जो लोग कहते हैं कि भारत खीसें निपोरता है, अमेरिका और डोनाल्ड ट्रंप के आगे, उन्हें पता चल जाएगा इस ब्रिक्स सम्मेलन में कि कैसे भारतीय प्रधानमंत्री, नरेंद्र मोदी, दांत खट्टे करते हैं, ट्रंप के! अफजल मंगलौरी का यह शेर भी सुना दें ट्रंप साहब को :
“यारों के दांत बड़े जहरीले हैं,
हमें भी सांपों का मंत्र आता है!”
इस बार का 18वां ब्रिक्स शिखर सम्मेलन अंतर्राष्ट्रीय देशों का एक आगामी सम्मेलन है, जिसकी मेज़बानी भारत 2026 में अपनी ब्रिक्स अध्यक्षता के तहत करेगा। यह सम्मेलन 12-13 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में आयोजित किया जाएगा। इसमें भाग लेने वाले देशों के बीच मज़बूती, इनोवेशन, सहयोग और स्थिरता को बढ़ावा देने पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। ब्रिक्स में ब्राज़ील, चीन, मिस्र, इथियोपिया, भारत, इंडोनेशिया, ईरान, रूस, दक्षिण अफ्रीका और संयुक्त अरब अमीरात जैसे देश शामिल हैं।
ईरान की ओर से कहा गया है कि ट्रंप और नेतन्याहू को “वॉर क्रिमिनल” (युद्ध दोषी) घोषित किया जाए क्योंकि इन्होंने हज़ारों मासूम जानें ली हैं। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस शिखर सम्मेलन की अध्यक्षता करेंगे। ब्रिक्स शिखर सम्मेलन एक अंतर-सरकारी संगठन है, जिसकी बैठक हर साल होती है और इसके सदस्य देशों के बीच, इसकी अध्यक्षता बारी-बारी से बदलती रहती है। 14 और 15 मई 2026 के बीच, ब्रिक्स सदस्य देशों के विदेश मंत्रियों ने नई दिल्ली में एक बैठक की, ताकि राष्ट्राध्यक्षों के शिखर सम्मेलन से पहले वैश्विक मुद्दों पर चर्चा की रूपरेखा तैयार की जा सके। डॉलर की दादागीरी को भी समाप्त करने का प्लान है इस बार।
भारत ने 1 जनवरी 2026 को ब्राज़ील से ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की अध्यक्षता संभाली, ब्राज़ील ने 2025 में 17वें ब्रिक्स सम्मेलन की मेज़बानी की थी। अध्यक्ष के तौर पर, भारत 18वें ब्रिक्स सम्मेलन और उससे जुड़ी मंत्री-स्तरीय व वर्किंग-ग्रुप की बैठकों के आयोजन के लिए ज़िम्मेदार है।
ब्रिक्स के सदस्य देशों में शामिल हैं : ब्राज़ील के विदेश मंत्री मौरो विएरा, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामफोसा, मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फतह अल-सिसी, इथियोपिया के प्रधानमंत्री अबिय अहमद, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान, संयुक्त अरब अमीरात के राष्ट्रपति खालिद बिन मोहम्मद अल नाहयान और इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्राबोवो सुबियांतो। सऊदी अरब के राष्ट्रपति का नाम भी सूची में शामिल है और ब्रिक्स तथा भारत उन्हें सदस्य मानते हैं, लेकिन ‘रियाद ने कभी भी औपचारिक रूप से शामिल होने की सार्वजनिक पुष्टि नहीं की है’। बेलारूस के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर लुकाशेंको, बोलीविया के राष्ट्रपति रोड्रिगो पाज़, क्यूबा के राष्ट्रपति मिगुएल डियाज़-कैनेल, कज़ाकिस्तान के राष्ट्रपति कासिम-जोमार्ट टोकायेव, मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम, नाइजीरिया के राष्ट्रपति बोला टिनुबू, थाईलैंड के प्रधानमंत्री अनुतिन चार्नविराकुल, युगांडा की उपराष्ट्रपति जेसिका अलुपो, उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति शौकत मिर्जियोयेव, वियतनाम के प्रधानमंत्री ले मिन्ह हंग, विदेश सचिव और आमंत्रित नेता कई द्विपक्षीय बैठकें भी कर सकते हैं।
18वां ब्रिक्स सम्मेलन 12-13 सितंबर, 2026 को नई दिल्ली के ‘भारत मंडपम’ में आयोजित किया जाएगा। इस ब्रिक्स के सदस्य और सहयोगी देशों के नेताओं के साथ-साथ ‘आउटरीच’ के लिए आमंत्रित नेता भी एक साथ आएंगे। भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता का मुख्य विषय है: “मज़बूती, इनोवेशन, सहयोग और सस्टेनेबिलिटी के लिए निर्माण”, जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “मानवता सबसे पहले” की भावना पर आधारित जन-केंद्रित दृष्टिकोण को दर्शाता है। इन क्षेत्रों के अलावा नेता आपसी प्राथमिकता वाले मुद्दों पर ब्रिक्स के भीतर सहयोग को मज़बूत करने और वैश्विक व क्षेत्रीय महत्व के मामलों पर अपने विचार साझा करेंगे। भारत की अध्यक्षता में विदेश मंत्रालय देशभर के 25 से ज़्यादा शहरों में 350 से अधिक बैठकें और उच्च-स्तरीय कार्यक्रम आयोजित करेगा। इनका मकसद राजनीतिक सुरक्षा, आर्थिक-वित्तीय सहयोग और लोगों के बीच सांस्कृतिक आदान-प्रदान जैसे तीन मुख्य स्तंभों पर ब्रिक्स की रणनीतिक साझेदारी को और मज़बूत करना है। इन कार्यक्रमों और बिज़नेस-टू-बिज़नेस पहलों के ज़रिए, भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता ने व्यावहारिक और विकास-उन्मुख नतीजों के माध्यम से ब्रिक्स सहयोग को आगे बढ़ाने में योगदान दिया है।
भारत ब्रिक्स का संस्थापक सदस्य है और पहले 2012, 2016 और 2021 में इसकी अध्यक्षता कर चुका है। साल 2026 भी एक अहम पड़ाव है क्योंकि ब्रिक्स अपनी स्थापना के बीस साल पूरे कर रहा है। भारत की अध्यक्षता में 2026 ब्रिक्स प्रेसीडेंसी का विषय ग्लोबल झटकों, सप्लाई चेन की समस्याओं और जलवायु जोखिमों से निपटने के लिए आर्थिक, सामाजिक और संस्थागत सुरक्षा को मजबूत करना है।
समावेशी विकास के लिए डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और फाइनेंशियल टेक्नोलॉजी को आगे बढ़ाना ब्रिक्स के रणनीतिक सहयोग के मुख्य मुद्दे हैं : सदस्य देशों और ग्लोबल साउथ के बीच राजनीतिक, सुरक्षा और आर्थिक संबंधों को गहरा करने पर चर्चा की जाएगी। जलवायु कार्रवाई, ग्रीन और क्लीन एनर्जी को बढ़ावा देने के लिए, विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने ब्रिक्स इंडिया 2026 का ‘लोगो’ लॉन्च किया। जलवायु कार्रवाई, फाइनेंस, एनर्जी ट्रांजिशन और सस्टेनेबल डेवलपमेंट की दिशा में सामूहिक प्रयासों में तेज़ी लाने से मानवता पर असर पड़ता है। कई यूरोपीय संघ के देश भी इसमें भाग लेंगे।
अंतर्राष्ट्रीय संबंधों के विश्लेषक कहते हैं कि ब्रिक्स समिट केवल दिखावटी और प्रतीकात्मक है, जिसका कोई वैश्विक प्रभाव नहीं है। फिलिस्तीन (गाजा) पर अमेरिका-इजराइल के हमले, अनगिनत लोगों की मौत और होर्मुज जल-डमरू-मध्य के बंद होने के बाद, वैश्विक अर्थव्यवस्था को भारी झटका लगा है। इसने अधिकांश देशों की अर्थव्यवस्थाओं को प्रभावित किया है। भारत में भी आम आदमी की खरीदने की क्षमता पर बुरा असर पड़ा है। विदेश सचिव विक्रम मिसरी और विदेश मंत्रालय में उनकी टीम के सामने ब्रिक्स समिट 2026 को सुचारू और सफल बनाने का एक बहुत बड़ा काम है।
यह कहा जा सकता है कि भारत की विदेश नीति “बहुजन हिताय बहुजन सुखाय और वसुधैव कुटुंबकम” (यानी दुनिया एक परिवार है और पृथ्वी पर सभी जीव सद्भाव और शांति से रहें) की ओर झुकी हुई है। दुनिया के नेताओं के वर्किंग-ग्रुप के बीच इस तरह की अंतर्राष्ट्रीय बातचीत युद्धरत देशों के बीच शांति लाने के लिए ज़रूरी है। पश्चिम एशिया में शांति, फिलिस्तीन-इजराइल में शांति और किसी भी देश द्वारा प्राकृतिक संसाधनों के लालची विस्तार की निंदा जैसे मुद्दों पर ध्यान दिया जाना चाहिए। उम्मीद है कि नई दिल्ली में होने वाला ब्रिक्स सम्मेलन 2026 शांति, समृद्धि और वैश्विक सह-अस्तित्व का अग्रदूत साबित होगा।
ब्रिक्स सम्मेलन में भारत की अहम भूमिका !
Summary :
जो लोग कहते हैं कि भारत खीसें निपोरता है, अमेरिका और डोनाल्ड ट्रंप के आगे, उन्हें पता चल जाएगा इस ब्रिक्स सम्मेलन में कि कैसे भारतीय प्रधानमंत्री, नरेंद्र मोदी, दांत खट्टे करते हैं, ट्रंप के! अफजल मंगलौरी का यह शेर भी सुना दें ट्रंप साहब को : “यारों के दांत बड़े जहरीले हैं, हमें भी सांपों का मंत्र आता है!” इस बार का 18वां ब्रिक्स शिखर सम्मेलन अंतर्राष्ट्रीय देशों का एक आगामी सम्मेलन है, जिसकी मेज़बानी भारत 2026 में अपनी ब्रिक्स अध्यक्षता के तहत करेगा। यह सम्मेलन 12-13 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में आयोजित किया जाएगा। इसमें भाग लेने…


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