है राम के वजूद पे हिंदोस्तां को नाज़!

Summary :

चोरी से राम मंदिर का नहीं, चोरों का क़द घटा है क्या खूब कहा था, शायर-ए-मशरिक, डॉ. सर मुहम्मद इक़बाल ने: “है राम के वजूद पे हिंदोस्तां को नाज़, कहते हैं उन्हें अहले नज़र ही इमाम-ए-हिंद!” अयोध्या का राम मंदिर केवल पत्थरों से निर्मित एक भव्य स्थापत्य नहीं है। यह करोड़ों भारतीयों की आस्था, संस्कृति और सभ्यता की स्मृति का प्रतीक है। श्रीराम भारतीय मानस में केवल एक धार्मिक देवता नहीं, बल्कि मर्यादा, न्याय, करुणा और लोककल्याण के आदर्श हैं। इसलिए राम का सम्मान किसी एक समुदाय तक सीमित नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति की साझा धरोहर का हिस्सा है। यह…

चोरी से राम मंदिर का नहीं,
चोरों का क़द घटा है
क्या खूब कहा था, शायर-ए-मशरिक,
डॉ. सर मुहम्मद इक़बाल ने:
“है राम के वजूद पे हिंदोस्तां को नाज़,
कहते हैं उन्हें अहले नज़र ही इमाम-ए-हिंद!”
अयोध्या का राम मंदिर केवल पत्थरों से निर्मित एक भव्य स्थापत्य नहीं है। यह करोड़ों भारतीयों की आस्था, संस्कृति और सभ्यता की स्मृति का प्रतीक है। श्रीराम भारतीय मानस में केवल एक धार्मिक देवता नहीं, बल्कि मर्यादा, न्याय, करुणा और लोककल्याण के आदर्श हैं। इसलिए राम का सम्मान किसी एक समुदाय तक सीमित नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति की साझा धरोहर का हिस्सा है। यह केवल काव्यात्मक अभिव्यक्ति नहीं थी, बल्कि इस बात की स्वीकृति थी कि राम भारतीय सभ्यता के ऐसे नैतिक आदर्श हैं जिनसे हर भारतीय प्रेरणा ग्रहण कर सकता है।
यह सही है कि सनातन धर्मियों के हैं मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम, क्योंकि उनके सबसे बड़े भगवान हैं वह, मगर, बक़ौल इकबाल, वह इमाम-ए-हिंद हैं न केवल भारत के, बल्कि पूर्ण मुस्लिम संप्रदाय के भी हैं, क्योंकि इस्लाम कहता है कि सभी अन्य धर्मों के पेशवाओं का मान, सम्मान करो और यह कि अगर उनका निरादर करोगे तो वे तुम्हारे धार्मिक पेशवाओं को बुरा, भला कह, तुम्हारी भावनाओं को वे ठेस पहुंचाएंगे।
यूं तो विश्व में एक से एक विशाल धर्म स्थल हैं, जैसे मक्का-मदीना, सेंट पीटर्स बेसिलिका (वेटिकन), बेथलेहम, लुंबिनी (सारनाथ), महाबोधि, हरमंदिर साहिब, वाराणसी, टेंपल माउंट, गुरुद्वारा दरबार साहब (करतारपुर), श्रवण बेलगोला, अजमेर दरगाह, तिरुपति मंदिर आदि मगर इन सब में अपना एक अनूठा और विलक्षण ही स्थान है, श्री राम मंदिर का, क्योंकि यहां प्रति दिन लाखों श्रद्धालु आते हैं। दिल उस समय तार-तार और छलनी हो गया, यह देख कर कि मंदिर के कोश से धन, संपत्ति की चोरी हुई। राम मंदिर में कब से चोरी हो रही है या कितनी हुई है, यह तो जांच एजेंसियां और समय ही बताएगा, मगर जितना सदमा इससे न केवल सनातनियों को पहुंचा है, उतना ही, दूसरे धर्मावलम्बियों को भी पहुंचा है, क्योंकि सारे धर्म अच्छी बातें बताते हैं।
श्री राम मंदिर 500 वर्ष से भी अधिक लंबे अदालती चक्रव्यूह से निकल कर करोड़ों श्री राम भक्तों की दुआओं के बाद बना है, जिसमें न जाने कितने राम भक्तों और हटामात्माओं ने हर प्रकार की क़ुरबानी से लेकर जीवन दान तक दिया है, 1528 से लेकर अबतक, जिनमें 77 जन संघर्ष शामिल हैं। इस दान चोरी को लेकर गाज गिरी है, जिसके कुछ बड़े नाम लिए जा रहे हैं। श्री राम मंदिर के दान ट्रस्ट द्वारा जो गबन, मिसट्रस्ट की बात आ रही है, उसको लेकर ऐसा प्रतीत हो रहा है कि उसने विपक्ष को पुनर्जीवन प्रदान कर दिया है, ऐसा लग रहा है कि जैसे इन सब को जीवन दान मिल गया हो, वारे न्यारे हो गए हों! किसी को भी आपदा में अवसर नहीं तलाशने चाहिएं, क्योंकि ऐसे पांसे उल्टे भी पड़ जाते हैं। अब योगी सरकार और केंद्र को इन तमाम चंदा चोरों के घरों पर जल्द से जल्द बुलडोज़र चलवा, इन्हें गिरफ्तार करना चाहिए, क्योंकि इन्होंने ऐसे एक मासूम और भोले-भाले रिक्शा चलाने वाले या सामान ढोने वाले राम भक्त को धोखा दिया है, जो अपना पसीने में भीगा हुआ, तुड़ा-मुड़ा दस का नोट मंदिर पेटिका में इस विश्वास पर डालता है कि यह मंदिर में लगेगा, न कि किसी बेईमान की जेब में जाएगा! यह भीषण कांड है और इसके दोषियों को ऐसी सज़ा मिलनी चाहिए कि आने वाली नस्लें याद रखें और मंदिर का दान सिस्टम स्वच्छ चलता रहे। वैसे अब आवश्यकता इस बात की है कि यहां सरकारी ओवरसीअर बैठे और एक-एक पाई का हिसाब रहे।
राम हमें मर्यादा का पाठ पढ़ाते हैं। मर्यादा का अर्थ केवल धार्मिक आचरण नहीं, बल्कि अपने से भिन्न विचार रखने वाले व्यक्ति का सम्मान करना भी है। यदि हम राम के जीवन से यही सीख ग्रहण करें, तो भारत विश्व के सामने सह-अस्तित्व और सद्भाव का सर्वोत्तम उदाहरण बन सकता है। आस्था का केंद्र किसी चोरी से छोटा नहीं हो जाता। इतिहास साक्षी है कि अनेक धार्मिक स्थलों ने विपरीत परिस्थितियों का सामना किया है, फिर भी उनकी गरिमा और श्रद्धा अक्षुण्ण बनी रही है। आवश्यकता इस बात की है कि समाज और प्रशासन मिलकर ऐसे पवित्र स्थलों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दें।

फिरोज बख्त अहमद