आसमान में उड़ती ‘चांदी’

Summary :

भारत में चांदी गरीब आदमी के आभूषणों की बहुमूल्य धातु समझी जाती है परन्तु अब इसके दामों में पंख लग गये हैं और यह सामान्य नागरिक की पहुंच से भी बाहर मानी जाने लगी है। दूसरी तरफ सोने के दामों में भी पर लगे हुए हैं और इसके दाम भी हवा में गोते लगाते हुए लगातार आसमान छूते जा रहे हैं। सोना जहां डेढ़ लाख प्रति दस ग्राम के स्तर को छूने की तरफ बढ़ रहा है, वहीं चांदी भी अब ढाई लाख रुपए प्रति किलो से भी ऊपर दो लाख 65 हजार रुपये प्रति किलो की तरफ बढ़ती दिखाई…

भारत में चांदी गरीब आदमी के आभूषणों की बहुमूल्य धातु समझी जाती है परन्तु अब इसके दामों में पंख लग गये हैं और यह सामान्य नागरिक की पहुंच से भी बाहर मानी जाने लगी है। दूसरी तरफ सोने के दामों में भी पर लगे हुए हैं और इसके दाम भी हवा में गोते लगाते हुए लगातार आसमान छूते जा रहे हैं। सोना जहां डेढ़ लाख प्रति दस ग्राम के स्तर को छूने की तरफ बढ़ रहा है, वहीं चांदी भी अब ढाई लाख रुपए प्रति किलो से भी ऊपर दो लाख 65 हजार रुपये प्रति किलो की तरफ बढ़ती दिखाई दे रही है। चांदी के दामों में पिछले वर्ष 2025 के दौरान डेढ़ गुना से भी ज्यादा 160 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज हुई। बीते कल दिन ही इसके दामों में 15 हजार रुपये किलो की वृद्धि दर्ज हुई। इसकी मूल वजह यह मानी जा रही है कि जहां एक तरफ चांदी की मांग में औद्योगिक क्षेत्र से वृद्धि हो रही है वहीं इसकी सप्लाई में वृद्धि दर्ज नहीं हो रही है और साथ ही विश्व के अत्यधिक उतार-चढ़ाव भरे माहौल में यह सुरक्षित निवेश का बढ़ता हुआ साधन भी मानी जाने लगी है।
सोने के दामों में वृद्धि की वजह दूसरी है क्योंकि बदलती विश्व व्यवस्था में इसे संरक्षित निवेश का सुरक्षित साधन माना जा रहा है और अमेरिकी मुद्रा डाॅलर के अन्तर्राष्ट्रीय बाजार में ढीलेपन की वजह से स्वर्ण में निवेश अत्यधिक मोहक होता जा रहा है। इसके बावजूद भारत में सोने-चांदी की घरेलू मांग में भी कमी दर्ज नहीं हो रही है। जैसा कि सभी जानते हैं कि दीपावली पर्व के अवसर पर भारत में चांदी की मांग में जोरदार वृद्धि होती है मगर इस बार बीती दीपावली पर चांदी के दाम इतने महंगे रहे कि साधारण आदमी के भी इसका दस ग्राम का सिक्का खरीदने पर पसीने छूट गये। जहां तक सोने का प्रश्न है तो यह आम आदमी की पहुंच से बहुत बाहर हो चुका है। चांदी के दामों में तेजी की एक वजह यह भी है कि दुनिया भर के म्यूचल फंड इसके दामों में बन रही भविष्य गत तेजी को देखते हुए इसमें अपना निवेश बढ़ाने लगे हैं और दूसरी तरफ सौर ऊर्जा के क्षेत्र में जैसे-जैसे प्रगति हो रही है वैसे-वैसे ही इसकी मांग बढ़ रही है। चांदी के बढ़ते टैक्नोलॉजी क्षेत्र के उत्पादों में उपयोग से इसकी मांग लगातार बढ़ते रहने की ही उम्मीद है जिसकी वजह से सप्लाई सीमित होने पर इसके दाम दिन दूनी और रात चौगुने के हिसाब से बढ़ रहे हैं। जनवरी 2025 में चांदी के दाम 85 हजार 913 प्रति किलो थे जो दिसम्बर 2025 तक बढ़कर दो लाख 47 हजार रुपए प्रति किलोग्राम तक हो गये। इस दौरान चांदी की मांग में विश्व भर में दोगुनी के लगभग वृद्धि दर्ज हुई। चांदी की खपत में लगातार तेजी होने के कारण इस धातु की मांग अमेरिका जैसे देश में भी बढ़ी है और निवेशकों का इसके प्रति आकर्षण बढ़ा है।
अमेरिका का केन्द्रीय फेडरल बैंक जहां अपनी ब्याज दरों में लगातार कमी कर रहा है उससे इस देश के बड़े निवेशक चांदी में अपना निवेश लाभप्रद समझ रहे हैं और इस धातु की जमकर खरीदारी कर रहे हैं परन्तु यह रवायत केवल अमेरिका तक सीमित नहीं है क्योंकि विश्व के प्रतिष्ठित बैंक तक चांदी का स्टाॅक रखना सुरक्षित समझ रहे हैं जिससे मुद्रा बाजार की ऊंच-नीच का वह मुकाबला कर सकें। चांदी का सर्वाधिक उपयोग बैटरी व सोलर पैनल बनाने में होता है और भविष्य में इनसे सम्बन्धित उद्योगों का भविष्य बहुत उज्ज्वल माना जा रहा है जिसकी वजह से निवेशक चांदी में निवेश को बढ़ावा दे रहे हैं। इसके साथ ही कृत्रिम ज्ञान (आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस) उद्योग के क्षेत्र में प्रयोग होने वाली टैक्नोलॉजी में भी चांदी का प्रयोग होता है और यह उद्योग चमकता क्षेत्र (सनराइज इंडस्टीज) माना जा रहा है अतः चांदी की मांग लगातार बढ़ते रहना लाजिमी है। इस उद्योग में ट्रांसमिशन व स्मार्ट ग्रिड इन्फ्रास्ट्रक्चर बनाने के लिए चांदी का उपयोग होता है अतः इस धातु की मांग लगातार बढ़ती ही रहेगी और सप्लाई सीमित होने की वजह से इसके दाम आगे आने वाले सालों में आकर्षक ही बने रहेंगे। साथ ही पूरी दुनिया में चांदी का उपयोग आभूषण व सिक्के बनाने में भी होता है अतः इसकी पारंपरिक मांग भी बदस्तूर बनी रह सकती है। चांदी का उत्पादन अन्य खनिजों के उत्पादन के उप उत्पाद की तरह ही होता है। पिछले कई वर्षों से इसके उत्पादन में कोई वृद्धि नहीं हो रही है। इसे देखते हुए ही पिछले साल नवम्बर महीने में अमेरिका ने इस धातु को अत्यधिक संवेदनशील अलभ्य (क्रिटिकल) धातुओं की सूची में शामिल किया। मगर इससे पहले सितम्बर महीने तक ही अमेरिका में चांदी का स्टाॅक 53 करोड़ 10 लाख औंस हो गया था जो कि पिछले वर्ष की तुलना में 74 प्रतिशत अधिक था।
वर्तमान में अमेरिका में चांदी का कुल स्टाॅक 44 करोड़ 90 लाख औंस बताया जाता है जो कि पारंपरिक स्टाक से तीन गुना है। इसके विपरीत चीन ने चांदी के निर्यात पर विगत 1 जनवरी से नये प्रतिबन्ध लगा दिये हैं। अमेरिका में चांदी के भारी स्टाक की वजह से लन्दन के धातु स्टाक एक्सचेंज में चांदी की सप्लाई में कमी हो चुकी है। इसकी हाजिर डिलीवरी बहुत घट गई है और इसी बाजार से चांदी के अन्तर्राष्ट्रीय दाम तय होते हैं। अतः जैसे-जैसे चांदी की मांग बढ़ रही है और इसकी सप्लाई घट रही है वैसे-वैसे ही इसके दामों में उछाल आता जा रहा है। निकट भविष्य में यह क्रम कब तक चलेगा इसके बारे में फिलहाल बाजार विशेषज्ञ मुट्ठी नहीं खोल रहे हैं।

Aditya Chopra

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