कृत्रिम बुद्धिमत्ता इक्कीसवीं सदी की सबसे महत्वपूर्ण तकनीकी प्रगति में से एक है जो संपूर्ण उद्योगों को नया रूप दे रही है और लोगों के जीवन और कार्यशैली को बदल रही है। भारत में एआई ने अपार संभावनाएं दिखाई हैं जिससे कई उद्योगों में नवाचार और विकास के विभिन्न अवसर मिल रहे हैं। एक जीवंत डिजिटल उद्योग और योग्य व्यक्तियों की विशाल संख्या के साथ भारत में कृत्रिम बुद्धिमत्ता का भविष्य उज्ज्वल है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता एक बहुमूल्य संपत्ति है जो न केवल प्रौद्योगिकी, बल्कि भारत के विभिन्न उद्योगों में नवाचार को गति प्रदान कर सकती है। सही निवेश, कानून और कार्यबल विकास के साथ एआई में देश के लिए अपार आर्थिक और सामाजिक लाभ उत्पन्न करने की क्षमता है। भारत एआई के क्षेत्र में विश्व अग्रणी बनने की दिशा में अग्रसर है। उत्पादकता बढ़ाकर, नवाचार को बढ़ावा देकर और नए बाज़ार खोलकर एआई भारत के आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है। एआई से स्वास्थ्य सेवा, कृषि और शिक्षा सहित कई उद्योगों पर सकारात्मक प्रभाव पड़ने की संभावना है जिससे लाखों लोगों के जीवन स्तर में सुधार होगा।
भारतीय सरकार ने एआई के महत्व को पहचानते हुए एआई-फॉर-ऑल कार्यक्रम और राष्ट्रीय एआई रणनीति जैसे कार्यक्रम शुरू किए हैं। एक समृद्ध एआई पारिस्थितिकी तंत्र को बढ़ावा देकर इन पहलों का उद्देश्य विभिन्न उद्योगों में एआई अनुसंधान, विकास और इसके उपयोग को आगे बढ़ाना है। भारत का वित्तीय सेवा उद्योग कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के उपयोग में अग्रणी भूमिका निभा रहा है। क्रेडिट स्कोरिंग मॉडल को बेहतर बनाने और धोखाधड़ी का पता लगाने में कृत्रिम बुद्धिमत्ता का इस्तेमाल किया जा रहा है।
निवेशक एआई-संचालित रोबो-एडवाइजर का उपयोग करना शुरू कर रहे हैं, जो कम लागत पर पोर्टफोलियो प्रबंधन और व्यक्तिगत वित्तीय सलाह प्रदान करते हैं। भारत में बने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस उत्पाद, प्लेटफॉर्म और समाधान दुनिया की जरूरतों के अनुसार पेश किए जाएंगे और दिखाया जाएगा कि भारत अब केवल टेक सेवाएं देने वाला देश नहीं रहा। भारतीय स्टार्टअप, रिसर्च संस्थान और टेक कंपनियां अब अपने खुद के एआई प्रोडक्ट और डिजिटल टूल विकसित कर रही हैं। ये प्रोडक्ट सिर्फ घरेलू जरूरतों के लिए नहीं, बल्कि वैश्विक बाजार को ध्यान में रखकर बनाए जा रहे हैं। यह बदलाव दिखाता है कि भारत तकनीक में सहयोगी नहीं, बल्कि समाधान देने वाला आत्मनिर्भर देश बन रहा है। वैश्विक सूचना प्रौद्योगिकी (आइटी) सेवाओं के क्षेत्र में भारतीय कंपनियों का दबदबा 2026 में भी कायम है, तो यही अपने आप में वैश्विक स्तर पर भारत की क्षमता बताने के लिए काफी है। ब्रांड फाइनेंस की नयी रिपोर्ट के मुताबिक, दुनियाभर की शीर्ष 25 आईटी सेवा कंपनियों में भारत और अमेरिका की आठ-आठ संस्थाएं शामिल हैं। यानी वैश्विक आईटी रैंकिंग में भारत और अमेरिका बहुत करीब खड़े हैं। यह संकेत है कि भारतीय आईटी कंपनियां विश्व स्तर पर बेहद मजबूत और भरोसेमंद हैं।
इस नयी सूची में टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) और इनफोसिस ने दुनिया के क्रमश: दूसरे और तीसरे आईटी सेवा ब्रांड के रूप में अपना स्थान बरकरार रखा है। टीसीएस लगातार पांचवें वर्ष दुनिया का दूसरा सबसे मूल्यवान आईटी सेवा ब्रांड बना रहा। रिपोर्ट के मुताबिक, 21.2 अरब डॉलर के ब्रांड मूल्य वाले टीसीएस को प्रशंसा और विश्वसनीयता जैसे प्रमुख मानकों पर बेहद मजबूत स्कोर मिला है, जो इसे एक भरोसेमंद और विश्वसनीय कारोबारी साझेदार के रूप में स्थापित करता है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का केंद्रीय बजट 2026-27 भारत की तकनीकी महत्वाकांक्षाओं में एक रणनीतिक मोड़ है। असेंबली कार्यों को आकर्षित करने पर केंद्रित पिछले बजटों के विपरीत यह बजट कच्चे माल से लेकर बौद्धिक संपदा तक संपूर्ण मूल्य शृंखला में स्वदेशी क्षमता को लक्षित करता है।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट 2026-27 में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के लिए महत्वपूर्ण निवेश की घोषणा की है। उन्होंने एआई को बेहतर शासन के लिए फोर्स मल्टीप्लायर करार दिया और कहा कि सरकार का लक्ष्य किसानों, छात्रों, स्वास्थ्यकर्मियों तथा दिव्यांगजनों के लिए एक समावेशी एआई इकोसिस्टम तैयार करना है। इस मिशन के तहत कंप्यूटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर, डेटासेट और टैलेंट डेवलपमेंट पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। सरकार ने कृषि के लिए ‘भारत-विस्तार’ प्लेटफॉर्म और दिव्यांगों के लिए एआई-संचालित उपकरणों के निर्माण का प्रस्ताव रखा है। इसके अलावा विदेशी क्लाउड कंपनियों को भारत में डेटा सेंटर बनाने के लिए 2047 तक टैक्स हॉलिडे देने का बड़ा ऐलान किया गया है। सरकार एआई और मशीन लर्निंग, क्वांटम कंप्यूटिंग, सेमीकंडक्टर एवं चिप डिजाइन तथा रिसर्च इनिशिएटिव्स को अनुसंधान नेशनल रिसर्च फंड और अन्य आर एंड डी एवं इनोवेशन फंड्स के माध्यम से मजबूत समर्थन देगी। सरकार ने ‘इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन’ के दूसरे चरण को लॉन्च करने का फैसला किया है। इसका उद्देश्य भारत में ही उपकरण और सामग्री का निर्माण करना और चिप डिजाइन की अपनी बौद्धिक संपदा विकसित करना है। एआई क्षेत्र में कुशल कार्यबल तैयार करने के लिए उच्च शिक्षा और तकनीकी संस्थानों में विशेष स्किलिंग प्रोग्राम शुरू किए जाएंगे। एक उच्चाधिकार प्राप्त समिति अध्ययन करेगी कि एआई जैसी उभरती तकनीकों का नौकरियों और कौशल की जरूरतों पर क्या प्रभाव पड़ेगा। कृत्रिम बुद्धिमत्ता एक बहुमूल्य संपत्ति है जो न केवल प्रौद्योगिकी बल्कि भारत के विभिन्न उद्योगों में नवाचार को गति प्रदान कर सकती है। सही निवेश, कानून और कार्यबल विकास के साथ एआई में देश के लिए अपार आर्थिक और सामाजिक लाभ उत्पन्न करने की क्षमता है। भारत एआई के क्षेत्र में विश्व अग्रणी बनने की दिशा में अग्रसर है।
भारत में एआई का भविष्य
Summary :
कृत्रिम बुद्धिमत्ता इक्कीसवीं सदी की सबसे महत्वपूर्ण तकनीकी प्रगति में से एक है जो संपूर्ण उद्योगों को नया रूप दे रही है और लोगों के जीवन और कार्यशैली को बदल रही है। भारत में एआई ने अपार संभावनाएं दिखाई हैं जिससे कई उद्योगों में नवाचार और विकास के विभिन्न अवसर मिल रहे हैं। एक जीवंत डिजिटल उद्योग और योग्य व्यक्तियों की विशाल संख्या के साथ भारत में कृत्रिम बुद्धिमत्ता का भविष्य उज्ज्वल है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता एक बहुमूल्य संपत्ति है जो न केवल प्रौद्योगिकी, बल्कि भारत के विभिन्न उद्योगों में नवाचार को गति प्रदान कर सकती है। सही निवेश, कानून और…


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