प्रदूषण : रेखा सरकार की ईवी नीति

Summary :

देश की राजधानी दिल्ली में वायु प्रदूषण की समस्या काफी विकट रूप ले चुकी है। राजधानी की भाैगाेलिक स्थिति और अलग-अलग जलवायु परिस्थितियां इस समस्या को और बढ़ा देती हैं। हालांकि प्रदूषण के लिए अनुचित तरीके से की गई मानव गतिविधियां भी जिम्मेदार हैं। हर साल सर्दियों के शुरू होते ही दिल्ली एक घने धुएं और धुंध की चादर में लिपट जाती है और वायु गुणवत्ता खतरनाक स्तर पर पहुंच जाती है। इस बार तो गर्मियों में भी वायु गुणवत्ता का स्तर कई बार खतरनाक स्तर पर देखा गया। दिल्ली वाले लगभग पूरे साल ही प्रदूषित और अस्वस्थ हवा में सांस…

देश की राजधानी दिल्ली में वायु प्रदूषण की समस्या काफी विकट रूप ले चुकी है। राजधानी की भाैगाेलिक स्थिति और अलग-अलग जलवायु परिस्थितियां इस समस्या को और बढ़ा देती हैं। हालांकि प्रदूषण के लिए अनुचित तरीके से की गई मानव गतिविधियां भी जिम्मेदार हैं। हर साल सर्दियों के शुरू होते ही दिल्ली एक घने धुएं और धुंध की चादर में लिपट जाती है और वायु गुणवत्ता खतरनाक स्तर पर पहुंच जाती है। इस बार तो गर्मियों में भी वायु गुणवत्ता का स्तर कई बार खतरनाक स्तर पर देखा गया। दिल्ली वाले लगभग पूरे साल ही प्रदूषित और अस्वस्थ हवा में सांस लेते हैं। एक सर्वेक्षण में पाया गया है कि पिछले 11 वर्षों में दिल्ली में प्रदूषण के स्तर को पार करने वाले दिनों की संख्या बढ़ रही है।
प्रदूषण के स्रोतों आैर विभिन्न वजहों के योगदान को समझने के लिए कई अध्ययन किए गए हैं। परिवहन उद्योग, पावर प्लांट, सड़क की धूल और निर्माण यह पांच प्रमुख कारण हैं जो दिल्ली के प्रदूषण में सबसे बड़ा योगदान देते हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा दिल्ली को दुनिया के सबसे प्रदूषित शहर पहचाने जाने के बाद ही दिल्ली की खराब वायु गुणवत्ता के मुद्दे पर ध्यान देना शुरू किया गया। हालांकि प्रदूषण कम करने के लिए कई उपाय किए गए लेकिन प्रदूषण पर नियंत्रण नहीं पाया जा सका। दिल्ली में वाहनों से होने वाले प्रदूषण में लगभग 33 प्रतिशत प्रदूषण कमर्शियल वाहनों और 46 प्रतिशत टू व्हीलर आैर थ्री व्हीलर से होता है। जो कमर्शियल गुड्ज व्हीकल दिल्ली में हैं वह एन-1 कैटेगरी के हैं, जिन्हें साढ़े तीन टन तक का छोटा ट्रक कहा जाता है। महानगर में ​िजस तरह से कारों की संख्या में बढ़ौतरी हो रही है उससे पैट्रोल और डीजल से चलने वाले वाहनों से प्रदूषक तत्वों का भारी उत्सर्जन हो रहा है। कारें हर मध्यम परिवार के लिए जरूरत से ज्यादा स्टेटस सिंबल बन चुकी हैं। दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार ने इस बार सर्दियों के आगमन से काफी पहले ही ​िदल्ली वासियों को शुद्ध हवा में सांस दिलवाने के लिए नीतियों को व्यावहारिक रूप से लागू करने का काम शुरू कर दिया है। पूर्व की सरकारें तभी जागती थीं जब दिल्ली में सांस लेना दूभर हो जाता था। रेखा गुप्ता सरकार ने अब राजधानी में इलैक्ट्रिक वाहनों को नई रफ्तार देने के लिए नई इलैक्ट्रिक व्हीकल नीति की घोषणा की है। इस नीति से प्रदूषण कम होगा और राजधानी में स्वच्छ परिवहन को मजबूती मिलेगी। नई नीति एक जुलाई से ही लागू की जा रही है जो 31 मार्च, 2030 तक लागू रहेगी। इस नीति के तहत सरकार अगले 4 वर्षों में करीब 15 हजार करोड़ रुपए खर्च करेगी और इस बड़े बजट के जरिए इलैक्ट्रिक वाहनों के इस्तेमाल को बढ़ाने आैर इससे जुड़े बुनियादी ढांचे को बेहतर बनाएगी।
नई पॉलिसी के तहत सरकार इलैक्ट्रिक टू-व्हीलर की खरीद पर पहले साल 30,000 रुपये तक की प्रोत्साहन राशि, दूसरे साल में 20,000 रुपये और तीसरे साल में 10,000 रुपये का इंसेंटिव दिया जाएगा। वहीं पैसेंजर थ्री-व्हीलर के लिए ये राशि सालाना आधार पर क्रमशः पहले साल में 50,000 रुपये, दूसरे साल में 40,000 रुपये और तीसरे साल में 30,000 रुपये का इंसेंटिव दिया जाएगा। इसके अलावा एन 1 कैटेगरी यानी छोटे इलैक्ट्रिक ट्रक की खरीद पर ग्राहकों को पहले साल 1 लाख रुपये तक की प्रोत्साहन राशि दी जाएगी। सरकार का कहना है कि नई पॉलिसी जिस दिन लागू होती है उसके 3 महीने के अंदर साढ़े 3 टन से 12 टन तक के एम2 कैटेगरी के ट्रक्स को नो एंट्री फ्री दी जाएगी लेकिन ये नियम केवल पहले 1,000 इलैक्ट्रिक ट्रक की खरीद पर ही लागू होगा। सरकार ने इस ईवी पॉलिसी में पुराने और कबाड़ हो चुके वाहनों के लिए स्क्रैपिंग इंसेंटिव का भी ऐलान किया है। ताकि लोग अपने पुराने वाहन (जो अपनी तय उम्र पूरी कर चुके हों) उन्हें स्क्रैप करा सकें। सरकार का कहना है कि पुराने बीएस 4 या उससे भी नीचे के इमिशन नॉर्म्स वाले पुराने टू-व्हीलर को स्क्रैप में भेजने पर वाहन मालिक को 10,000 रुपये तक की प्रोत्साहन राशि दी जाएगी। इस तरह दिल्ली की रेखा गुप्ता सरकार पहली ऐसी राज्य सरकार बन गई है जो इलैक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के लिए बड़ी नीति लेकर आई है।
पिछले दो दशकों में प्रशासन द्वारा मोटर वाहनों से उत्सर्जन को कम करने के लिए कई कदम उठाए गए हैं। साल 2001 में सभी सार्वजनिक परिवहन वाहनों (बसों, ऑटो और टैक्सियों) को पैट्रोल/डीजल से कंप्रेस्ड नैचुरल गैस (सीएनजी) आधारित प्रणाली में बदल दिया गया था। सीएनजी को इसकी स्वच्छ विशेषताओं के कारण ही प्राथमिकता दी गई थी। 2015 में डीजल से चलने वाले कमर्शियल व्हीकल (वाणिज्यिक वाहनों) जैसे ट्रक पर पर्यावरण क्षतिपूर्ति शुल्क लगाया गया था, जो अन्य राज्यों में जाने के लिए शॉर्ट-कट के तौर पर सड़कों का इस्तेमाल करने के लिए दिल्ली शहर में प्रवेश कर रहे थे। ऐसे वाहनों को अब रिजनल रिंग रोड कॉरिडोर का इस्तेमाल करना होता है, जिसे दिल्ली के आसपास विकसित किया गया है।
पुराने वाहनों को चरणबद्ध तरीके से हटाने की नीति के तहत एनसीआर में 10 साल पुराने डीजल वाहनों के संचालन पर रोक लगा दी गई थी। इसके बाद 15 साल पुराने पैट्रोल वाहनों पर भी रोक लगा दी थी। देश का आटोमोबाइल सैक्टर अब इलैक्ट्रिक वाहनों का उत्पादन बढ़ा रहा है और लोग भी इन्हें अपनाने लगे हैं लेकिन देश में अभी चार्जिंग स्थलों का ढांचा व्यापक रूप से स्थापित नहीं हो पाया। इसलिए चार्जिंग की समस्या का सामना करना पड़ रहा है। इलैक्ट्रिक वाहनों के लिए पैट्रोल पम्पों की तरह जगह-जगह चार्जिंग केन्द्र स्थापित करने की जरूरत है तभी ईवी नीति सफल होगी। कौन नहीं जानता कि प्रदूषण के चलते दिल्लीवासी गंभीर बीमारियों का शिकार हो रहे हैं आैर छोटे बच्चों के फेफड़े भी अब गुलाबी की बजाय काले रंग में परिवर्तित हो रहे हैं। हालांकि प्रदूषण की समस्या से ​िनपटने के लिए आसपास के राज्यों में पराली जलाना भी एक कारण है। दिल्ली में लोग स्वच्छ हवा में सांस ले सकें। इसके लिए जनता की भागीदारी की बहुत जरूरत है। दिल्ली की रेखा गुप्ता सरकार की पहल सराहनीय होने के साथ-साथ अनुकरणीय भी है। इसलिए दिल्ली वासियों का यह दायित्व है कि वह प्रदूषण नियंत्रण अभियान में अपनी भागीदारी निभाएं और स्वयं भी प्रदूषण कम करने के लिए प्रकृति के साथ जीना सीखें।

Aditya Chopra

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