कुर्बानियों का इतिहास न भुलाएं : जेन जी को सीख

Summary :

यूं तो भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार, अजीत डोभाल मैन ऑफ एक्शन हैं और सात साल पाकिस्तान में बतौर जासूस इनके कारनामों से भारत को अपनी सुरक्षा के आधार पर ज़बरदस्त लाभ मिला है, जैसे सिंदूर-1 में भारतीय वायु सेना ने पाकिस्तान की नौ हवाई पट्टियों को ध्वस्त किया, मगर समय-समय पर देश हित में डोभाल जी देशवासियों से और युवा वर्ग से बात करते रहते हैं, जैसे उन्होंने हाल ही में भारत मंडपम में किया, जहां देश के हर भाग से आए युवक और युवतियों से डट कर बात की और देश सेवा व देश हित का कोई भी…

यूं तो भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार, अजीत डोभाल मैन ऑफ एक्शन हैं और सात साल पाकिस्तान में बतौर जासूस इनके कारनामों से भारत को अपनी सुरक्षा के आधार पर ज़बरदस्त लाभ मिला है, जैसे सिंदूर-1 में भारतीय वायु सेना ने पाकिस्तान की नौ हवाई पट्टियों को ध्वस्त किया, मगर समय-समय पर देश हित में डोभाल जी देशवासियों से और युवा वर्ग से बात करते रहते हैं, जैसे उन्होंने हाल ही में भारत मंडपम में किया, जहां देश के हर भाग से आए युवक और युवतियों से डट कर बात की और देश सेवा व देश हित का कोई भी मुद्दा अनछुआ नहीं रहा।
डोभाल ने याद दिलाया कि आज़ादी इतनी आसान नहीं थी क्योंकि हमारे पूर्वजों ने अत्यधिक, कठिनाइयां उपद्रव और बलिदान झेले। उन्होंने कहा, “हमारी आज़ादी की कहानी में हमारे गांवों को जलाया गया, सभ्यताओं को नष्ट किया गया और सनातन धर्म का अपमान हुआ, जिसे हमें सबक के रूप में याद रखना चाहिए।” यहां सबक़ का अभिप्राय यह नहीं कि बीते दिनों में जो जुल्म किया गया उसका बदला वर्तमान पीढ़ी से लिया जाए, बल्कि इसका अर्थ यह है कि भविष्य में हरगिज़ भी ऐसा नहीं होने दिया जाए। उनका कहना था कि इतिहास से सीखना और उसे नहीं भूलना सबसे बड़ी त्रासदी से बचने का तरीका है। युवाओं को प्रेरित करते हुए अजीत डोभाल ने कहा, “आप बहुत भाग्यवान हैं कि आप उस भारत में पैदा हुए जो स्वतंत्र है। भारत हमेशा ऐसा नहीं था जितना स्वतंत्र आपको दिखाई देता है। हमारे पूर्वजों ने इसके लिए बहुत सी कुर्बानियां दी हैं, बहुत अपमान सहन किए हैं, असहायता के दौर से गुज़रे हैं। कई लोगों को फांसी हुई है। भगत सिंह, राम प्रसाद बिस्मिल और अशफाकुल्लाह खान को फांसी के फंदे को स्वीकार करना पड़ा। सुभाष चंद्र बॉस को जीवनभर संघर्ष करना पड़ा, महात्मा गांधी को सत्याग्रह करना पड़ा, वीर सावरकर को असहनीय कष्ट सहने पड़े और अनगिनत लोगों को जान देनी पड़ी।” अपने भाषण में “बदला” शब्द का प्रयोग किया गया जिससे चिंता अवश्य होती है और इससे फसाद की बू आती है। “बदला” का अर्थ साफ करते हुए डोभाल ने कहा कि शब्द “बदला ” मूल रूप से बुरा माना जाता है, पर यह एक प्रबल प्रेरक शक्ति भी हो सकती है अगर इसे देश को हर क्षेत्र में महान बनाने की प्रेरणा के रूप में लिया जाए। न केवल सुरक्षा, बल्कि आर्थिक, सामाजिक और वैज्ञानिक क्षेत्रों में भी। डोभाल ने कहा कि भारत की ऐतिहासिक सभ्यता अत्यंत विकसित और शांतिपूर्ण थी। “हमने न मंदिर तोड़ा, न किसी की भूमि लूटी, न किसी पर आक्रमण किया और यह महानता आज भी प्रेरणा देती है।” डोभाल की इस बात में पूर्ण सच्चाई है, क्योंकि भारत ने कभी भी किसी देश के ऊपर ग़लत नज़र नहीं रखी। हां इतना अवश्य है कि भारत को जिसने टेढ़ी आंख से देखा, उसको बख्शा नहीं गया और न कभी बख्शा जाएगा। डोभाल ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत में निर्णय लेने की वह शक्ति ग्रहण की है जिसे देख विश्व भी अचंभे में है। उदाहरण के तौर पर, जब डोनाल्ड ट्रंप ने टैरिफ को लेकर मोदी को आंखें दिखाईं तो मोदी ने भी ईंट का जवाब पत्थर से दिया और ट्रंप के उस समय पसीने छूट गए, जब मोदी ने चीन और रूस का हाथ थम लिया।
रूस से तेल लेने पर भी ट्रंप को आपत्ति हुई तो पिछली सरकारों की भांति यह सरकार न तो घिघियाई और न ही घुटने टेके।
अमेरिका की घड़ी में तोला, घड़ी में माशा वाली आदत से भले ही दुनिया दबती हो, मगर भारत नहीं दबा और आगे भी कभी नहीं दबने वाला। बक़ौल अजीत डोभाल, निर्णय-लेने की क्षमता और नेतृत्व किसी भी देश की दिशा और गति क्या हो, वह उस देश उस का सुप्रीम कमांडर लेता है, जो भारत में मोदी जी हैं। डोभाल ने बताया कि किस प्रकार से कश्मीर में बड़े पैमाने पर खून-खराबा होता चला आया है और किस प्रकार से उन्होंने मोदी और अमित शाह की मदद से कश्मीर की खूबसूरत वादी से आतंकवाद तो समाप्त करा कर जैन ज़ी के हाथों से पत्थर निकलवा कर क़लम पकड़वाए। इसलिए युवाओं को निर्णय-रहित/आत्म-निर्णयात्मक सोच विकसित करनी चाहिए, ताकि वे नेतृत्व की भूमिका निभा सकें। डोभाल ने कहा कि भारत पहले से तय गति से विकसित हो रहा है और अगर वह “ऑटोपायलट” पर भी चले तो भी आगे बढ़ेगा, पर असली सवाल यह है कि आगे क्या नेतृत्व करेगा और भारत को कौन ले जाएगा नए विकसित भारत की दिशा में। युवाओं को बड़े, दूरदर्शी निर्णय लेने और देश की सेवा में लगने के लिए प्रेरित किया गया। मीडिया माध्यमों का विचार है कि जैन ज़ी के लिए इस से बेहतर प्रेरणादायक भाषण अब तक नहीं सुना गया।

Team Desk