Sir Ganga Ram Hospital Surgery: सर गंगा राम हॉस्पिटल के प्लास्टिक, कॉस्मेटिक और हैंड माइक्रोसर्जरी विभाग ने अपना दूसरा बाइलेटरल हैंड ट्रांसप्लांट सफलतापूर्वक कर एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। यह जटिल सर्जरी हैंड और रिकंस्ट्रक्टिव माइक्रोसर्जरी के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है। इस प्रक्रिया ने विभिन्न विभागों के बीच बेहतरीन समन्वय, विशेषज्ञता और टीमवर्क का उदाहरण पेश किया। इस सर्जरी का नेतृत्व डॉ. महेश मंगल ने किया, जिनके साथ डॉ. अनुभव गुप्ता, डॉ. भीम नंदा और डॉ. निखिल झुनझुनवाला सहित पूरी टीम ने अहम भूमिका निभाई।
एनेस्थीसिया टीम में डॉ. जया सूद, डॉ. राकेश सक्सेना और डॉ. अजय सिरोही शामिल रहे, जिन्होंने ऑपरेशन के दौरान मरीज की स्थिति को स्थिर बनाए रखा। इसके अलावा ऑर्थोपेडिक्स, नेफ्रोलॉजी, न्यूरोलॉजी, मनोचिकित्सा और पैथोलॉजी विभागों ने भी महत्वपूर्ण योगदान दिया। अस्पताल प्रशासन और ओटी स्टाफ के समर्पित प्रयासों ने इस लंबी और जटिल प्रक्रिया को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
हैंड ट्रांसप्लांटेशन माइक्रोसर्जरी की सबसे कठिन प्रक्रिया
सर्जरी को लीड करने वाले डॉ. महेश मंगल ने बताया कि बाइलेटरल हैंड ट्रांसप्लांटेशन को आधुनिक माइक्रोसर्जरी की सबसे कठिन प्रक्रियाओं में गिना जाता है। इसमें हड्डियों, नसों, टेंडन और रक्त वाहिकाओं को उच्च स्तर की सटीकता के साथ जोड़ना होता है, जिसमें 10 से 12 घंटे या उससे अधिक समय लग सकता है। इस मामले में मरीज के दाहिने हाथ का ट्रांसप्लांट सुप्राकॉन्डिलर स्तर पर और बाएं हाथ का डिस्टल फोरआर्म स्तर पर किया गया। डॉक्टरों के अनुसार, यह केवल एक सर्जिकल सफलता नहीं, बल्कि एक भावनात्मक उपलब्धि भी है। यह सर्जरी दो बच्चों की एक युवा मां के लिए नई जिंदगी लेकर आई है, जिससे वह फिर से अपने बच्चों को गोद में लेने और सामान्य जीवन जीने में सक्षम हो सकेगी।
इस उपलब्धि के पीछे डोनर और उनके परिवार का भी अहम योगदान रहा, जिनकी निस्वार्थ भावना ने एक जीवन को नई उम्मीद दी। यह सफलता चिकित्सा विज्ञान और मानवीय संवेदना के अद्भुत संगम का प्रतीक है।























