पेपर लीक, सही कौन : मंत्री या एनटीए के डीजी?

Summary :

क्या आपको अभिषेक सिंह याद हैं? इंडिया एआई मिशन के पूर्व सीईओ, जिनका इस साल फरवरी में नई दिल्ली में हुए हाई-प्रोफाइल इंडिया एआई इंपैक्ट समिट के दौरान कई विवादों के चलते तबादला कर दिया गया था। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) के डीजी के तौर पर अपनी नई भूमिका में सिंह एक और विवाद में फंस गए हैं। उन्होंने अपने बॉस, केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की बात को काटते हुए कहा कि नीट-यूजी 2026 परीक्षा का पेपर “सिस्टम के ज़रिए” लीक नहीं हुआ था। कुछ ही दिन पहले, प्रधान ने माना था कि यह लीक ‘कमांड चेन में सेंध’…

क्या आपको अभिषेक सिंह याद हैं? इंडिया एआई मिशन के पूर्व सीईओ, जिनका इस साल फरवरी में नई दिल्ली में हुए हाई-प्रोफाइल इंडिया एआई इंपैक्ट समिट के दौरान कई विवादों के चलते तबादला कर दिया गया था। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) के डीजी के तौर पर अपनी नई भूमिका में सिंह एक और विवाद में फंस गए हैं। उन्होंने अपने बॉस, केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की बात को काटते हुए कहा कि नीट-यूजी 2026 परीक्षा का पेपर “सिस्टम के ज़रिए” लीक नहीं हुआ था। कुछ ही दिन पहले, प्रधान ने माना था कि यह लीक ‘कमांड चेन में सेंध’ लगने की वजह से हुआ था और सरकार इसकी ज़िम्मेदारी ले रही है।

सिंह कहते हैं, नहीं, ‘सिस्टम’ दोषी नहीं है। उनका यह बचाव तब आया है, जब सीबीआई की जांच चल रही है और इस लीक के मामले में अब तक कम से कम नौ लोगों कोफ़्ता गिरफ्तार किया गया है। एआई समिट का आयोजन करने वाले इंडिया एआई मिशन के प्रमुख के तौर पर सिंह का अपना रिकॉर्ड भी सवालों के घेरे में है। यह समिट एक चीनी-निर्मित रोबो-डॉग को लेकर हुए विवादों से घिरा रहा; नोएडा स्थित एक निजी यूनिवर्सिटी ने इस रोबो-डॉग को अपना खुद का आविष्कार बताकर पेश करने की कोशिश की थी। इसके अलावा, इंटरनेट कनेक्टिविटी में भी कई तकनीकी दिक्कतें आईं और स्टॉल मालिकों ने उपकरणों की चोरी के आरोप भी लगाए।

समिट खत्म होने के तुरंत बाद, सिंह को चुपचाप इंडिया एआई मिशन से हटाकर एनटीए भेज दिया गया। जहां एक तरफ, लीक हुए नीट-यूजी 2026 परीक्षा के रद्द होने से लाखों छात्रों का भविष्य दांव पर लगा हुआ है और वे परेशान हैं, वहीं क्या सिस्टम में मौजूद कोई व्यक्ति इस

घोटाले के पीछे की सच्चाई को स्वीकार करेगा?
केरल में देश का पहला एआई मंत्रालय बनाया

केरल की नई कांग्रेस सरकार ने सबसे पहले पहल करते हुए देश का पहला आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) मंत्रालय बनाया है। राज्य के मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन ने आईयूएमएल के वरिष्ठ नेता पी.के. कुन्हालीकुट्टी को इस मंत्रालय का प्रभारी मंत्री नियुक्त किया है।
तमिलनाडु से मिली रिपोर्टों के अनुसार, मुख्यमंत्री सी.जे. विजय भी अपने राज्य में इसी तरह का एक मंत्रालय बनाने पर विचार कर रहे हैं। उन्होंने अपने चुनाव प्रचार के दौरान इस बात का संकेत दिया था और एआई को शासन-प्रशासन की व्यवस्था में शामिल करने का वादा किया था।

केरल में एआई मंत्रालय के कामकाज का विस्तृत ब्योरा अभी तैयार किया जा रहा है। हालांकि, यह विचार राजनीतिक गलियारों में, खासकर दक्षिण के उन राज्यों में, जो तकनीकी रूप से ज़्यादा उन्नत हैं, काफी चर्चा का विषय बना हुआ है। इन राज्यों के कई मंत्री अपने कामकाज को आसान बनाने के लिए पहले से ही एआई का इस्तेमाल कर रहे हैं। इसके अलावा, सरकारें शिक्षा, स्वास्थ्य और सार्वजनिक सेवा विभागों

जैसे क्षेत्रों में एआई का इस्तेमाल तेज़ी से बढ़ा रही हैं।
सोशल मीडिया की लत अब एक बीमारी बन गई

सोशल मीडिया की लत अब एक ऐसी बीमारी बन गई है कि दिल्ली पुलिस ने हाल ही में अपने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे इंस्ट्राग्राम और फेसबुक जैसे प्लेटफ़ॉर्म पर अपनी मौजूदगी कम करें, और खास तौर पर इस बात का ध्यान रखें कि वे अपनी वर्दी पहनकर ‘रील्स’ पोस्ट न करें। हालांकि पुलिस अधिकारियों द्वारा सोशल मीडिया के इस्तेमाल को लेकर पहले से ही दिशा-निर्देश मौजूद हैं, लेकिन यह पाया गया कि दिल्ली पुलिस के जवान नियमित रूप से अपनी वर्दी पहनकर ही जीवनशैली, फ़िटनेस, खान-पान (डाइट) आदि से जुड़े वीडियो क्लिप पोस्ट कर रहे थे।

यह भी पता चला कि कई अधिकारियों ने पुलिस थाने के परिसर के अंदर से ही ऑनलाइन वीडियो पोस्ट किए थे। इन वीडियो में उन्हें हथकड़ी लगे आरोपियों के साथ गलियारों में चलते हुए या उन्हें हवालात (होल्डिंग सेल) में बंद करते हुए दिखाया गया था। हालांकि जीवनशैली और खान-पान से जुड़े वीडियो देखने में भले ही हानिरहित लगते हों, लेकिन दिल्ली पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों का मानना ​​है कि वर्दी पहनकर ऐसे वीडियो बनाने से उन्हें एक तरह की ‘गलत-फ़हमी वाली आधिकारिक मान्यता’ मिल जाती है। भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन पार्टी के लिए ‘भाग्यशाली बनकर उभरे क्या भाजपा के नवनियुक्त अध्यक्ष नितिन नवीन पार्टी के लिए एक ‘भाग्यशाली प्रतीक’ बनकर उभरे हैं? खैर, यह उन्हीं के नेतृत्व में संभव हुआ कि पार्टी ने पूर्वी भारत में अपनी आखिरी बड़ी चुनौती—पश्चिम बंगाल—को भी शानदार जीत के साथ आखिरकार फतह कर लिया।

बेशक, इस जीत की पटकथा मुख्य रूप से केंद्रीय गृह मंत्री और पार्टी के मुख्य चुनावी रणनीतिकार अमित शाह ने ही लिखी थी, लेकिन नवीन को इस जीत का ‘भाग्यशाली कारक’ माना जा रहा है। परिणामों वाले दिन की शाम को भाजपा के राष्ट्रीय मुख्यालय में जो असाधारण दृश्य देखने को मिला, उससे यह बात और भी स्पष्ट हो गई। जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जीत के जश्न वाली रैली में शामिल होने के लिए पहुंचे, तो नवीन ने उनका स्वागत किया और पश्चिम बंगाल, असम तथा पुडुचेरी में मिली जीत के लिए उन्हें बधाई देते हुए उनके गले में माला पहनाने की कोशिश की। लेकिन मोदी ने माला स्वीकार करने से इनकार करके नवीन और पार्टी के बाकी सदस्यों को चौंका दिया।

इसके बजाय, उन्होंने वही माला पार्टी अध्यक्ष (नवीन) के गले में डाल दी। उन्होंने नवीन की पीठ भी थपथपाई। मुख्यालय में मौजूद लोगों ने इसे स्वयं बॉस की ओर से एक संकेत माना कि नवीन सचमुच अपनी जगह बना चुका है और उसने संगठन की पदानुक्रम में अपने लिए एक विशेष स्थान हासिल कर लिया है।

R R Jairath