खड़गे के ‘दर्द’ का इलाज !

Summary :

देश के प्रख्यात दलित कांग्रेस नेता व राज्यसभा में विपक्ष के प्रमुख श्री मल्लिकार्जुन खड़गे के उत्तराखंड के हल्द्वानी शहर के रामलीला मैदान में विगत 8 अगस्त को एक महत्ती जनसभा को सम्बोधन करने के दो दिन बाद 10 अगस्त को सभा स्थल का शुद्धिकरण करने के मामले में पुलिस रिपोर्ट अब जाकर 8 सितम्बर को दर्ज की गई है। यह पुलिस रिपोर्ट हल्द्वानी की ही एक वकील व सामाजिक कार्यकर्ता सुश्री अंजू की तहरीर पर दर्ज की गई है जिसमें शुद्धिकरण करने वाले लोगों पर सामाजिक छुआछूत फैलाने का आरोप लगाया गया है। हालांकि इस बारे में कांग्रेस पार्टी…

देश के प्रख्यात दलित कांग्रेस नेता व राज्यसभा में विपक्ष के प्रमुख श्री मल्लिकार्जुन खड़गे के उत्तराखंड के हल्द्वानी शहर के रामलीला मैदान में विगत 8 अगस्त को एक महत्ती जनसभा को सम्बोधन करने के दो दिन बाद 10 अगस्त को सभा स्थल का शुद्धिकरण करने के मामले में पुलिस रिपोर्ट अब जाकर 8 सितम्बर को दर्ज की गई है। यह पुलिस रिपोर्ट हल्द्वानी की ही एक वकील व सामाजिक कार्यकर्ता सुश्री अंजू की तहरीर पर दर्ज की गई है जिसमें शुद्धिकरण करने वाले लोगों पर सामाजिक छुआछूत फैलाने का आरोप लगाया गया है। हालांकि इस बारे में कांग्रेस पार्टी की ओर से घटना के बाद से ही राज्य सरकार द्वारा संज्ञान लेने की मांग की जा रही थी। स्वयं श्री खड़गे ने भी अपनी दलित जाति की वजह से उनके साथ की गई इस अमानवीय कार्रवाई का बयान राज्यसभा में विगत 13 अगस्त को दिया था। यह संसद के सावन सत्र का अन्तिम दिन था। श्री खड़गे ने राज्यसभा में अपना दर्द व्यक्त करते हुए बयान दिया था कि उनके हल्द्वानी के रामलीला मैदान में जनसभा को सम्बोधित करने की वजह से दो दिन बाद वहां हिन्दू रीति से हवन आदि का आयोजन करके उस स्थान का शुद्धिकरण किया गया जो कि देश के संविधान का खुला अपमान था और समाज में छुआछूत फैलाने वाला था।
इस सिलसिले में उन्होंने भाजपा व राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ का नाम लिया था। जिसका प्रत्युत्तर देते हुए राज्यसभा में सदन के नेता व स्वास्थ्य मन्त्री श्री जगत प्रसाद नड्डा ने दो टूक शब्दों में कहा था कि उनकी पार्टी भाजपा छुआछूत में लेश मात्र भी विश्वास नहीं करती है और एेसी घटनाओं में उनकी पार्टी की कोई भूमिका नहीं हो सकती। अतः इस घटना की जांच कराई जायेगी और जो भी दोषी पाये जायेंगे उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई करके यथा-योग्य सजा दी जायेगी। जब राज्यसभा में यह मामला आया था तो सभापति डाॅ. सी.पी. राधाकृष्ण ने भी श्री खड़गे द्वारा उठाये जाने वाले इस मसले को अत्यन्त महत्वपूर्ण बताते हुए अपनी चिन्ता जाहिर की थी परन्तु इस घटना के बीत जाने के काफी दिनों बाद भी जब उत्तराखंड की भाजपा सरकार द्वारा कोई कार्रवाई नहीं की गई तो श्री खड़गे ने इस बाबत श्री नड्डा को एक पत्र लिखा और पूछा कि शुद्धिकरण घटना का क्या हुआ? मगर इससे पूर्व उन्होंने अपनी पार्टी कांग्रेस की कार्यसमिति में भी यह मुद्दा उठाया और पार्टी के नेताओं की इस सन्दर्भ में दिखाई गई बेरुखी पर नाराजगी प्रकट की और कहा कि अक्सर मीडिया की सुर्खियां बटाेरने वाले कांग्रेस नेताओं के समूह ने इस मुद्दे पर अपनी जुबान बन्द रखी। इसके बाद कांग्रेस नेता श्री राहुल गांधी ने दिल्ली में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को सम्बोधित करते हुए पूछा कि संविधान के घनघोर निरादर के बावजूद उत्तराखंड सरकार ने इस मामले में अभी तक रिपोर्ट दर्ज क्यों नहीं की ? मगर इसी बीच भाजपा के एक क्षेत्रीय नेता ने शुद्धिकरण का समर्थन करते हुए बयान दे दिया कि श्री खड़गे की जनसभा में भद्दे व गन्दे नारे लगे थे जिसकी वजह से सभा स्थल को पवित्र किया गया। इस नेता के बयान का संज्ञान कांग्रेस पार्टी के महासचिव श्री के.सी. वेणुगोपाल ने लिया और रिपोर्ट तुरन्त दर्ज कराये जाने की मांग की। बाद में राहुल गांधी ने भी इस भाजपा नेता के बयान का अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में जिक्र किया और कहा कि यह केवल श्री खड़गे का ही अपमान नहीं है बल्कि देश के समस्त दलित जाति के लोगों का घोर अपमान है और उनके खिलाफ घृणा फैलाने का अभियान है जिसकी संविधान के तहत कोई जगह नहीं है परन्तु प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद श्री राहुल गांधी के खिलाफ ही अनुसूचित जाति-जनजाति कानून के तहत एक व्यक्ति अमित कुमार द्वारा यह कहते हुए हल्द्वानी पुलिस में रिपोर्ट दर्ज करा दी गई कि वह जाति का बाल्मीकि है और वह स्वयं हवन में शामिल था। शुरू में उसका नाम अमित बाल्मीकि बताया गया। उसने उल्टे श्री राहुल गांधी पर ही भेदभाव व सामाजिक छुआछूत फैलाने का आरोप लगा दिया परन्तु अब बताया जा रहा है कि वह व्यक्ति मूल रूप से अमित कुमार है।
सवाल उठना लाजिमी है कि जब देश के उच्च सदन राज्यसभा में सरकार द्वारा उपराष्ट्रपति की चिन्ताओं के बीच शुद्धिकरण मसले पर समुचित कार्रवाई करने का ठोस आश्वासन सदन के नेता द्वारा दे दिया गया था तो कार्रवाई करने में इतना वक्त क्यों लगा, क्योंकि श्री खड़गे केवल एक दलित नागरिक ही नहीं हैं बल्कि वह लोकसभा में भी विपक्ष के नेता रह चुके हैं और पिछले लगभग 50 वर्षों से सार्वजनिक जीवन में हैं और राज्य की कर्नाटक सरकार में दशकों तक मन्त्री रहने के बाद केन्द्र में रेलमन्त्री तक रह चुके हैं। उनका जीवन संघर्षों की एक एेसी कहानी है जो नई पीढि़यों के लिए सबक बन सकती है। क्योंकि उनका लालन-पालन एक दलित मजदूर पिता ने किया और वह युवावस्था में राजनीति में देश सेवा की खातिर आये। यह संयोग कहा जायेगा कि वह कांग्रेस पार्टी में हैं क्योंकि उन जैसे नेता भाजपा समेत देश के अन्य राजनीतिक दलों में भी रहे हैं। हालांकि 84 वर्षीय श्री खड़गे की पीढ़ी के अन्य दलों के नेता अब बहुत ही कम बचे हैं। मगर इससे भी बड़ा और महत्वपूर्ण सवाल यह है कि आजादी के 80 वर्ष बाद भी हमने तरक्की का यह कौन सा पायदान चढ़ा है कि समाज में आज भी जाति के आधार पर ऊंच-नीच, पवित्र और अपवित्र का भाव विद्यमान है। कोई भी देश तभी तरक्की कर सकता है जब उसका समाज वैज्ञानिक सोच के आधार पर अपनी कुरीतियों से निजात पाता है। आजाद भारत को संविधान देने वाले डाॅ. अम्बेडकर और अस्पृश्यता को मानव समाज का घृणित अपराध बताने वाले महात्मा गांधी के प्रति हमारी सच्ची श्रद्धांजलि यही होगी जब हम जन्मगत जाति संरचना के दुष्चक्र को तोड़ कर भारत में मानव की गरिमा को प्रतिष्ठापित करेंगे। विशेषकर हिन्दू समाज से इस कुरीति को दूर करना राजनीतिज्ञों का ही धर्म होना चाहिए।

Aditya Chopra

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