जी हां, 70वां जन्मदिन तो सभी धूमधाम से मनाते हैं, परन्तु कई लोग ऐसे होते हैं जो अपना जन्म दिवस मनाते-मनाते सबकी प्रेरणा बन जाते हैं। ऐसे ही मंजू जी का जन्मदिन सबके लिए प्रेरणा था। सबसे पहले तो उनके बच्चे सब बच्चों के लिए प्रेरणा बने, जो एक महीना पहले शुरू हो गए कि 5 फरवरी को ‘सेव’ कर लो हमारी प्यारी मम्मी जी का 70वां जन्मदिन है। कमाल के बहू-बेटा हैं। उन्होंने लिस्ट बनाई जो उनकी मां को चाहने वाले सगे-संबंधी और मित्र थे, जिन्हें देखकर उनकी मां खुश हो जाती, उसका इतने प्यार से अपनों के लिए प्रेम करना। मैं मानव और शिल्पा की कायल हो गई और इतनी व्यवस्थाओं के बीच उस तारीख को सिर्फ उनके लिए रख लिया। यह मैं आज के दिन इस कालम में लिख रही हूं क्योंकि मुझे मालूम है आज मेरे आर्टिकल को बहुत से माता-पिता, बहू-बेटे और बेटियां पढ़ते हैं, तो हर बेटे-बहू को ऐसे ही अपने माता की खुशियों को देखना चाहिए। न बड़ी पार्टी करें, सिर्फ उनके साथ केक काट लें, अच्छा समय बिता लें तो इससे बड़ी बात नहीं हो सकती।
मंजू जी के तीनों बच्चों ने मिलकर उनके लिए तैयारी की बेटी प्रियंका और दामाद अमित और छोटा बेटा मानस और बहू चारू। सबसे पहले तो मंजू जी की ड्रेस देखकर मुझे आनंद आ गया। क्या सज रही थीं। अपने प्रिय पति नरेश जी के साथ बच्चों ने उनके जीवन पर एक बहुत ही अलग तरीके की अद्भुत छोटी फिल्म उन पर बनाई हुई थी, जिसे देखकर मंजू जी के पूरे जीवन की कहानी समझ आ गई। उसे देखकर समझ आया कि जो मंजू जी अपनी हंसी, मुस्कुराहट से सबको खुश रखती हैं वो अपने पूरे खानदान को खुशियों से खुश रखती हैं। उनकी 7 ननदें और एक देवरानी हैं जिनके लिए मंजू जी छोटी मां से बढ़कर हैं इन सबकी जिन्दगी मंजू जी के बगैर अधूरी है। सबसे ज्यादा आनंद आया जब नरेश जी अपनी पत्नी के बारे में बोले। उन्होंने कहा कि आज केवल जन्मदिन नहीं आज उस जीवन का उत्सव है, जिन्होंने बिना शोर किये दिलों को छुआ है। मौन, शक्ति, सादगी, विनम्रता से भरी मेरी पत्नी मंजू जो हर समय एक जैसी रहीं, कम बोलना अधिक सुनना और मेरे लिए हर समय में एक जैसी रहीं।
सच्ची संगनी, खुशी, हंसी में अशांत जीवन में कठिन समय में सशक्त रहीं। चुनौती, हंसी और प्रार्थना में मेरे साथ रहीं। वो आज भी सिखाती है सुन्दरता में सादगी है, शक्ति, धैर्य में महानता नि:स्वार्थ कार्य करने हैं। आज हर तरफ कृपा है, उसका श्रेय मैं अपनी पत्नी मंजू को देता हूं। वाह! एक पति अपनी 70 साल की पत्नी के जन्मदिन पर ऐसी उसकी प्रशंसा करे और क्या हो सकता है। सच में मंजू भाभी ऐसी ही हैं। कोई त्यौहार हो, कोई अच्छा अवसर हो, वो मुझे भी ऐसे ही याद रखती हैं जैसे अपनी बेटी और ननदों को। उसमें उनका प्यार, स्टाइल, अपनापन, ममता छुपी होती है। मेरे बच्चे देखते ही पहचान जाते हैं कि यह तो मंजू आंटी ने ही भेजा होगा।
वाकय में वो एक भारतीय संस्कारी आदर्श नारी है, जिन्होंने अपने बहुत बड़े परिवार को जोड़कर रखा, हर मुश्किल में हर किसी का साथ दिया। आज उन्हीं की वजह से उनका परिवार बुलंदियों को छू रहा है। सच में उन्हें देखकर मुझे अपनी मां और सासू मां की याद आ गई, जो बिल्कुल ऐसी ही थीं। एक महिला परिवार की धूरी होती है। एक मां, बहन, भाभी, सासू मां, दादी मां के रूप में जो परिवार को शक्तिशाली बनाती है।
सच में उनके परिवार से मिलकर बहुत खुशी हो रही थी। उनके बेटे-बहुएं, बेटी-दामाद एक-एक व्यक्ति को पूछ रहे थे और उनके पोते-पोती आधिआंश, अन्नया, आध्या, मीराया, अविराज सभी वहां महक रहे थे। वहां एक खुशी भरी बगिया की खुशबू आ रही थी। मुझे भी वहां कुछ बोलने का अवसर मिला तो मंजू जी की तरफ देखकर यही कहा कि आप जैसी कोई सबकी जिन्दगी में आए तो बात बन जाए और नरेश जैसे पति हमारी आने वाली बच्चियों को, बेटियों को मिले, जिन्होंने सही मायने में अपनी पत्नी को समझा, उसे इज्जत दी, परिवार और समाज में तो दी लेकिन अपने दिल में सबसे ज्यादा दी। मुझे मेरी एकल की सखी सोनल बता रही थीं कि उनका दिन मंजू जी से शुरू होता है और मंजू जी से ही खत्म होता है और यह भी बताया कि कैसे उनकी बहुएं-बेटे मॉडर्न होने के साथ-साथ संस्कारी भी हैं।
मेरी सबसे बड़ी बहू भी मेरे साथ गई थी, क्योंकि दूसरी दोनों बहुओं के बच्चे अभी बहुत छोटे हैं, साल से भी छोटे तो उनको उन्हीं के साथ रहना था। वापिसी रास्ते में मुझे मेरी बहू सोनम कह रही थी मां जब आप 70 साल की होंगी तो हम भी ऐसे ही आपका जन्मदिन मनाएंगे, आप मना मत करना। क्योंकि अश्विनी जी के बाद अपना जन्मदिन मनाना मुझे बड़ा बेमानी लगता है, तो मैंने उसे हंसकर कहा नहीं बेटा मैं जब 70 साल की होऊंगी तो मैं क्यों बताऊं की मैं 70 की हो गई (मैंने हंसकर टालने की कोशिश की) इसलिए नहीं परन्तु उसने तो जिद्द ठान ली है कि हम सब तो ऐसा ही करेंगी और सोनम की बात तो छोटी बहुएं सना, राधिका भी नहीं टालतीं। तीनों तो मिल गईं मैं सोच रही थी कि वहां मंजू जी आप सबकी प्रेरणा बन गई। यहां तक की मेरे बच्चों की भी।
मंजू जी के जन्मदिन से मिली प्रेरणा
Summary :
जी हां, 70वां जन्मदिन तो सभी धूमधाम से मनाते हैं, परन्तु कई लोग ऐसे होते हैं जो अपना जन्म दिवस मनाते-मनाते सबकी प्रेरणा बन जाते हैं। ऐसे ही मंजू जी का जन्मदिन सबके लिए प्रेरणा था। सबसे पहले तो उनके बच्चे सब बच्चों के लिए प्रेरणा बने, जो एक महीना पहले शुरू हो गए कि 5 फरवरी को ‘सेव’ कर लो हमारी प्यारी मम्मी जी का 70वां जन्मदिन है। कमाल के बहू-बेटा हैं। उन्होंने लिस्ट बनाई जो उनकी मां को चाहने वाले सगे-संबंधी और मित्र थे, जिन्हें देखकर उनकी मां खुश हो जाती, उसका इतने प्यार से अपनों के लिए…


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