Launch of Sangha Prarthana : झंडेवाला स्थित केशव कुंज में सोमवार को सुरुचि प्रकाशन द्वारा प्रकाशित डॉ. मार्कंडेय आहूजा की पुस्तक ‘संघ प्रार्थना : गीता के परिप्रेक्ष्य में’ का लोकार्पण हुआ। कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सह-सरकार्यवाह डॉ. कृष्ण गोपाल मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित रहे, जबकि प्रख्यात गीता मनीषी एवं जीओ गीता के संस्थापक स्वामी ज्ञानानन्द महाराज ने अपना आशीर्वचन प्रदान किया।
कार्यक्रम की शुरुआत में सुरुचि प्रकाशन के प्रबंध निदेशक रजनीश जिंदल ने बताया कि देशभर के 150 से अधिक पुस्तक-विक्रय केंद्रों और ऑनलाइन माध्यमों के द्वारा विभिन्न विषयों पर आधारित 600 से अधिक शीर्षक पाठकों के लिए उपलब्ध हैं। लेखक डॉ. मार्कंडेय आहूजा ने कहा कि संघ प्रार्थना केवल कुछ शब्दों का समूह नहीं है, बल्कि वह भारतीय जीवन-दृष्टि, राष्ट्रचेतना, कर्तव्यबोध और आध्यात्मिक मूल्यों का सजीव घोष है। उन्होंने यह भी बताया कि पुस्तक में भगवद्गीता के आलोक में संघ प्रार्थना के विविध आयामों का विश्लेषण प्रस्तुत किया गया है।
इस दौरान डॉ. कृष्ण गोपाल ने भारतीय चिंतन की परंपरा, गीता के सार्वकालिक संदेश और राष्ट्रजीवन में प्रार्थना के महत्त्व पर विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि गीता ने विश्व के सामने एक नवीन प्रकार का दर्शन प्रस्तुत किया है। गीता मनुष्य को उसके कर्तव्य का बोध कराती है। स्वामी ज्ञानानन्द महाराज ने उपस्थित जनों को गीता के संदेश को अपने जीवन में आत्मसात करने की प्रेरणा दी। उन्होंने कहा कि संघ की प्रार्थना का मूल भाव गीता के संदेश से ही प्रेरित है और उसका उद्देश्य मन पर पड़े अज्ञान के आवरण को दूर करना है।



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