सिख धर्म के संस्थापक गुरु नानक देव जी ने आज से 550 साल पूर्व जिस मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी जो आदर्श दुनिया को सिखलाए। आज उस पर लगता है कि सिख धर्म के लोग भी पूरी तरह से चलने को तैयार नहीं हैं जिसके परिणामस्वरूप आज ज्यादातर सिख समुदाय के लोग भी अनेक तरह के संकट से गुजर रहे हैं। गुरु नानक देव जी ने किरत करो, नाम जपो, वंड छको के साथ-साथ सरब साझीवालता, आपसी प्यार, महिलाओं का सम्मान, वहम भ्रम से दूर होकर सिख को एक ओंकार का संन्देश दिया, मगर आज देखा जा रहा है कि सिख समुदाय के बहुत से लोग डेरावादियों के अनुयाई बनकर रह गए हैं।
लोगों में प्रमात्मा के प्रति विश्वास समाप्त होता जा रहा है और अपने दुखों से निजात पाने हेतु गुरु नानक के मार्गदर्शन के विपरीत चलते दिखाई दे रहे हैं जिसके परिणामस्वरूप आज सिख धर्म के लोगों, यहां तक कि धर्म के प्रचारक, ग्रन्थी, रागी सिंह को आम जनता को गुरु नानक के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देनी चाहिए वह स्वयं भी उस पर चलते दिखाई नहीं देते। गुरु नानक देव जी ने संवाद से हर मसले का हल निकालने की शिक्षा दी, पर आज लोगों में सहनशीलता समाप्त होती जा रही है और लोग मामूली सी बात पर एक-दूसरे के खून के प्यासे होने लगे हैं।
गुरु नानक देव जी ने महिला को बहुत उंचा दर्जा देते हुए सौ क्यों मंदा आखिए जित जन्मे राजान का सन्देश दिया, मगर आज लोग छोटी बच्चियों का शोषण तक करने में परहेज नहीं करते। बेजुबानों पर अत्याचार, धर्म जाति, पार्टीवाद की आड़ में जिस प्रकार से समाज का माहौल खराब किया जा रहा है, अगर लोग अब भी गुरु नानक के मार्ग पर चलने लगे तो फिर से समाज में शान्ति, परिवारों में एकजुटता लाई जा सकती है। इसका मुख्य कारण शायद यह है कि आज स्कूलों में बच्चों को दुनियावी शिक्षा तो दी जा रही है, शिक्षा का आधुनीकरण किया गया है मगर एक भी शैक्षणिक संस्थान ऐसा नहीं है जिसमें गुरु नानक के सन्देश बच्चों को पढ़ाए जाते हों।
इसी के चलते अमरीका निवासी बलजीत सिंह एक सोच लेकर आगे आए हैं और उनके द्वारा गुरु नानक गलोबल यूनिवर्सिटी की शुरूआत की जा रही है जिसमें बच्चों को दुनियावी शिक्षा के साथ गुरु नानक साहिब के सन्देशों पर आधारित सिलेबस पढ़ाया जाएगा जिससे समाज में फैली बुराईओं का अन्त किया जा सके और बच्चे को उच्च श्रेणी का विद्यार्थी बनाने से पूर्व एक अच्छा नागरिक बनाया जा सके। पंजाब के चंडीगढ़ में इसकी घोषणा के मौके पर ही अनेक यूनिवर्सिटियों ने उनके कार्य की सराहना करते हुए उनके सिलेबस को अपनी यूनिवर्सििटयों में पढ़ाने का संकल्प लिया।
मुझे भी इस कार्यक्रम का हिस्सा बनकर विभिन्न वक्ताओं के विचार सुनने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। मैंने देखा कि सभी की इच्छा इस बात की है मगर आज तक किसी ने भी इस पर गौर नहीं फरमाया और अगर ऐसा हो जाता है तो निश्चित तौर पर समाज में एक ना एक दिन बदलाव अवश्य आएगा और गुरु नानक के आदर्शों पर लोग फिर से चलते दिखाई देंगे। सेवा, सफलता और सरोकारों का वैश्विक उत्सव ‘‘द सिख अवार्ड’’ : दुनियाभर में बसे सिख समुदाय की उपलब्धियों, सेवा-भाव और नेतृत्व को एक भव्य मंच देने वाला ‘‘द सिख अवार्ड’’ जिसकी शुरुआत 2010 में हुई और तब से लेकर हर साल यह उन सिखों को जो अपनी काबलियत, शिक्षा, व्यवसाय, सामाज के प्रति अपनी जिम्मेवारी निभाते हुए सिख कौम और देश का नाम देश विदेश में रोशन कर रहे हैं उन्हें आगे लाकर अवार्ड दिया जाता है।
2026 का संस्करण विशेष इसलिए भी है क्योंकि इसमें श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गढ़गज, शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबन्धक कमेटी के अध्यक्ष हरजिन्दर सिंह धामी सहित विभिन्न धार्मिक संस्थाओं के साथ सीधे तौर पर जुड़कर समाज सेवा के अनेक कार्य करते आ रहे मुम्बई निवासी गुरिन्दर सिंह बावा का नाम भी शामिल किया गया है जिनके द्वारा मुम्बई के खालसा कालेज में सबसे सस्ती एमआरआई की सुविधा संगत को प्रदान की जा रही है। इसके साथ ही अब तख्त पटना साहिब में भी इस सुविधा की जल्द ही शुरूआत की जाने वाली है।
बीते दिनों जब पंजाब में बाढ़ आई तो भी इनके द्वारा अहम भूमिका अदा करते हुए लोगों को मदद पहुंचाई गई जिसके चलते अब यह समारोह अब एक वैश्विक आंदोलन का रूप ले चुका है। इसके अतिरिक्त इस बार शिक्षा, व्यवसाय, खेल, मीडिया, कला, चौरिटी और लाइफटाइम अचीवमेंट जैसी विभिन्न श्रेणियों में प्रेरणादायक हस्तियों को सम्मानित किया जाएगा। इस मंच पर वह उद्यमी जिन्होंने अपने स्टार्टअप से सैकड़ों लोगों को रोजगार दिया।


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