अम्बेडकर के सपने को साकार कर रही सरकार

Summary :

“हम, भारत के लोग, भारत को एक सम्पूर्ण समाजवादी पंथनिरपेक्ष लोकतंत्रात्मक गणराज्य बनाने के लिए तथा उसके समस्त नागरिकों को सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय सुनिश्चित करने तथा व्यक्ति की गरिमा और राष्ट्र की एकता और अखंडता को सुनिश्चित करते हुए बंधुता को बढ़ावा देने का संकल्प लेते हैं…” डॉ. बी. आर. अंबेडकर के विजन से हमारे राष्ट्र को प्रेरणा एवं मार्गदर्शन मिलता आ रहा है। हमारे संविधान की प्रस्तावना केवल आदर्शों का बखान मात्र नहीं है, यह प्रत्येक नागरिक के लिए न्याय, समानता और गरिमा का एक जीता-जागता आश्‍वासन है। पिछले ग्यारह वर्षों में सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय…

“हम, भारत के लोग, भारत को एक सम्पूर्ण समाजवादी पंथनिरपेक्ष लोकतंत्रात्मक गणराज्य बनाने के लिए तथा उसके समस्त नागरिकों को सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय सुनिश्चित करने तथा व्यक्ति की गरिमा और राष्ट्र की एकता और अखंडता को सुनिश्चित करते हुए बंधुता को बढ़ावा देने का संकल्प लेते हैं…” डॉ. बी. आर. अंबेडकर के विजन से हमारे राष्ट्र को प्रेरणा एवं मार्गदर्शन मिलता आ रहा है। हमारे संविधान की प्रस्तावना केवल आदर्शों का बखान मात्र नहीं है, यह प्रत्येक नागरिक के लिए न्याय, समानता और गरिमा का एक जीता-जागता आश्‍वासन है।

पिछले ग्यारह वर्षों में सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय ने इस संवैधानिक विजन को वास्तविक और आकलन करने योग्‍य प्रगति में बदलने के लिए पूर्ण समर्पण के साथ कार्य किया है। सामाजिक न्याय के प्रति हमारी सतत् प्रतिबद्धता के इस मौके पर मुझे पिछले ग्यारह वर्षों में सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय द्वारा की गई उल्लेखनीय प्रगति की बात आप लोगों को बताते हुए गर्व का अनुभव हो रहा है। हमारा लक्ष्य सुस्पष्ट रहा है – एक ऐसे समावेशी भारत का निर्माण करना जहां प्रत्येक नागरिक गरिमा, समान अवसर और सुरक्षा के साथ जी सके।

हमारी सबसे परिवर्तनकारी पहल में से एक पहल, राष्ट्रीय मशीनीकृत स्वच्छता इकोसिस्टम कार्य योजना (नमस्ते) है। आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय के साथ संयुक्त रूप से शुरू की गई यह योजना जोखिमपूर्ण स्वच्छता कार्य को समाप्त कर रही है और मशीनीकृत सफाई को बढ़ावा दे रही है। 89,000 से अधिक स्वच्छता कर्मियों का सत्यापन किया गया है, 85,000 से अधिक स्वच्छता कर्मियों को पीपीई किट उपलब्‍ध कराए गए हैं और 74,000 से अधिक आयुष्मान कार्ड जारी किए गए हैं। लगभग तीन लाख कचरा बीनने वालों की प्रोफाइल बनाई गई है। नमस्ते योजना स्वच्छता कर्मियों की सेफ्टी, गरिमा और सम्मान के प्रति हमारे दृढ़ संकल्प की परिचायक है।

हम आज जिस बदलाव का साक्षी बन रहे हैं वह न केवल प्रौद्योगिकीय है बल्कि अत्यंत मानवीय भी है। जोखिमपूर्ण प्रथाओं को मशीनीकृत समाधानों के साथ बदलकर हम श्रम की गरिमा बहाल कर रहे हैं और इस बात की उद्घोषणा कर रहे हैं कि प्रत्येक श्रमिक सुरक्षा, सम्मान और मान्यता का हकदार है। जैसा कि डॉ. अंबेडकर ने हमें याद दिलाया था, “गरिमा कोई विशेषाधिकार नहीं है, जन्मसिद्ध अधिकार है।”
नमस्ते उस आदर्श को साकार करने की दिशा में एक निर्णायक कदम है। शिक्षा सशक्तिकरण के लिए सबसे शक्तिशाली साधन बनी हुई है। जैसा कि डॉ. बी. आर. अंबेडकर ने गम्भीरतापूर्वक कहा है, “मानव जीवन का अंतिम लक्ष्य मस्तिष्क का विकास होना चाहिए।”

इस दृष्टिकोण से प्रेरित होकर हमने लाभवंचित समुदायों के लिए शैक्षिक अवसरों को बढ़ाने के लिए निरंतर काम किया है। ओबीसी छात्रों के लिए श्रेयस के तहत राष्ट्रीय फैलोशिप के लिए 640 करोड़ रु. से अधिक जारी किए गए हैं जिससे 14,000 से अधिक छात्रों का फायदा पहुंचा है। डॉ. अंबेडकर ब्याज सब्सिडी योजना ने विदेश में उच्च शिक्षा प्राप्त करने वाले 29,000 से अधिक छात्रों को सहायता पहुंचाई है।

अनुसूचित जातियों के लिए पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना ने 40,000 करोड़ रु. से अधिक की सहायता के साथ 5.65 करोड़ से अधिक छात्रों को लाभान्वित किया है। प्री-मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना ने 2.72 करोड़ से अधिक छात्रों को सहायता प्रदान की है। पीएम-यशस्वी के माध्यम से हमने देशभर में छात्रवृत्ति और छात्रावास सुविधाओं के साथ अन्‍य पिछड़े वर्गों, आर्थिक रूप से पिछड़े वर्गों और विमुक्‍त घुमंतू जनजातियों से आने वाले छात्रों की मदद की है।

हमारा ध्यान श्रेष्ठ के माध्यम से गुणवत्तापूर्ण शिक्षा में सुधार लाने पर भी रहा है, जिसके माध्‍यम से 648 करोड़ रु. से अधिक की केंद्रीय सहायता के साथ लगभग 3.48 लाख अनुसूचित जाति छात्रों की सहायता की गई है। पीएम-अजय के तहत 15,000 से अधिक गांवों को आदर्श ग्राम के रूप में विकसित किया गया है और लाखों लाभार्थियों को वित्तीय सहायता और छात्रावास की सुविधा प्राप्त हुई है। कौशल विकास सशक्तिकरण का एक और स्तंभ है। पीएम-दक्ष के तहत अनुसूचित जाति, अन्य पिछड़ा वर्ग, आर्थिक रूप से पिछड़े वर्ग और विमुक्‍त घुमंतू जनजाति और सफाई कर्मचारी समुदायों के 1.87 लाख से अधिक उम्मीदवारों को प्रशिक्षित किया गया है।

इस योजना को अब पीएमकेवीवाई के साथ मिला दिया गया है ताकि इसकी पहुंच का और विस्तार किया जा सके। नशीले पदार्थों के दुरुपयोग का निराकरण करना एक राष्ट्रीय प्राथमिकता रही है, क्योंकि नशीले पदार्थों पर निर्भरता न केवल व्यक्तिगत स्वास्थ्य, बल्कि परिवार की स्थिरता और सामाजिक सद्भाव को भी जोखिम में डालती है। नशीले पदार्थों की मांग में कमी लाने की राष्ट्रीय कार्य योजना और नशा मुक्त भारत अभियान के माध्यम से हमने जागरूकता, रोकथाम, उपचार और पुनर्वास के संयोजन से समग्र समाज को लेकर चलने का दृष्टिकोण अपनाया है।

एनएमबीए नशीले पदार्थों के दुरुपयोग के विरुद्ध दुनिया के सबसे बड़े समुदाय-संचालित आंदोलनों में से एक के रूप में स्‍थापित हुआ है जिसमें युवाओं, शैक्षणिक संस्थानों, समाज के अग्रणी लोगों और सिविल सोसायटी संगठनों को शामिल किया गया है। जैसा कि हमारे माननीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अक्सर जोर देकर कहा है, “युवा भारत के भविष्य निर्माता हैं।” उन्हें सही जागरूकता और सहायता एवं सहयोग के तंत्र के साथ सशक्त बनाकर, हम अपने देश की जनसंख्‍या से लाभ उठा सकते हैं। राष्ट्रीय हेल्पलाइन 14446 गोपनीय परामर्श और पेशेवर सहायता चाहने वाले लोगों और परिवारों के लिए जीवन रेखा के रूप में काम कर रही है।

हम अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के अधिकारों की रक्षा के प्रति कटिबद्ध हैं। अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम में संशोधनों ने कानूनी रक्षोपायों को सुदृढ़ किया है। वर्ष 2014 के बाद से 8 लाख से अधिक अत्याचार पीड़ित व्‍यक्तियों को सहायता देने और 2.57 लाख से अधिक अंतर-जातीय विवाहों के लिए प्रोत्साहन प्रदान करने के लिए 4,947 करोड़ रु. से अधिक जारी किए गए हैं। अत्याचारों के खिलाफ राष्ट्रीय हेल्पलाइन (14566) जागरूकता और समय पर सहायता सुनिश्चित करती है। अटल वयो अभ्युदय योजना के माध्यम से हमारे प्रयास वरिष्ठ नागरिकों तक पहुंचे हैं।

राष्ट्रीय वयोश्री योजना के तहत 10 लाख से अधिक वृद्धजनों को सहायता प्रदान की गई है और 7.8 लाख से अधिक लाभार्थियों को जीवन सहायक उपकरण दिए गए हुए हैं। एल्डरलाइन 14567 देश भर में भावनात्मक और कानूनी सहायता उपलब्‍ध कराता है। स्माइल योजना के माध्यम से, हम आयुष्मान भारत के तहत आश्रय गृहों, कौशल प्रशिक्षण और हैल्‍थकेयर संयोजन के साथ ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के कल्याण को बढ़ावा दे रहे हैं। राष्ट्रीय पोर्टल के माध्यम से 31,000 से अधिक ट्रांसजेंडर पहचान प्रमाण पत्र जारी किए गए हैं।

छात्रवृत्ति के माध्यम से निर्बाध शिक्षा सुनिश्चित करने के लिए पीएम केयर्स फॉर चिल्ड्रन पहल के तहत कोविड-19 महामारी से प्रभावित बच्चों का भी विशेष ध्यान रखा गया है। ये उपलब्धियां केवल आंकड़े मात्र नहीं हैं – वे बदले हुए जीवन और नई आशा को निरूपित करती हैं।
“जीवन लंबा होने के बजाय महान होना चाहिए।” – डॉ. बी. आर. अंबेडकर। उनके आदर्शों से प्रेरित होकर हम यह सुनिश्चित करने के लिए काम करना जारी रखेंगे कि प्रत्येक भारतीय नागरिक गरिमा और समता का जीवन जीए और उन्‍हें आगे बढ़ने का भरपूर अवसर मिले।

Team Desk