के खिलाफ कोई बुलडोजर कार्रवाई या तोड़फोड़ नहीं की जाएगी।

लैंड एंड डेवलपमेंट ऑफिस की ओर से पेश वकील ने कोर्ट को बताया कि बोर्ड 4 हफ्तों के भीतर इस पर निर्णय ले लेगा। हालांकि, जस्टिस अनीश दयाल की बेंच ने याचिकाकर्ता को मस्जिद के भीतर फिलहाल नमाज अदा करने की इजाजत देने से इनकार कर दिया है।

पीएम आवास के पास स्थित है मस्जिद

यह विवादित मस्जिद प्रधानमंत्री आवास के पास स्थित करीब 53 एकड़ में फैले रेस कोर्स क्लब परिसर के भीतर है। सैयद अहमद सौद नामक नमाजी ने हाई कोर्ट में याचिका दायर कर मस्जिद को संभावित डिमोलिशन से बचाने और वहां इबादत का अधिकार बहाल करने की मांग की थी।

सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार के वकील आशीष दीक्षित ने याचिकाकर्ता के लोकस स्टैंडी पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि अगर हर नमाजी इस तरह अलग-अलग याचिका लेकर आने लगा तो मुकदमों की बाढ़ आ जाएगी। दूसरी तरफ, याचिकाकर्ता के वकील एम सुफियान सिद्दीकी ने इस दलील का कड़ा विरोध किया। अदालत ने अब इस मामले की अगली सुनवाई के लिए 16 दिसंबर की तारीख तय की है।

हेरिटेज दर्जा का दावा

याचिका में दावा किया गया है कि यह मस्जिद आजादी से पहले की है और 1977 में इसे दिल्ली गजट में अधिसूचित वक्फ संपत्ति दर्ज किया गया था।

इसके अलावा 2009 के एक नोटिफिकेशन के तहत इसे ग्रेड-II हेरिटेज का दर्जा मिला हुआ है। याचिकाकर्ता का कहना है कि 2021 के सर्वे में भी इसे अतिक्रमण नहीं माना गया था और अगस्त 2026 में आए हाई कोर्ट के फैसले में भी मस्जिद को हटाने का कोई निर्देश नहीं था।

बिजली-पानी काटने का आरोप

याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया कि 7 अक्टूबर 2026 को बिना किसी कानूनी नोटिस के मस्जिद का बिजली का कनेक्शन काट दिया गया, जो 1976 से जारी था।

2008 से चालू पानी का कनेक्शन भी काट दिया गया और परिसर खाली करने को कहा गया। याचिका में कहा गया कि संविधान के अनुच्छेद 14 और 25 के तहत धार्मिक आजादी का हनन किया जा रहा है। मामले की अगली सुनवाई 16 दिसंबर को होगी।

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Rohit Singh

रोहित सिंह पिछले 5 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। राजनीति, समाज, अंतर्राष्ट्रीय, अपराध और शैक्षणिक लेख लिखने में दिलचस्पी रखते हैं। दिल्ली विश्वविद्यालय से पोलिटिकल साइंस में ग्रेजुएशन और जामिया मिलिया इस्लामिया से पत्रकारिता की पढ़ाई पूरी की है। वर्तमान में पंजाब केसरी दिल्ली में हिन्दी सब-एडिटर के तौर पर काम कर रहे हैं।