एक नई सुबह

जब नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री-निर्वाचित तारीक रहमान के शपथ-ग्रहण समारोह में आमंत्रित करने का पहला कदम बांग्लादेश की ओर से उठाया गया तो यह संबंधों को फिर से पटरी पर लाने का स्पष्ट संकेत और इरादा था। यह उस रिश्ते के लिए मानो एक नए सवेरा जैसा था जो अपने अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुंच चुका था। रिकॉर्ड के लिए रहमान की बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) ने हालिया चुनावों में जबरदस्त जीत दर्ज की। यह वह पहला चुनाव था जिसका सामना देश ने शेख हसीना की सत्ता से विदाई के बाद किया।
रहमान पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के पुत्र और राजनीतिक उत्तराधिकारी हैं। खालिदा जिया का पिछले वर्ष दिसंबर में निधन हो गया था। शेख हसीना की कट्टर प्रतिद्वंद्वी रहीं खालिदा लंबे समय से अस्वस्थ चल रही थीं। बीएनपी की निर्णायक जीत के पीछे क्या कारण रहा, यह कहना कठिन है: क्या यह सहानुभूति लहर थी, या हसीना-विरोधी भावना, या फिर रहमान की उम्मीदवारी परंतु तथ्य यही है कि अब सत्ता की बागडोर रहमान के हाथ में है। पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की आवामी लीग को चुनाव लड़ने से प्रतिबंधित कर दिया गया था। पिछले 30 वर्षों में यह पहली बार था जब आवामी लीग का चुनाव-चिह्न ‘नाव’ मतपत्र पर दिखाई नहीं दिया। अतीत के विपरीत जब आवामी लीग ने दो बार संसदीय चुनावों का बहिष्कार किया था, इस बार पार्टी भाग ही नहीं ले सकी क्योंकि उसका पंजीकरण निलंबित कर दिया गया था। दक्षिणपंथी जमात-ए-इस्लामी ने 77 सीटें जीतीं। जमात को पाकिस्तान के क़रीब माना जाता है। आवामी लीग के शासनकाल तक जमात और बीएनपी दोनों ही शेख हसीना के शासन का विरोध करने में साथ-साथ थे।
साझा विरोधी अर्थात शेख हसीना के हटते ही दरारें उभरने लगीं और दोनों के रास्ते अलग हो गए। आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हुआ, जिसमें बीएनपी के एक वर्ग ने अपने पूर्व सहयोगी पर धर्म का राजनीतिक लाभ के लिए उपयोग करने का आरोप लगाया। इसके अतिरिक्त जमात अब परछाइयों से बाहर आकर स्वयं को नए रूप में परिभाषित कर रही है,सिर्फ़ सहायक भूमिका निभाने या कनिष्ठ साझेदार बने रहने के बजाय अपनी स्वतंत्र पहचान और प्रभाव स्थापित करने की कोशिश में।
इस दूरी का असर बीएनपी की छवि पर भी पड़ा है, जिसने स्वयं को आक्रामक के बजाय मध्यमार्गी, उदार और धर्मनिरपेक्ष रूप में प्रस्तुत करना शुरू किया है। वर्तमान परिदृश्य में चारों ओर उत्साह का माहौल है। अलग-अलग दलों के आंकड़ों से इतर, जनता के एकजुट होकर अपनी आवाज़ वापस हासिल करने की भावना स्पष्ट रूप से दिखाई दे रही है। यदि बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) ने इस जनादेश को भय की समाप्ति और “धमकी के माहौल से आगे बढ़ने” का संदेश बताया तो अंतरिम सरकार के प्रमुख और बांग्लादेश के एकमात्र नोबेल पुरस्कार विजेता मुहम्मद यूनुस ने कहा कि देश ने “दुःस्वप्न का अंत कर एक नए स्वप्न की शुरुआत” कर दी है।
चुनाव के साथ-साथ यूनुस द्वारा समर्थित संवैधानिक सुधारों के एक पैकेज पर जनमत-संग्रह भी कराया गया, जिसे ‘जुलाई चार्टर’ कहा जाता है। इसका उद्देश्य न्यायपालिका की स्वतंत्रता को सुदृढ़ करना और प्रधानमंत्री के लिए दो कार्यकाल की सीमा निर्धारित कर भविष्य में किसी भी निरंकुश शासन के उभरने की संभावना को रोकना है। बहुमत मतदाताओं ने इस चार्टर के पक्ष में मतदान किया। चुनावी प्रक्रिया के दौरान शेख हसीना भारत में निर्वासन में रहीं, क्योंकि एक युद्ध अपराध न्यायाधिकरण ने उनके शासनकाल के दौरान कथित रूप से किए गए मानवता-विरोधी अपराधों के लिए उन्हें दोषी ठहराया था। अगस्त 2024 में छात्र-नेतृत्व वाले जनविद्रोह ने हसीना के 15 वर्षों के शासन का अंत कर दिया था। यह आंदोलन व्यापक भ्रष्टाचार, मानवाधिकार उल्लंघनों और आर्थिक मंदी को लेकर बढ़ते जनाक्रोश का परिणाम था। इस विद्रोह और सरकार विरोधी प्रदर्शनकारियों पर हसीना सरकार की कठोर कार्रवाई में एक हजार से अधिक लोगों की मौत हुई और कई अन्य घायल हुए। इसी अगस्त 2024 में सरकारी नौकरियों में विवादास्पद आरक्षण प्रणाली के विरोध में छात्र सड़कों पर उतर आए थे। आंदोलन ने शीघ्र ही उग्र रूप ले लिया और हसीना को देश छोड़कर जाना पड़ा। तब से वे भारत में रह रही हैं, जबकि बांग्लादेश की यूनुस नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार की ओर से इस पर लगातार आलोचना होती रही है।
चुनाव से कुछ सप्ताह पहले शेख हसीना ने देश के मतदाताओं से चुनाव बहिष्कार की अपील की थी। चुनाव परिणाम आने के बाद उन्होंने इसे “सुनियोजित प्रहसन” बताते हुए नतीजों को रद्द करने की मांग की। भारत उन पहले देशों में शामिल था जिसने बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) को बधाई दी। हसीना के पतन और भारत द्वारा उन्हें शरण दिए जाने के बाद से दोनों पड़ोसी देशों के संबंधों में गिरावट आई थी। ऐसे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का बधाई संदेश और उसके बाद बीएनपी द्वारा तारीक रहमान के शपथ ग्रहण समारोह के लिए मोदी को आमंत्रित किया जाना सही दिशा में उठाया गया कदम माना जा रहा है। मोदी ने एक्स पर लिखा, “मैंने बांग्लादेश की जनता की आकांक्षाओं को पूरा करने के उनके प्रयासों के लिए अपनी शुभकामनाएं और समर्थन व्यक्त किया। गहरे ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंधों वाले दो निकट पड़ोसी देशों के रूप में, मैंने दोनों देशों के लोगों की शांति, प्रगति और समृद्धि के प्रति भारत की निरंतर प्रतिबद्धता दोहराई।”
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पोस्ट के जवाब में पार्टी ने लिखा, “हम परस्पर सम्मान, एक-दूसरे की चिंताओं के प्रति संवेदनशीलता और क्षेत्र में शांति, स्थिरता व समृद्धि के साझा संकल्प के मार्गदर्शन में भारत के साथ अपने बहुआयामी संबंधों को आगे बढ़ाने के लिए रचनात्मक संवाद की आशा करते हैं।” मोदी ने कहा, “भारत एक लोकतांत्रिक, प्रगतिशील और समावेशी बांग्लादेश के समर्थन में खड़ा रहेगा,” और जोड़ा कि वे रहमान के साथ काम करने के इच्छुक हैं और यहीं पेच भी छिपा है। बांग्लादेश,जिसने विरोध-प्रदर्शनों के दौरान हुई मौतों के मामले में हसीना को मृत्युदंड सुनाया है, उनकी प्रत्यर्पण की मांग कर रहा है।
भारत ने न केवल इस अनुरोध को ठंडे बस्ते में डाल रखा है, बल्कि हसीना को भारतीय भूमि से चुनावी प्रचार करने की अनुमति भी दी है। चुनाव से ठीक पहले जब उन्होंने अपने देश के मतदाताओं से बहिष्कार की अपील करने के लिए संपर्क साधा तो ढाका ने भारत से यह सवाल उठाया कि हसीना को प्रेस संबोधित करने की अनुमति क्यों दी गई अर्थात उन्हें राजनीतिक एजेंडा चलाने की छूट कैसे मिली। एक बयान में कहा गया, “हम आश्चर्यचकित और स्तब्ध हैं कि भारत ने एक फरार पूर्व प्रधानमंत्री को नई दिल्ली में सार्वजनिक संबोधन करने दिया और एक सामूहिक हत्यारे को खुलेआम घृणा भाषण देने की अनुमति दी।”
इसके साथ ही तारीक रहमान की “बांग्लादेश फर्स्ट” वाली टिप्पणी जो उन्होंने भारत के साथ संबंधों पर पूछे गए एक प्रश्न के उत्तर में कही, संदेश को और स्पष्ट कर दिया है: भारत दोहरी नीति नहीं अपना सकता, एक ओर शेख हसीना को शरण दे और दूसरी ओर रहमान के नेतृत्व वाली नई व्यवस्था से हाथ मिलाए।
इस प्रकार औपचारिक संकेतों, जैसे भारत का बधाई संदेश और बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को शपथ ग्रहण समारोह में आमंत्रण से इतर वास्तविक परीक्षा तब होगी जब हसीना के प्रत्यर्पण जैसे विवादास्पद मुद्दों पर निर्णय लेने की बारी आएगी।

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