लियोनेल आंद्रेस मेसी केवल एक फुटबॉलर नहीं, बल्कि आधुनिक फुटबॉल का प्रतीक हैं। उनकी कहानी संघर्ष, प्रतिभा, अनुशासन, विनम्रता और निरंतरता की मिसाल है। अर्जेंटीना के रोसारियो शहर की तंग गलियों से निकलकर दुनिया के सबसे महान फुटबॉलरों में गिने जाने तक का उनका सफर असाधारण है। फीफा वर्ल्ड कप 2026 में ऑस्ट्रिया के खिलाफ़ दो गोल दागकर लियोनेल मेस्सी ने पुरुषों के वर्ल्ड कप इतिहास में सर्वाधिक 18 गोल का नया रिकॉर्ड बनाया, जिसने क्लोज़ को पीछे छोड़ दिया। इस ऐतिहासिक उपलब्धि के बावजूद मेसी ने रिकॉर्ड्स पर ध्यान केंद्रित करने के बजाय वर्तमान पल का आनंद लेने और अपनी टीम की आगे की यात्रा पर ज़ोर दिया है।
मेसी ने दो गोल किए और अपने 39वें जन्मदिन (24 जून) से पहले पुरुषों के वर्ल्ड कप के इतिहास में सबसे ज़्यादा गोल करने वाले खिलाड़ी बनकर इतिहास रच दिया। ऑस्ट्रिया के ख़िलाफ़ अपनी टीम की शानदार 2-0 की जीत में उन्होंने क्लोज़े को पीछे छोड़ दिया। मेसी पुरुषों के फीफा वर्ल्ड कप के इतिहास में टूर्नामेंट के तीन अलग-अलग संस्करणों (2014, 2022 और 2026) में चार या उससे ज़्यादा गोल करने वाले सिर्फ़ दूसरे खिलाड़ी बन गए हैं। यह कारनामा करने वाले एकमात्र दूसरे खिलाड़ी क्लोज़ हैं। दुनिया के सबसे महान खिलाड़ियों में गिने जाने वाले मेस्सी के कैरियर का सफर मुश्किलों भरा रहा है। 13 वर्ष की उम्र में मेसी अपने परिवार के साथ स्पेन चले गए।
बार्सिलोना की लाॅ मासिया अकादमी में उन्होंने प्रशिक्षण शुरू किया। नई भाषा, नई संस्कृति और घर से दूर रहना आसान नहीं था, लेकिन मेसी ने मैदान पर अपने खेल से सबका दिल जीत लिया। बार्सिलोना ने उनके इलाज का पूरा खर्च उठाया और उन्हें युवा टीमों में शामिल किया। उनकी तेजी, तकनीक और गोल स्कोरिंग क्षमता ने उन्हें जल्दी ही अलग पहचान दिला दी। पेशेवर करियर की शुरुआत: मेसी ने 2004 में 17 वर्ष की उम्र में बार्सिलोना की सीनियर टीम के लिए पदार्पण किया। जल्द ही वे टीम के अहम खिलाड़ी बन गए। 2005-06 सीज़न में उन्होंने अपने पहले ला लीगा गोल किए और टीम के साथ ट्रॉफी जीती। उनकी जोड़ी रोनाल्डिन्हो के साथ शानदार रही।
पेप गार्डियोला युग और स्वर्णिम दौर: 2008 में पेप गार्डियोला के कोच बनने के बाद मेसी का करियर नई ऊंचाइयों पर पहुंचा। ‘फॉल्स नाइन’ की भूमिका में उन्होंने फुटबॉल की परिभाषा बदल दी। 2009 में बार्सिलोना ने ऐतिहासिक ‘सेक्सटुपल’ (छह खिताब) जीते। मेसी ने लगातार गोलों और असिस्ट्स से रिकॉर्ड तोड़े। 2012 में उन्होंने एक कैलेंडर वर्ष में 91 गोल कर इतिहास रच दिया। व्यक्तिगत रिकॉर्ड और बैलन डी’ओर: मेसी ने अपने करियर में कई रिकॉर्ड बनाए। उन्होंने कई बार बैलन डी’ओर जीता और दुनिया के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी बने। लियोनेल मेस्सी और नैपकिन का संबंध उनके फुटबॉल करियर के सबसे ऐतिहासिक और प्रसिद्ध किस्सों में से एक है।
14 दिसंबर 2000 को, बार्सिलोना के तत्कालीन स्पोर्ट्स डायरेक्टर कार्ल्स रेक्साच ने सिर्फ 13 साल के मेसी के साथ एफसी बार्सिलोना के लिए एक अनौपचारिक अनुबंध (कॉन्ट्रैक्ट) एक सामान्य पेपर नैपकिन पर ही लिखकर किया था। जब मेसी के पिता और एजेंट स्पेनिश क्लब बार्सिलोना के अधिकारियों से कॉन्ट्रैक्ट को लेकर बातचीत कर रहे थे तो अधिकारी कोई ठोस निर्णय नहीं ले रहे थे। इससे निराश होकर मेस्सी के पिता उन्हें वापस अर्जेंटीना ले जाने वाले थे। स्थिति को संभालते हुए बार्सिलोना के डायरेक्टर कार्ल्स रेक्साच ने मेसी के टैलेंट पर भरोसा जताया और उन्हें तुरंत साइन करने का फैसला किया। उस समय पास में कोई आधिकारिक कॉन्ट्रैक्ट पेपर उपलब्ध नहीं था, इसलिए उन्होंने एक रेस्टोरेंट के नैपकिन पर ही नीली स्याही से करार लिख दिया।
उस नैपकिन पर कार्ल्स रेक्साच, एजेंट होरासियो गैगिओली और जोसेफ मिंगुएला ने हस्ताक्षर किए थे। इस छोटे से वादे और नैपकिन के जरिए मेसी बार्सिलोना से जुड़े। इसके कुछ दिन बाद एक औपचारिक कॉन्ट्रैक्ट भी साइन किया गया, इसके बाद मेसी ने क्लब के लिए कई रिकॉर्ड तोड़े। फुटबॉल के इतिहास का रुख बदलने वाले इस नैपकिन को साल 2024 में लंदन की नीलामी संस्था बोनहैम्स द्वारा नीलाम किया गया। इस नैपकिन को लगभग 762,400 पाउंड (यानी करीब 8 करोड़ रुपये से अधिक) की भारी कीमत पर एक अज्ञात खरीदार द्वारा खरीदा गया। इसके अलावा, मेसी से जुड़े नैपकिन का एक और किस्सा भी काफी चर्चा में रहा था।
साल 2021 में, जब मेसी ने एफसी बार्सिलोना छोड़ने की घोषणा करते हुए अपनी विदाई प्रेस कॉन्फ्रेंस में आंसू पोंछे थे तो उनके द्वारा इस्तेमाल किए गए टिशू पेपर (नैपकिन) की भी ऑनलाइन नीलामी में 10 लाख डॉलर (करीब 8 करोड़ रुपये) तक की कीमत लगाई गई थी
फोर्ब्स के मुताबिक लियोनेल मेसी की कुल नेट वर्थ 1.1 बिलियन यूएस डॉलर है। जबकि उनकी सैलरी की बात करें तो 140 मिलियन यूएस डॉलर है। मेसी कभी नहीं भूले कि मदद की ज़रूरत कैसी होती है। 2007 में उन्होंने लियो मेस्सी फाउंडेशन की स्थापना की, जिसका उद्देश्य मुश्किल समय से गुज़र रहे बच्चों, विशेषकर कैंसर से जूझ रहे बच्चों की मदद करना था। उनका लक्ष्य अपनी प्रसिद्धि का उपयोग ज़रूरतमंदों को प्रेरित करने और उनकी सहायता करने के लिए करना था।
फाउंडेशन की सबसे महत्वपूर्ण परियोजनाओं में से एक बार्सिलोना में स्थित एसजेडी पीडियाट्रिक कैंसर सेंटर के साथ उसका सहयोग रहा है। मेसी के फाउंडेशन ने स्टावरोस नियार्चोस फाउंडेशन के साथ मिलकर सेंटर के निर्माण के लिए आवश्यक 30 मिलियन यूरो की धनराशि को पूरा करने के लिए 2.6 मिलियन यूरो का दान दिया। यह सुविधा यूरोप का सबसे बड़ा बाल चिकित्सा कैंसर केंद्र बनने जा रही है, जो प्रतिवर्ष 400 रोगियों का इलाज करने में सक्षम होगा। यह पहल गंभीर स्वास्थ्य चुनौतियों का सामना कर रहे बच्चों और परिवारों की सहायता के प्रति मेसी की प्रतिबद्धता को दर्शाती है। लियोनेल मेस्सी की विरासत आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेगी। वे साबित करते हैं कि प्रतिभा के साथ संघर्ष, विनम्रता और मेहनत हो तो असंभव भी संभव हो जाता है।


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