देश में पाखंड की बाबागिरी के कारनामे अक्सर सुनाई देते हैं। भारत की धर्मपर्याण जनता बाबाओं को भगवान का रूप मानकर उन्हें पूजती है। ऐसे कई पाखंडी बाबाओं के राज सामने आ चुके हैं जो भक्ति आैर आस्था के नाम पर काली करतूतों को अंजाम देते हैं। अब सवाल उठता है कि भारतीय अपने अंधविश्वास में ऐसे कितने बाबाओं को जन्म देंगे। राम-रहीम, आसाराम बापू, रामपाल, स्वामी नित्यानंद, स्वामी चेतन्यानंद सरस्वती उर्फ पार्थ सारथी जैसे अनेक नाम पहले ही कुख्यात हो चुके हैं। बलात्कार और हत्याओं के आरोपों में कुछ जेल की सजा भुगत रहे हैं। स्वामी नित्यानंद ने तो देश से फरार होकर कैलासा नाम का अपना देश बनाने का दावा किया और उसकी अपनी करंसी भी छाप दी। कहा जाता है कि नित्यानंद के पास हजारों करोड़ की दौलत है। हैरानी तब होती है जब लोकतंत्र की जड़ों में भी तंत्र-मंत्र जुड़ा हुआ है। देश के चोटी के राजनीतिज्ञ तांत्रिक साधना के लिए ऐसे बाबाओं के यहां शीश नवाते हैं और उनकी मदद लेते हैं। पाखंड से पाखंडी बाबाओं की राजनीति पहुंच भी बहुत ऊंची होती है।
इसी शृंखला में महाराष्ट्र की राजनीति और समाज में इन दिनों एक नाम बहुत चर्चा में है। जिसे लोग कैप्टन अशोक खरात के नाम से भी जानते हैं। एक समय वह खुद को लोगों का भविष्य बताने वाला “गॉडमैन” कहता था, लेकिन आज वह गंभीर आरोपों के चलते पुलिस हिरासत में है।
पुलिस जांच में अशोक खरात से जुड़े लगभग 58 आपत्तिजनक वीडियो सामने आए हैं। इन वीडियो के सामने आने के बाद पूरे राज्य में हड़कंप मच गया। इन वीडियो में महिलाओं के साथ गलत हरकतें दिखाई गई हैं। कई बड़े नेताओं और सेलिब्रिटीज के साथ उसकी तस्वीरें भी वायरल हुईं। बताया जाता है कि वह नेताओं का हाथ देखकर भविष्य बताने का दावा करता था। उसकी तस्वीरें एकनाथ शिंदे और राधाकृष्ण विखे पाटिल जैसे नेताओं के साथ भी सामने आईं। इस मामले में रूपाली चाकणकर का नाम भी चर्चा में आया। उनकी कुछ तस्वीरें खरात के साथ वायरल हुईं। कहीं वह उसके लिए छाता पकड़े दिखीं, तो कहीं पूजा करती नजर आईं। सोशल मीडिया पर अफवाह फैली कि वह खून से जुड़े तंत्र-मंत्र करता था (हालांकि इसकी पुष्टि नहीं हुई) रूपाली चाकणकर ने सफाई दी कि उनका संबंध केवल सामाजिक कामों तक सीमित था और उन्हें इन आरोपों की जानकारी नहीं थी। इस पूरे मामले के बाद महाराष्ट्र की राजनीति गरमा गई है। अशोक खरात का नाम अब घर-घर पहुंच गया है। क्योंकि खरात बाबा जैसे लोगों की एक लंबी सूची है, जिन्हें ‘महात्मा’ के रूप में एक दिन पेश करना पड़ेगा। नासिक जिले के खरात बाबा के चरणों में महाराष्ट्र की राजनीति के और मंत्रिमंडल के कई रसूखदार लोग बैठते थे। खरात से भविष्य पूछते थे। पूजा-अर्चना, विधि करवाकर खुद के लिए संरक्षण कवच बनवाते थे। वही खरात यह सब करते हुए अनगिनत महिलाओं का शोषण करता था। बलात्कार करता था। उसने करोड़ों की संपत्ति इस पाखंड से जमा की। राज्य प्रशासन के कई आईएएस और आईपीएस अधिकारी उसके भक्त और बिजनेस पार्टनर थे। जो पकड़े जाते हैं, वे भोंदू, लेकिन जो अनगिनत खरात अब तक पकड़े नहीं गए, उनका क्या?
अशोक खरात खुद को “कैप्टन” इसलिए कहता था क्योंकि उसका दावा था कि उसने 22 साल तक मर्चेंट नेवी में काम किया। उसने कहा कि वह 150 से ज्यादा देशों में घूम चुका है। कई भाषाओं का जानकार होने का दावा किया। कुछ साल गायब रहने के बाद वह “ज्योतिषी और तांत्रिक” बनकर वापस आया। उसने नासिक के मिरगांव इलाके में एक आश्रम और ट्रस्ट बनाया, जहां वह पूजा-पाठ और समाधान के नाम पर लोगों को बुलाता था। जांच में सामने आया कि वह लोगों को ठगने के लिए अलग-अलग तरीके अपनाता था। नकली (रिमोट वाले) सांप दिखाकर चमत्कार बताना। इमली के बीज को “चमत्कारी रत्न” कहकर महंगे दामों में बेचना। लोगों की आर्थिक स्थिति देखकर पैसे मांगता। बताया जा रहा है कि उसके पास करोड़ों की संपत्ति मिली है और कई संदिग्ध चीजें भी बरामद हुई हैं। अशोक खरात का साम्राज्य करीब 100 करोड़ रुपये का बताया जाता है। ये प्रति विजिट लाखों की फीस वसूलता था और अमीर क्लाइंट्स के लिए घर या ऑफिस में प्राइवेट रूप से सलाह देता था। खरात महिलाओं को व्यक्तिगत समस्याओं जैसे विवाह, करियर, स्वास्थ्य समस्या का हल बताने के लिए बुलाता था। पूजा-पाठ के बहाने वह उन्हें नशीला पदार्थ पिलाता था, हिप्नोटाइज करता और यौन शोषण करता था । महिलाओं से कहता अगर इसके बारे में किसी से बताओगी तो तुम्हारे पति की मौत हो जाएगी। अशोक सीसीटीवी कैमरों से वीडियो रिकॉर्ड करता और ब्लैकमेल करता था। हरियाणा-पंजाब में राम रहीम जैसे बाबा और महाराष्ट्र में
खरात बाबा, किसी समय में आसाराम बापू भी भाजपा के हिंदुत्वरक्षक, प्रचारक थे। समाज में धर्मांधता बढ़ाना, लव जिहाद, मंदिर-मस्जिद जैसे मुद्दे उठाना और हिंदुत्व खतरे में होने की ‘बांग’ मारना यही उनका धंधा है। आज के दौर में सच्चे संत का मिलना बहुत मुश्किल है। इस देश में बड़े-बड़े परम सिद्ध संत देखे हैं। रामायण में दोहा है कि ‘‘जापर कृपा राम की होई, तापर कृपया करे सब कोई।’’ सिद्ध संत भी ईश्वरीय आदेशों से ही मानव कल्याण करते हैं और वह अपनी साधना में लीन रहते हैं। देशवासियों को चाहिए कि आज के दौर के पाखंडी बाबाओं का पीछा छोड़ स्वयं जन-जन के कल्याण के लिए आगे आएं और समाज को अंधविश्वास से दूर करें।
पाखंड की बाबागिरी
Summary :
देश में पाखंड की बाबागिरी के कारनामे अक्सर सुनाई देते हैं। भारत की धर्मपर्याण जनता बाबाओं को भगवान का रूप मानकर उन्हें पूजती है। ऐसे कई पाखंडी बाबाओं के राज सामने आ चुके हैं जो भक्ति आैर आस्था के नाम पर काली करतूतों को अंजाम देते हैं। अब सवाल उठता है कि भारतीय अपने अंधविश्वास में ऐसे कितने बाबाओं को जन्म देंगे। राम-रहीम, आसाराम बापू, रामपाल, स्वामी नित्यानंद, स्वामी चेतन्यानंद सरस्वती उर्फ पार्थ सारथी जैसे अनेक नाम पहले ही कुख्यात हो चुके हैं। बलात्कार और हत्याओं के आरोपों में कुछ जेल की सजा भुगत रहे हैं। स्वामी नित्यानंद ने तो देश…


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