भारतीय फुटबाल, क्या है हाल

Summary :

भारत में खेलों के परिदृश्य में क्रिकेट का वर्चस्व निर्विवाद रूप से सबसे ऊपर है, जिसके आगे फुटबॉल, हॉकी और अन्य खेलों की चमक फीकी पड़ती दिखाई देती है। आईपीएल जैसे आयोजनों ने क्रिकेट को मनोरंजन और व्यवसाय का एक ऐसा अद्भुत मिश्रण बना दिया है जिससे इसकी लोकप्रियता ने सभी रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। इंडियन प्रीमियर लीग भारत में क्रिकेट का सबसे बड़ा ड्राइवर है। 2026 तक, आईपीएल ने इसे एक उद्योग बना दिया है। भारत में अधिकांश विज्ञापन राजस्व और प्रायोजन क्रिकेट में ही निवेश किए जाते हैं जिससे अन्य खेलों की तुलना में क्रिकेटरों को कहीं अधिक…

भारत में खेलों के परिदृश्य में क्रिकेट का वर्चस्व निर्विवाद रूप से सबसे ऊपर है, जिसके आगे फुटबॉल, हॉकी और अन्य खेलों की चमक फीकी पड़ती दिखाई देती है। आईपीएल जैसे आयोजनों ने क्रिकेट को मनोरंजन और व्यवसाय का एक ऐसा अद्भुत मिश्रण बना दिया है जिससे इसकी लोकप्रियता ने सभी रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। इंडियन प्रीमियर लीग भारत में क्रिकेट का सबसे बड़ा ड्राइवर है। 2026 तक, आईपीएल ने इसे एक उद्योग बना दिया है। भारत में अधिकांश विज्ञापन राजस्व और प्रायोजन क्रिकेट में ही निवेश किए जाते हैं जिससे अन्य खेलों की तुलना में क्रिकेटरों को कहीं अधिक पैसा और प्रसिद्धि मिलती है। क्रिकेट की चमक-दमक से अन्य खेलों को नुक्सान हो रहा है। ऐसा ही एक खेल फुटबाल है, जो दुनिया का नंबर एक खेल है, जिसे अरबों लोग पसंद करते हैं। फुटबॉल दुनिया का सबसे लोकप्रिय और सबसे अधिक देखा जाने वाला खेल है, जिसके 5 अरब से ज्यादा प्रशंसक हैं। यूरोप, लैटिन अमेरिका, अफ्रीका और एशिया में अत्यधिक लोकप्रिय यह खेल अपनी सादगी के कारण हर वर्ग में पसंद किया जाता है। फुटबॉल जनमानस का खेल है, इसलिए इसे ‘किंग ऑफ द व्होल वर्ल्ड’ भी कहा जाता है, क्योंकि इसमें 90 मिनट में लोगों का भरपूर मनोरंजन होता है। इसका अंदाजा फीफा के 208 सदस्य देशों की संख्या को देखकर ही लगाया जा सकता है और भारत के तथाकथित लोकप्रिय खेल क्रिकेट से अगर इसकी तुलना की जाए तो फुटबॉल क्रिकेट से काफी पीछे है। फुटबॉल किसी समय भारत का सबसे लोकप्रीय खेल था। कोलकाता को पहले फुटबॉल का मक्का कहा जाता था लेकिन बाद में फुटबॉल ने केरल और गोवा और पंजाब में भी अपने पैर पसारे। कोलकाता के मशहूर क्लब ईस्ट बंगाल और मोहन बागान के अलावा बेंगलुरु एफसी, केरल ब्लास्टर्स और मुंबई सिटी एफसी और जेसीटी मिल्स फगवाड़ा ने भी इस खेल को लोकप्रिय करने में अहम भूमिका निभाई है लेकिन भारत में क्रिकेट के प्रति दीवानगी के चलते फुटबॉल की चमक फीकी पड़ती चली गई। अब स्थिती यह हो गई है कि दुनिया के सबसे ज्यादा जनसंख्या वाले देश भारत में फुटबॉल फैंस फीफा वर्ल्ड कप नहीं देख पाएंगे। 11 जून से शुरू होने वाले फीफा वर्ल्ड कप के लिए भारत में ब्रॉडकास्टर नहीं मिल पा रहे हैं। फीफा ने रिलायंस-डिज्नी के ज्वाइंट वेंचर को फुटबाल वर्ल्ड कप 2026 के ब्रॉडकास्ट राइट्स बेचने से इंकार कर दिया है। रिलायंस-डिज्नी ज्वाइंट वेंचर के साथ सोनी ने भी ब्रॉडकास्ट राइट्स के लिए बातचीत की, लेकिन भारत के लिए महंगे ब्रॉडकास्ट राइट्स को देखते हुए किसी ब्रॉडकास्टिंग कंपनी ने प्रसारण अधिकार नहीं खरीदे।
देखा जाए तो भारत के खेल इतिहास में फुटबॉल का एक अनूठा स्थान है। ब्रिटिश औपनिवेशिक काल में शुरू हुआ यह खेल धीरे-धीरे भारतीयों के बीच लोकप्रिय हुआ और एक राष्ट्रीय जुनून बन गया। भारत में फुटबॉल सिर्फ एक खेल नहीं है। यह दृढ़ता, कौशल और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने की इच्छा का प्रतीक है। भारतीय फुटबॉल के इतिहास को समझना इस बात को समझने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है कि इस खेल का विकास कैसे हुआ है और इसने घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर कौन-कौन सी उपलब्धियां हासिल की हैं।
कोलकाता में शुरुआती फुटबॉल क्लबों के गठन से लेकर ओलंपिक खेलों में भारत की भागीदारी और फीफा विश्व कप के लिए क्वालीफाई करने तक, भारतीय फुटबॉल ने एक लंबा सफर तय किया है। भारतीय फुटबॉल के जनक माने जाने वाले नागेंद्र प्रसाद सर्वाधिकारी ने इस खेल को लोकप्रिय बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने प्रशिक्षण सत्रों का आयोजन किया, युवाओं को खेलने के लिए प्रोत्साहित किया और यहां तक ​​कि फुटबॉल उपकरण भी उपलब्ध कराए जिससे भारतीय खिलाड़ी प्रतिस्पर्धी स्तर पर भाग ले सकें। उनके प्रयासों ने भारत में फुटबॉल के सुनियोजित विकास की नींव रखी। 1947 में भारत की स्वतंत्रता के बाद राष्ट्रीय फुटबॉल टीम ने 1948 के लंदन ओलंपिक में फ्रांस के खिलाफ अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पदार्पण किया। 2-1 से हारने के बावजूद, भारतीय टीम ने अपने कौशल, तकनीक और खेल भावना से वैश्विक दर्शकों को प्रभावित किया। नंगे पैर खेलते हुए, टीम ने असाधारण गेंद नियंत्रण और रणनीतिक समझ का प्रदर्शन किया जिससे दुनिया भर के फुटबॉल प्रेमियों ने उनकी प्रशंसा की। यह मैच विश्व कप की आकांक्षाओं के संदर्भ में भारतीय फुटबॉल के इतिहास में एक प्रतीकात्मक क्षण बन गया। भारत ने लगातार चार ओलंपिक खेलों (1948, 1952, 1956, 1960) में भाग लिया।
1956 के मेलबर्न ओलंपिक विशेष रूप से उल्लेखनीय थे, जिसमें भारत सेमीफाइनल तक पहुंचा और चौथे स्थान पर रहा। यह उपलब्धि अंतर्राष्ट्रीय फुटबॉल में भारत की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक है जो वैश्विक मंच पर भारतीय खिलाड़ियों की क्षमता को उजागर करती है। भारत फीफा विश्व कप 2026 के लिए क्वालीफाई नहीं कर पाया। एएफसी क्वालीफायर के दूसरे दौर में भारत अपने ग्रुप में तीसरे स्थान पर रहा जो अगले चरण में पहुंचने के लिए पर्याप्त नहीं था। इसके प्रमुख कारणों में एशियाई देशों से कड़ी प्रतिस्पर्धा, उच्च स्तरीय अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर लगातार अनुभव की कमी और खिलाड़ी विकास एवं बुनियादी ढांचे में और सुधार की आवश्यकता शामिल है।
भारत में फुटबॉल को लोकप्रिय बनाने और इसे जमीनी स्तर से शीर्ष स्तर तक ले जाने के लिए अखिल भारतीय फुटबॉल महासंघ और सरकार को मिलकर संरचनात्मक बदलाव करने की आवश्यकता है। प्रत्येक जिले में एक गुणवत्तापूर्ण फुटबॉल अकादमी स्थापित कर बच्चों को कम उम्र से ही फुटबॉल से जोड़कर अंडर-13, अंडर-15, और अंडर-18 स्तर की नियमित प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएं। फीफा और अन्य अंतर्राष्ट्रीय फुटबॉल संघों के साथ मिलकर बेहतर प्रशिक्षण पद्धतियां अपनाई जानी चाहिए। निजी कंपनियों को फुटबॉल अकादमियों और लीगों को प्रायोजित करने के लिए प्रोत्साहित कर और राष्ट्रीय टीम के मैचों का व्यापक टीवी और डिजिटल ब्रॉडकास्ट करने जैसे उपाय फुटबॉल को लोप्रियता दिलाने में सहायक होगी।

Aakash Chopra