केरल राज्य के स्थानीय निकाय चुनावों में सत्तारूढ़ वाम मोर्चे (एलडीएफ) को जिस पराजय का मुंह देखना पड़ा है उससे प्रदेश की पी. विजयन सरकार के लिए चिन्ता पैदा हो गई है क्योंकि विधानसभा चुनाव तीन महीने बाद ही होने हैं। इन चुनावों में कांग्रेस नीत संयुक्त मोर्चे (यूडीएफ) को अच्छी सफलता प्राप्त हुई है और राज्य के अधिसंख्य नगर निगमों व नगर पालिकाओं पर उसका कब्जा हो गया है मगर प्रदेश की राजधानी तिरुवनन्तपुरम नगर निगम पर भाजपा नीत एनडीए को अच्छी सफलता मिली है जिससे शहरी क्षेत्रों में भाजपा के बढ़ते प्रभाव का अन्दाजा लगाया जा सकता है।
इस महानगर में कुल 101 पार्षद सीटें हैं जिनमें से 100 पर चुनाव हुआ था। इनमें से आधी 50 सीटें भाजपा नीत एनडीए के पास गई हैं जबकि सत्तारूढ़ एलडीएफ को 29 व विपक्षी यूडीएफ को 19 व दो सीटें अन्य के खाते में गई हैं। तिरुवनन्तपुरम लोकसभा सीट पर 2024 के चुनावों में कांग्रेस के श्री शशि थरूर बहुत कम अन्तर से ही जीते थे। मगर जिस प्रकार वह भाजपा के प्रति सह्रदयता दिखा रहे हैं उससे उनकी कांग्रेस के प्रति वफादारी संदिग्ध होती जा रही है। तिरुवनन्तपुरम जिले में ही भाजपा की स्थिति में गुणात्मक सुधार हुआ है। विशेषकर शहरी क्षेत्रों में यह पार्टी अपनी पैठ बनाती जा रही है।
इससे एलडीएफ व यूडीएफ दोनों को ही चिन्ता हो सकती है। मगर राज्य स्तर पर देखें तो यूडीएफ इन चुनावों में मजबूत बनकर उभरा है जिससे राज्य में कांग्रेस की स्थिति बेहतर हुई है। यूडीएफ ने राज्य की छह महानगर निगमों में से चार पर विजय प्राप्त की तथा 86 नगर पालिकाओं में से 54 पर कब्जा किया तथा 152 ब्लाॅक पंचायतों में से 79 पर जीत दर्ज की व 941 ग्राम पंचायतों में से 504 पर अपना अधिपत्य कायम किया। इस प्रकार कहा जा सकता है कि राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों में विपक्षी यूडीएफ की पकड़ गहरी हुई है जो सत्तारूढ़ एलडीएफ के लिए चिन्तनीय है।
सत्तारूढ़ एलडीएफ राज्य के 14 जिलों की पंचायतों में से केवल सात में ही अपनी बढ़त बना पाया जबकि पिछले एक दशक से राज्य के शहरी व ग्रामीण इलाकों पर उसका दबदबा कायम था। जिन छह महानगर निगमों में से चार पर यूडीएफ चुनाव जीता है यदि उनका विश्लेषण किया जाये तो तिरुवनन्तपुरम से लगते इलाके कोल्लम नगर निगम की 56 सीटों में से 12 पर एनडीए जीता और 27 पर यूडीएफ को विजय मिली जबकि एलडीएफ के खाते में केवल 16 सीटें ही गईं। अर्नाकुलम या कोच्चीन नगर निगम की 76 में से 46 सीटें जीत कर यूडीएफ ने रिकाॅर्ड बनाया।
यहां एनडीए को मात्र छह सीटें मिली जबकि एलडीएफ को 20 सीटें ही मिल पाईं। त्रिशूर नगर निगम की 56 सीटों में से 33 पर यूडीएफ ने विजय प्राप्त की जबकि एलडीएफ को 11 व एनडीए को 8 स्थान मिले। मगर कोझिकोड एकमात्र एेसी नगर निगम रही जिस पर एलडीएफ के सर्वाधिक पार्षद जीते। इस निगम में कुल 76 सीटें हैं जिसमें एलडीएफ के 34 पार्षद जीते व यूडीएफ के 26 तथा एनडीए के 13, इसी प्रकार कन्नूर नगर निगम की 56 सीटों में से 36 पर यूडीएफ ने अपना कब्जा जमाया जबकि एलडीएफ को 15 व एनडीए को चार सीटें मिली।
इन चुनाव परिणामों से जो संकेत मिलते हैं उनके अनुसार राज्य के शहरी इलाकों में भाजपा का प्रभाव बढ़ रहा है। तिरुवनन्तपुरम महानगर निगम पर लगभग अपना कब्जा जमाने के बाद भाजपा चाहती है कि वह इस जिले की विधानसभा सीटों पर आगामी विधानसभा चुनावों में अपने प्रत्याशी जोरदार तरीके से उतारे। भाजपा जिले की शहरी विधानसभा सीटों जैसे नेमोम, वट्टियोरकावू व कषकोट्टम से अपने उम्मीदवार उतार सकती है।
पिछले लोकसभा चुनावों में ही इस जिले की त्रिशूर सीट पर भाजपा के प्रत्याशी सुरेश गोपी जीते थे। मगर 2016 के विधानसभा चुनावों में निमोम राज्य की पहली ऐसी सीट थी जहां से भाजपा प्रत्याशी ओ. राजगोपाल पहली बार चुनाव जीते थे। केरल राज्य की राजनीति में भाजपा 1952 के बाद से ही पैर जमाने की कोशिश कर रही है मगर उसे सफलता अब जाकर मिलती दिखाई पड़ रही है। राज्य में मार्क्सवादी पार्टी 1952 से ही सबसे मजबूत पार्टी मानी जाती है मगर अब इसका प्रभाव हल्का पड़ता दिखाई पड़ रहा है। मार्क्सवादी पार्टी केरल के हिन्दुओं की पार्टी मानी जाती है मगर भाजपा का शहरी क्षेत्रों में बढ़ता प्रभाव अब दूसरी परिस्थितियों का निर्माण करता दिखाई दे रहा है।
देश में पहली वाममोर्चे या मार्क्सवादी पार्टी की ईएमएस नम्बूदिरिपाद सरकार भी 1952 में केरल में ही गठित हुई थी लेकिन अब जैसे-जैसे राज्य की राजनीति में भाजपा का ग्राफ बढ़ रहा है वैसे-वैसे ही वामपंथियों का ग्राफ नीचे आ रहा है लेकिन राज्य के ग्रामीण इलाकों में कांग्रेस व उसके सहयोगी दलों की पकड़ भी ढीली नहीं हुई है। राज्य के इसाई व मुस्लिम तथा अन्य अल्पसंख्यक यूडीएफ के समर्थक समझे जाते हैं। अतः यह कहा जा सकता है कि केरल की राजनीति बहुत उलझी हुई है और साम्प्रदायिक आधार पर इसका वर्गीकरण संभव नहीं है।




















