नैन्सी ग्रेवाल की हत्या कट्टरपंथियों की कायराना हरकत

Summary :

कनाडा में रहने वाली भारतीय मूल की सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर नैन्सी ग्रेवाल जो कि पिछले लम्बे समय से खालिस्तानियों के खिलाफ बिना किसी खौफ के खुलकर बोला करती थी उसकी बेरहमी के साथ हत्या कर दी गई। सूत्र बताते हैं कि उसके पेट में 20 से अधिक बार चाकू से वार किए गए, उसकी जीभ काटी गई जिससे उसकी आंतड़ियां तक बाहर आ गई। उसकी मौत के बाद जिस प्रकार से सोशल मीडीया पर प्रतिक्रियाएं आ रही हैं जिसमें मौत के लिए जिम्मेवार उसके मित्र को ठहराया जा रहा है और कुछ लोग डेरा राधा स्वामी के किसी अनुयाई के…

कनाडा में रहने वाली भारतीय मूल की सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर नैन्सी ग्रेवाल जो कि पिछले लम्बे समय से खालिस्तानियों के खिलाफ बिना किसी खौफ के खुलकर बोला करती थी उसकी बेरहमी के साथ हत्या कर दी गई। सूत्र बताते हैं कि उसके पेट में 20 से अधिक बार चाकू से वार किए गए, उसकी जीभ काटी गई जिससे उसकी आंतड़ियां तक बाहर आ गई। उसकी मौत के बाद जिस प्रकार से सोशल मीडीया पर प्रतिक्रियाएं आ रही हैं जिसमें मौत के लिए जिम्मेवार उसके मित्र को ठहराया जा रहा है और कुछ लोग डेरा राधा स्वामी के किसी अनुयाई के द्वारा इस घटना को अन्जाम देने की बात कर रहे हैं, क्योंकि नैन्सी ने अपनी आखिरी वी​डियो में डेरा राधा स्वामी मुखी गुरिन्दर सिंह ढिल्लो के बारे काफी आपत्तिजनक भाषा का प्रयोग किया था।

नैन्सी को डेरा मुखी का विक्रम सिंह मजीठिया से जाकर मिलना बिल्कुल भी पसंद नहीं आया था, उनका मानना था कि डेरा मुखी जिसे लाखों करोड़ों लोग अपना भगवान मानते हैं वह अगर किसी ऐसे व्यक्ति से जिस पर आपराधिक मामला दर्ज हो उसे जेल में मिले यह उनके अनुयाईयों के मन को ठेस पहुंचाता है। एक ओर संसार अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस मनाकर महिलाओं के सम्मान की बात कर रहा है और दूसरी ओर एक महिला जो अपने विचारों से देश के दुश्मनों के खिलाफ लोगों में जागरूकता लाने का प्रयास करती थी उसकी निर्मम हत्या ने ना सिर्फ भारतीय समुदाय को बल्कि पूरे लोकतांत्रिक विश्व को झकझोर दिया है।

नैन्सी की मां ने हत्या के लिए खालिस्तानियों को ही जिम्मेवार ठहराया है, उन्होंने साफ कहा कि उनकी बेटी को अनेकों बार खालिस्तानी धमकियां देते आ रहे थे जिसके चलते उन्होंने अपनी बेटी से ऐसा ना करने के लिए कहा था मगर वह बेखौफ होकर अपनी आवाज करोड़ों देशवासियो तक पहुंचाती रही और उन्हें पूरी उम्मीद है कि उनकी बेटी भले ही आज इस दुनिया में ना हो, पर आने वाले समय में नैन्सी जैसी और कई बेटियां निकलकर आएंगी। वैसे नैन्सी की मां बेटी की मौत से काफी डरी हुई है, ऐसा लगता है जैसे वो कातिलों के बारे में जान चुकी है, पर खौफ से नाम उजागर नहीं कर रही।

नैन्सी के समर्थन में बोलने वालों को भी धमकियां मिल रही हैं जिससे उनकी मां को लगता है कही उसे भी मौत के घाट न उतार दें। वहीं दूसरी ओर गुरपतवंत सिंह पन्नू ने बेशर्मी की सारी हदें पार करते हुए नैन्सी की हत्या के लिए भारतीय हुकूमत और एजेंसियों को जिम्मेवार ठहराया जा रहा है। ऐसी घटनाओं का उद्देश्य अक्सर केवल एक व्यक्ति को नुक्सान पहुंचाना नहीं होता, बल्कि एक व्यापक संदेश देना भी होता है कि जो भी अलगाववादियों के खिलाफ आवाज उठाएगा, उसका यही अंजाम होगा। यह भय पैदा करने की रणनीति होती है जिससे समाज में आत्म-संयम और चुप्पी का माहौल बन जाए लेकिन इतिहास गवाह है कि विचारों को हिंसा से कभी नहीं दबाया जा सकता।

इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण जिम्मेदारी कानून प्रवर्तन एजेंसियों की है। नैन्सी ग्रेवाल की हत्या एक गहरी पीड़ा और चिंता का विषय है। यदि यह घटना विचारों की असहिष्णुता और कट्टरपंथ से जुड़ी है तो यह स्पष्ट रूप से उस मानसिकता की कायरता को दर्शाती है जो बहस और लोकतांत्रिक संवाद से डरती है। गुरु नानक पब्लिक स्कूल की छात्रा बनी अमरीकी राष्ट्रति की दुभाषिया : पश्चिमी दिल्ली के गुरु नानक पब्लिक स्कूल की छात्रा गुरदीप कौर चावला ने अमरीकी राष्ट्रपतियों के साथ दुभाषिये के तौर पर काम करते हुए जहां समूचे सिख कौम और भारत देश के गौरव को बढ़ाया वहीं गुरु नानक पब्लिक स्कूल का नाम भी संसार भर में रोशन किया है।

उन्हें इस बात का गर्व है कि उन्होंने अपनी स्कूली शिक्षा गुरु नानक पब्लिक स्कूल से हासिल की। वह उन क्षणों को और अपने टीचर्स, मैनेजमेंट को सदा याद रखती हैं जिनके कारण वह आज इस मुकाम तक पहुंच सकी है। स्कूली शिक्षा के बाद वह पहली बार अपने स्कूल लौटीं थी। आपको बता दें कि मौजूदा समय में वह कनाडा के प्राइम मिनिस्टर मार्क कार्नी के इंडिया आए डेलिगेशन का हिस्सा हैं। स्कूल के संरक्षक सरदार हरमनजीत सिंह, चेयरमैन बलदीप सिंह राजा, मैनेजर जगजीत सिंह, स्कूल की प्रिंसिपल मनप्रीत कौर ने उनका शानदार स्वागत किया और बच्चों को उनसे प्रेरणा लेने की सलाह दी।

गुरदीप कौर चावला ने साबित कर दिया कि स्कूल में अध्यापक सभी बच्चों को एक जैसी शिक्षा देते हैं और उनमें से कुछ बच्चे गभीरतापूर्वक पढ़ाई करते हुए उच्च मुकाम हासिल करने में सफलता हासिल करते हैं। गुरदीप कौर चावला ने दावा किया कि अमृत छकने के बाद उनका जीवन पूरी तरह से बदल गया। संयुक्त राष्ट्र संघ से लेकर दुनिया भर के नेताओं की कूटनीतिक बातचीतों के दौरान उनकी आवाज़ बनना और सही भाषाई मतलब निकालना बहुत मुश्किल लेकिन लाजवाब काम है जो गुरदीप कौर के द्वारा बाखूबी निभाया जा रहा है।

गृह मंत्रालय ने सिख भावनाओं को समझा : सिख कौम के लिए जो कार्य मौजूदा केन्द्र की सरकार कर रही है शायद आज तक किसी सरकार ने नहीं किया क्योंकि देश के प्रधानमंत्री, गृहमंत्री से लेकर समूचा मंत्रिमण्डल सिख गुरुओं की कुर्बानियों से भलिभान्ति वाकिफ है। इसी के चलते एक-एक करके सिखों की मांगों को पूरा किया जा रहा है। पड़ौसी मुल्क पाकिस्तान के साथ हालांकि भारत के रिश्ते ज्यादा अच्छे नहीं, बावजूद इसके सिख श्रद्धालुओं के जत्थे को पाकिस्तान स्थित गुरधामों के दर्शनों की मंजूरी गृह मंत्रालय द्वारा दिया जाना इसका पुख्ता सबूत है।

मगर पाकिस्तान अपनी ओझी हरकतों से बाज आने वाला नहीं है, उसके द्वारा जानबूझ कर भारत से अलग हटकर पाकिस्तान में प्रवेश की तिथि दी जाती है। इस बार भी भारत के द्वारा 12 अप्रैल तय की गई मगर पाकिस्तान ने 10 तारीख का ऐलान कर दिया जो कि निन्दनीए हैं। दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबन्धक कमेटी के सलाहकार और विदेश नीतियों के माहिर परमजीत सिंह चंडोक की पाकिस्तान सरकार से ऐसी दुविधाओं को दूर करने की अपील भी की गई है।

वहीं भारत सरकार के द्वारा भी इस बार श्रद्धालुओं को वीजा देने से पूर्व गंभीरता से जांच की गई है क्योंकि पिछली बार जत्थे में से एक सिख महिला गायब हो गई थी जिसके बाद में पाकिस्तानी से निकाह की बात सामने आई थी। सरकार के साथ- साथ शिरोम​णि कमेटी, दिल्ली गुरुद्वारा कमेटी सहित उन सभी संस्थानों की भी अहम जिम्मेवारी बनती है कि जिन श्रद्धालुओं को ले जाया जाए उन पर पूरी निगरानी रखी जाए, ताकि इस तरह की घटनाएं पुनः पेश ना आएं।

Team Desk