बड़े पैमाने पर अवसंरचना का विकास

Summary :

जीडीपी को बढ़ावा देने, रोजगार के अवसरों का सृजन करने और अर्थव्यवस्था पर गुणक प्रभाव डालने में अवसंरचना पर व्यय के विशिष्ट महत्व को पहचानते हुए केंद्र सरकार ने पिछले एक दशक में बुनियादी ढांचे से संबंधित पूंजीगत व्यय में उल्लेखनीय वृद्धि की है। यह व्यय वर्ष 2014-15 में लगभग 2 ट्रिलियन रुपये से पांच गुना से भी अधिक बढ़कर वर्ष 2024-25 में 11.1 ट्रिलियन रुपये हो गया। हाल के रुझान इंगित करते हैं कि बुनियादी ढांचे से संबंधित पूंजीगत व्यय में 38 प्रतिशत से अधिक की वार्षिक दर से वृद्धि हो रही है, जिसमें भौतिक और डिजिटल दोनों प्रकार…

जीडीपी को बढ़ावा देने, रोजगार के अवसरों का सृजन करने और अर्थव्यवस्था पर गुणक प्रभाव डालने में अवसंरचना पर व्यय के विशिष्ट महत्व को पहचानते हुए केंद्र सरकार ने पिछले एक दशक में बुनियादी ढांचे से संबंधित पूंजीगत व्यय में उल्लेखनीय वृद्धि की है। यह व्यय वर्ष 2014-15 में लगभग 2 ट्रिलियन रुपये से पांच गुना से भी अधिक बढ़कर वर्ष 2024-25 में 11.1 ट्रिलियन रुपये हो गया। हाल के रुझान इंगित करते हैं कि बुनियादी ढांचे से संबंधित पूंजीगत व्यय में 38 प्रतिशत से अधिक की वार्षिक दर से वृद्धि हो रही है, जिसमें भौतिक और डिजिटल दोनों प्रकार के ढांचागत नेटवर्क के विकास पर स्पष्ट रूप से ध्यान केंद्रित किया गया है।

बड़े पैमाने पर किए गए इन आवंटनों का पूरा लाभ प्राप्त करने के लिए यह आवश्यक है कि बुनियादी ढांचे से संबंधित परियोजनाएं समयबद्ध रूप से और कुशल गति से आगे बढ़ें तथा उनमें समय और लागत की अधिकता न हो। निर्माण की लंबी अवधि के कारण ऐसी परियोजनाओं के लिए न केवल पर्याप्त और निरंतर वित्तपोषण की आवश्यकता होती है, बल्कि भूमि अधिग्रहण, पर्यावरणीय स्वीकृतियों तथा सामाजिक-आर्थिक पहलुओं से संबंधित अनुमतियों के समय पर मिलने पर भी निर्भर रहना पड़ता है। इन स्वीकृतियों में अनेक नियामक प्राधिकरणों, स्थानीय निकायों और जिला-स्तरीय प्रशासन की भागीदारी होती है, जिससे परियोजना के सफल क्रियान्वयन के लिए तालमेल और समय पर निर्णय लेना महत्वपूर्ण हो जाता है।

ढांचागत परियोजनाओं के लिए प्रभावी समन्वय और समय पर स्वीकृतियां मिलना सुनिश्चित करने के उद्देश्य से भारत सरकार ने वर्ष 2015 में प्रगति (प्रो-एक्टिव गवर्नेंस एंड टाइमली इम्प्लीमेंटेशन) पोर्टल की शुरुआत की। प्रगति एक डिजिटल प्लेटफॉर्म है, जो बड़े पैमाने की ढांचागत परियोजनाओं की वास्तविक समय में निगरानी करता है तथा कार्यान्वयन एजेंसियों, मंत्रालयों, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से अद्यतन जानकारी प्राप्त करता है। प्रधानमंत्री हर महीने उच्च-स्तरीय समन्वय बैठकों की अध्यक्षता करते हैं, जिनमें कार्यान्वयन में विलंब का सामना कर रही परियोजनाओं का चयन किया जाता है, मंत्रालयों, राज्यों और अन्य संबंधित प्राधिकरणों के साथ सीधे संवाद कर बाधाओं की पहचान की जाती है तथा उनके समाधान के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए जाते हैं।

इस प्रकार, प्रगति पोर्टल एक ऐसे तंत्र के रूप में कार्य करता है, जो समय और लागत में वृद्धि का सामना कर रही लंबित परियोजनाओं को गति प्रदान करता है- प्रगति तंत्र के माध्यम से अब तक कुल 85 ट्रिलियन रुपये मूल्य की अटकी हुई परियोजनाओं को शीघ्रता से आगे बढ़ाने में सहायता मिली है। प्रगति के अनुभव से प्राप्त जानकारी-विशेष रूप से ऐसी बाधाएं जो बार-बार उत्पन्न होती हैं और परियोजनाओं की पूर्णता में देरी और अक्सर लागत में वृद्धि का कारण बनती हैं-को ध्यान में रखते हुए, भारत सरकार ने अक्टूबर 2021 में पीएम गति शक्ति (पीएमजीएस) राष्ट्रीय मास्टर प्लान (एनएमपी) की शुरुआत की। पीएमजीएस एक जीआईएस-आधारित ढांचा प्रदान करती है, जिससे देश में बुनियादी ढांचे से संबंधित कनेक्टिविटी की वैज्ञानिक एवं समन्वित योजना संभव हो पाती है।

डेटा की सहज दृश्यता उपलब्ध कराकर योजना निर्माण में समन्वित दृष्टिकोण को सक्षम बनाते हुए पीएमजीएस योजना चरण में ही आवश्यक स्वीकृतियों की शीघ्र पहचान की सुविधा प्रदान करती है। इससे बुनियादी ढांचे से संबंधित परियोजनाओं की सहयोगपूर्ण योजना संभव होती है और उन महीनों की बचत होती है जो अन्यथा अनुमोदन प्राप्त करने में व्यर्थ हो जाते। यह परिवर्तनकारी योजना दृष्टिकोण न केवल गति और दक्षता को बढ़ाता है, बल्कि मौजूदा अवसंरचना परिसंपत्तियों की अनावश्यक पुनरावृत्ति को भी रोकता है तथा परिवहन के विभिन्न माध्यमों के बीच परिसंपत्तियों की परस्पर पूरकता सुनिश्चित करता है। फलस्वरूप, अवसंरचना योजना न केवल अधिक कुशल बनती है, बल्कि लॉजिस्टिक्स प्रदर्शन को सुदृढ़ करने वाले परिणाम भी प्रदान करती है-जो जीवन की सुगमता और व्यापार करने की सुगमता दोनों को समर्थन देती है।

इस प्रकार, योजना से जुड़ी एजेंसियां प्रगति के सिद्धांतों के अनुरूप पीएमजीएस तंत्र का उपयोग परियोजना की योजना और क्रियान्वयन में अधिक दक्षता और गति लाने के लिए कर रही हैं। जीआईएस-पोर्टल के माध्यम से इन मार्गों पर जाम की स्थिति की पहचान की गई और ऊर्जा सामग्री के निर्बाध परिवहन के लिए मार्ग को मजबूत करने की योजना बनाई गई। गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान ने लद्दाख और हरियाणा के बीच हरित ऊर्जा गलियारे की योजना बनाने में भी मदद की। चाहे यह हजारों करोड़ रुपये के निवेश वाली बड़ी एक्सप्रेस-वे परियोजनाएं हों, वाराणसी और कानपुर जैसे प्रमुख शहरों में शहरी लॉजिस्टिक्स पहल हों, या प्रमुख बंदरगाहों और उनके अंतर्गत क्षेत्रों के बीच कनेक्टिविटी सुधारना हो-गति शक्ति के सिद्धांत परियोजना के योजना चरण में ‘संपूर्ण सरकार’ दृष्टिकोण को बढ़ावा दे रहे हैं।

ढांचागत परियोजनाओं की समन्वित समीक्षा, निगरानी और उनमें तेजी लाने में प्रगतितंत्र की सफलता के आधार पर और पीएम गति शक्ति द्वारा अवसंरचना कार्यान्वयन में अधिक समेकित और योजनाबद्ध दृष्टिकोण प्रदर्शित किए जाने के साथ ही भारत अब अपनी आर्थिक कूटनीति के तहत वैश्विक स्तर पर अपनी सीख को साझा करने के लिए अच्छी स्थिति में है। जो अधिक कुशल और समन्वित ढांचागत योजना का मॉडल प्रस्तुत करता है, जो डेटा-आधारित, समन्वित है और जिसकी बदौलत उसका समय पर क्रियान्वयन सुनिश्चित होता है।
[लेखिका भारत सरकार में केंद्रीय श्रम सचिव और विशेष सचिव (लॉजिस्टिक्स)पद पर रही हैं]

Team Desk