‘चलो गफ़लतों के ही
कुछ कारोबार हो जाए
क्या पता एक दिन तुझे
मुझसे ही प्यार हो जाए’
महाराष्ट्र की राजनीति में गठबंधन साथी की बेचैनी ने कई नए पेंचोखम उलझा दिए हैं। अभी-अभी तो अजित दादा की पार्टी से भाजपा का ठीक से तालमेल बैठ ही रहा था, सुनेत्रा ताई को सियासत का नया ककहरा कंठस्थ कराने में देवेंद्र फडणवीस की महारथ परवान ही चढ़ रही थी कि एकनाथ शिंदे ने भाजपा की पेशानियाें पर नए बल ला दिए हैं। पहले भाजपा के एक बड़े नेता की ओर से शिंदे से कहा गया था कि ‘एक बार महाराष्ट्र के स्थानीय निकाय चुनाव ठीक ढंग से संपन्न हो जाएं फिर बैठ कर सारी आपसी गलतफहमियां सुलझा ली जाएंगी।’ निकाय चुनावों में भाजपा गठबंधन की बंपर जीत के बाद शिंदे ने भाजपा एक बड़े नेता से मिलने का वक्त मांगा, तो समझा जाता है कि शिंदे से कहा गया कि ‘वह अभी बहुत व्यस्त हैं, सो वे दूसरे नेता से मिलकर बात कर लें।’ सूत्रों की मानें तो भाजपा के इस बड़े नेता संग शिंदे की अब तक दो बार बात हो चुकी है, अंततः उनसे कहा गया है कि ‘एक बार उन्हें देवेंद्र फडणवीस के साथ बैठना पड़ेगा।’ सूत्रों की मानें तो शिंदे के मन में अभी भी सीएम के ढाई-ढाई साल के फार्मूले वाली बात चल रही है, पर भाजपा इसके लिए तैयार नहीं दिखती, सो उनसे कहा गया है कि ‘अगर शिंदे चाहें तो उनके सांसद पुत्र को केन्द्र सरकार में मंत्री बनाया जा सकता है,’ सनद रहे कि शिंदे के बेटे श्रीकांत एकनाथ शिंदे कल्याण से सांसद हैं। इस बीच एक घटना और घट गई जो शिंदे को बेतरह उद्वेलित कर रही है, कहते हैं संसद के इस बजट सत्र के दौरान जब बड़े नेता क्षेत्रीय सांसदों से मिल रहे थे तो इस कड़ी में वे शिवसेना शिंदे गुट के 7 सांसदों से भी बेहद गर्मजोशी से मिले और बोले- ‘मैं आप सभी को अपने परिवार की तरह ही मानता हूं, इसीलिए मेरे ऊपर भी आपका पूरा अधिकार है, आप बिना संकोच मुझसे कभी भी मिल सकते हैं।’ जाहिर है इन मुलाकाती सांसदों की सूची में शिंदे पुत्र श्रीकांत भी शामिल थे, जिन्होंने अपने पिता को इस मुलाकात के बारे में विस्तार से बताया होगा।
कैसे लाइन पर आए हिमंता?
असम भाजपा के कुछ वरिष्ठ नेतागण और कुछ पार्टी सांसद जो अपने ही मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा के रवैए से पिछले कुछ समय से नाराज़ चल रहे थे, वे समय लेकर भाजपा के एक बड़े नेता से मिलने दिल्ली पहुंचे। इस भाजपा नेताओं की आमतौर पर बस यही राय थी कि ‘सीएम अपनी बात-व्यवहार में बहुत ‘एरोगेंट’ हैं और एक ‘डिक्टेटर’ की तरह सरकार चला रहे हैं।’ इस बैठक में मौजूद भाजपा के एक पूर्व अध्यक्ष ने तो यहां तक कह दिया कि ‘हिमंता के डीएनए में भाजपा है ही नहीं, वे कांग्रेस से आए हैं और अब भी वैसी ही सोच रखते हैं।’ इस नेता की शिकायत थी कि ‘सीएम ने तो अपनी पार्टी के लोगों पर ही ‘सर्विलांस’ लगा रखी है।’ उनकी इस बात पर भाजपा के बड़े नेता भी खासे कुपित हुए, बोले- ‘भाजपा शासित राज्यों का कोई भी सीएम ऐसा नहीं है जो दावा कर सके कि पार्टी उनकी वजह से वहां जीती है, हमें जो भी वोट आते हैं वे माननीय मोदी जी की वजह से और हमारे समर्पित कार्यकर्ताओं की मेहनत की वजह से। वैसे भी इस बार हम फिर से असम में जीत रहे हैं, जीत के बाद हम आप लोगों के साथ मिलकर फैसला लेंगे कि किस नेता के हाथों राज्य की बागडोर देनी है।’ इस मीटिंग की खबर जैसे ही हिमंता बिस्वा को लगी उनका खुद के ऊपर अतिविश्वास ही डोल गया। उन्होंने अगले रोज जो प्रैस कांफ्रेंस आहूत की थी उसमें जनाब बदले-बदले से नज़र आ रहे थे, उनके रौद्र रूप की जगह उनकी विन्रम भाव-भंगिमाओं ने ले लिया था, उन्होंने उस प्रैस कांफ्रेंस में खुद को भाजपा का समर्पित कार्यकर्ता बताते हुए कहा- ‘मेरा पूरा जीवन भाजपा के लिए समर्पित है, मेरे लिए पार्टी का हर फैसला सिर आंखों पर, जब तक मेरा जीवन है मैं भाजपा व असम के लोगों की सेवा में लगाऊंगा और असम में यह चुनाव किसी एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि पूरी पार्टी का है।’ पत्रकार भी हैरान-परेशान कि आज उनका सामना किस हिमंता से हुआ है?
जब योगी से मिले सुजुकी
योगी आदित्यनाथ अपनी जापान यात्रा में वहां के कई बड़े उद्योगपतियों से मिले। पर इन तमाम बैठकों में उनके नजरिये से सबसे अहम मुलाकात रहने वाली थी सुजुकी मोटर्स के मुखिया तोशीहीरो सुजुकी से। योगी ने अपने उद्बोधन में कहा कि ‘उनकी दिली इच्छा है कि भारत में सुजुकी का सबसे बड़ा प्लांट यूपी में लगे’, योगी ने सुजुकी को संबोधित करते हुए कहा कि ‘वे गुड़गांव स्थित उनके मनेसर प्लांट से भी ज्यादा बड़ी जगह यूपी में उपलब्ध कराने को तैयार हैं।’ जब तोशीहीरो सुजुकी के बोलने की बारी आई तो वे बोलते-बोलते किंचित भावुक भी हो गए, उन्होंने कहा कि सुजुकी को भारत ले जाने का सपना उनके स्वर्गीय पिता ने देखा था, वे तब के भारत के एक युवा नेता संजय गांधी की दूरदृष्टिता के कायल थे, संजय चाहते थे कि भारत में ही एक ऐसी कार का निर्माण हो जिसे एक आम हिंदुस्तानी की जेब वहन कर सके। सही मायनों में वे जनता की कार चाहते थे, मेरे पिता ने उनकी भावनाओं को समझा और हमने भारत की ओर रुख किया। यह आज सुजुकी का सबसे सफल उपक्रम है, हमारी कंपनी को सिर्फ इस प्लांट से काफी भारी मुनाफा होता है। इस जगह को हम अपने लिए बेहद पवित्र मानते हैं और यहां से हमारा एक ‘इमोशनल कनेक्ट’ भी है।’ तब योगी के साथ गए अधिकारियों ने सुजुकी को समझाया कि ‘मुख्यमंत्री जी आपसे गुड़गांव वाला प्लांट छोड़ने की नहीं, अपितु यूपी में एक नया प्लांट लगाने की बात कर रहे हैं।’ सुजुकी मुस्कुराए, बोले-’आपके सीएम की इच्छा जरूर पूरी होगी।’
जय योगीमय हो गया सिंगापुर
इस दफे जब यूपी के लिए निवेश की चाह लिए मुख्यमंत्री योगी सिंगापुर पहुंचे तो 800-1000 लोगों की भीड़ ने योगी-योगी के नारों से सिंगापुर वालों को चौंका दिया हालांकि कुछ सूत्रों का दावा है कि योगी की यह हनक दिखाने के लिए जौनपुर-गोरखपुर के 700-800 लोगों को प्रायोजित तरीके से पहले ही सिंगापुर भेज दिया गया था। सूत्रों का दावा है कि योगी की आने वाली यात्राएं अमेरिका और कुछ यूरोपीय देशों को लेकर अभी से प्लॉन हो गई हैं। योगी मंडली का भरोसा है कि दुनिया में जहां भी हिंदुत्व में आस्था रखने वाले लोग रह रहे हैं, वे अपनी धरती पर योगी का दिल खोलकर स्वागत करेंगे।
जब विरोध मैत्री में बदल गया
सिंगापुर की धरती पर कदम रखते ही योगी को इस बात का पता चला कि वहां के विभिन्न विश्वविद्यालयों में पढ़ रहे भारतीय छात्र-छात्राओं का एक छोटा सा समूह उनके खिलाफ नारेबाजी कर सकता है। तब योगी ने बेहद चतुराई का परिचय देते हुए छात्रों के उस ग्रुप को पहले ही अपने पास मिलने के लिए बुला लिया। योगी यह समझने की कोशिश करने लगे कि आखिर छात्रों की नाराज़गी किस बात को लेकर है। तब उन छात्रों के गुट ने बताया कि ‘वे यहां यूजीसी के विरोध के लिए आए हैं।’ कुछ छात्रों के हाथों में यूजीसी विरोध की तख्तियां भी थी। तब योगी ने उन्हें समझाया कि ‘आखिरकार यूजीसी से उनका क्या लेना-देना, यह तो केंद्र का मैटर है, इस पर उनका फैसला है। मैं तो बस यूपी के लिए निवेश का आह्वान लेकर आया हूं।’ बच्चे योगी की बातों से सहमत हो गए और उन्होंने अपना विरोध-प्रदर्शन वापिस ले लिया।
क्या पीके पड़ गए हैं फीके?
बिहार चुनाव को लेकर अपनी दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट से ‘सुप्रीम फटकार’ खाने के बाद कहते हैं पीके ने अपनी जन सुराज पार्टी की कोर ग्रुप की एक अहम बैठक दिल्ली में तलब की थी, पर 25 में कोर ग्रुप के 18 सदस्यों ने बैठक में आ सकने में असमर्थता जता दी। तब ही पीके को कहीं न कहीं इस बात का गहरे इल्म हो चुका था कि ‘उनके जन सुराज का ‘कांसेप्ट’ फेल हो गया है।’ इसके बाद ही वे अपने को सियासी रूप से समीचीन बनाने के रास्ते तलाशने में जुट गए। वे चेन्नै जाकर एक्टर टर्न राजनेता विजय से मिले, पर विजय पीके का पूरा पैकेज लेने को राजी नहीं दिखे। बीएमसी चुनाव से पहले वे उद्धव ठाकरे से और हैदराबाद जाकर चंद्रशेखर राव से भी मिल आए थे, पर ये दोनों ही जगह जब उनकी बात नहीं बनी तो उन्होंने फिर अपने तार सपा मुखिया अखिलेश यादव से जोड़ने की गरज से उन्हें फोन करना शुरू कर दिया। कोई 4-5 कॉल के बाद अखिलेश लाइन पर आए और उन्होंने पीके को मिलने के लिए लखनऊ बुला लिया। जहां दोनों के बीच कोई डेढ़ घंटे की मुलाकात हुई। पीके बंगाल मॉडल के तर्ज पर ही अखिलेश को अपनी सेवाएं देने को तत्पर थे, पर अखिलेश जानते हैं कि पीके एक ऐसे डॉक्टर है, उनकी दवाईयों ने ही उन्हें बीमार कर दिया है। सूत्रों की मानें तो अखिलेश ने दो टूक पीके से कहा-‘हम आपको अपने पूरे चुनाव का काम नहीं दे सकते, न ही चुनाव इंचार्ज बना सकते हैं, आप यूपी चुनाव पर अपने ‘इनपुट’ देते रहिए, फिर हम देखेंगे कि आप हमारे लिए कितने उपयोगी साबित हो सकते हैं।’
…और अंत में
केंद्रीय मंत्री हरदीप पुरी ने जिस अंदाज में अपना प्रेस कांफ्रेंस आहूत किया फिर उसके बाद भाजपा के कुछ समर्पित चैनलों से बिंदास बातचीत की उनकी यह अदा या खता भाजपा के बड़े नेताओं को रास नहीं आई है। कहते हैं भाजपा की ओर से पुरी को कहा गया कि ‘उनके बोलने के अंदाज से ही उनका दर्द झलक रहा था और उन्होंने इस मामले को सुलझाने की जगह और भी उलझा दिया है। आखिरकार उन्हें यह कहने की क्या आवश्यकता आन पड़ी थी कि वे कुख्यात यौन अपराधी एप्स्टीन से विश्व शांित के लिए मिल रहे थे।’ उन्हें आगे मीडिया से बात नहीं करने की ताकीद भी दी गई है।
क्या शिंदे को भाजपा ने साध लिया है?
Summary :
‘चलो गफ़लतों के ही कुछ कारोबार हो जाए क्या पता एक दिन तुझे मुझसे ही प्यार हो जाए’ महाराष्ट्र की राजनीति में गठबंधन साथी की बेचैनी ने कई नए पेंचोखम उलझा दिए हैं। अभी-अभी तो अजित दादा की पार्टी से भाजपा का ठीक से तालमेल बैठ ही रहा था, सुनेत्रा ताई को सियासत का नया ककहरा कंठस्थ कराने में देवेंद्र फडणवीस की महारथ परवान ही चढ़ रही थी कि एकनाथ शिंदे ने भाजपा की पेशानियाें पर नए बल ला दिए हैं। पहले भाजपा के एक बड़े नेता की ओर से शिंदे से कहा गया था कि ‘एक बार महाराष्ट्र के…


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