comscore

मंत्री जी की माफी महत्वपूर्ण…उससे महत्वपूर्ण जिन्दगियों को बचाना…

पंजाब केसरी की डायरेक्टर व वरिष्ठ नागरिक केसरी क्लब की चेयरपर्सन श्रीमती किरण चोपड़ा

पिछले दिनों मध्य प्रदेश के बहुचर्चित मंत्री जी ने माफी मांगी। किसी हद तक माफी बहुत महत्वपूर्ण और स्वागत योग्य है। नेता हमेशा जनता के सेवक होते हैं और पत्रकार जनता की आवाज। सवाल पूछना उनका हक होता है। जिस दिन सवाल चुप हो जाएंगे उस दिन समझ लो की जनता भी चुप हो जाएगी और अगर पत्रकार नहीं बोलेगा तो कौन बोलेगा। पत्रकार दुश्मन नहीं होता, वो जनता की आवाज बनता है। सच्चाई की आवाज होता है। लोकतंत्र की पहचान होता है। पत्रकारों के सवाल लोकतंत्र का मूल हिस्सा हैं। किसी भी नेता को उनके संयम से जवाब देने चाहिए और जवाब देते वक्त शब्दों का चयन भी ठीक से करना चाहिए। पत्रकारिता लोकतंत्र का चौथा स्तम्भ है। यह कोई उपमा नहीं, बल्कि एक जिम्मेदारी है। जब भी सत्ता से सवाल पूछे जाते हैं तब लोकतंत्र जीवित रहता है। जो सत्ता सवालों को सुन लेती है, वही मजबूत होती है।
जब इंदौर में गंदे पानी से लोगों की जान गई। बच्चे मरे तो एक पत्रकार अनुराग द्वारी ने वही पूछा जो हर आदमी पूछ रहा था कि यह कैसे हुआ? किसकी जिम्मेदारी, आगे ऐसा न हो, इसके लिए क्या होगा? उसने कोई बदतमीजी नहीं की, न कोई निजी आरोप लगाया। उसने सिर्फ जनता की आवाज उठाई परन्तु उसे जो जवाब मिला, जो शब्द सुनने को मिले और जो अहंकार वाले भाव सामने आए वे न केवल उस पत्रकार को, बल्कि पूरी पत्रकारिता को चुभने वाले थे। कैमरों में कैद यह शब्द देखते-देखते देशभर में चर्चा का विषय बन गया और जब मैंने भी सुना तो मुझे भी बहुत गुस्सा आया। क्योंकि कैलाश वर्गीय जी अ​श्विनी जी से मिलने कई बार घर आते थे। मुझे तो यही मालूम था बड़े समझदार नेता हैं, क्योंकि मैंने अपने परिवार में सच्ची पत्रकारिता देखी है। लाला जी, रमेश जी, फिर अश्विनी जी को सबको प्रश्न पूछते देखा। अश्विनी जी अटल जी, अडवानी जी, मोदी जी से स्पष्ट सीधे सवाल पूछते थे। कभी किसी ने उल्ट जवाब नहीं ​िदया। यहां तक अश्विनी जी ने पाकिस्तान में जाकर उनके प्राइममिनिस्टर (पीएम) को सीधे कड़क सवाल पूछे, ​िजन्हें आज तक लोग याद करते हैं। जब भी राजीव शुक्ला मिलते हैं हमेशा उस बात को दोहराते हैं।
मंत्री जी के अपशब्दों और व्यवहार को राष्ट्रीय मीडिया ने गम्भीरता से उठाया। अखबारों, टीवी चैनलों और ​िडजिटल मीडिया में नाराजगी जताई गई। अंत में मंत्री जी को मीडिया से माफी मांगनी पड़ी, जो मेरी सोच में सही कहा। अगर उनसे गुस्से में या हड़बड़ाहट में गलती हुई है तो माफी बनती है। सुबह का भूला शाम को घर वापिस आ जाए तो उसे भूला नहीं कहते परन्तु माफी से ज्यादा जरूरी है भविष्य में संयम और सम्मान। पत्रकारों से भी गलती होती है, तो उन्हें कोई अखबार में माफी की लाइन लगाने को कहता है या किसी के बारे में गलत खबर लग जाए तो खेद प्रकट किया जाता है, इसलिए मंत्री जी ने भी अपनी गलती मानकर, माफी मांग कर सुधार किया जो स्वागत योग्य है और नेताओं को भी शिक्षा है, वो जनता के लिए जनता सेवक का उदाहरण बनें। जनता का या पत्रकारों का अपमान न करें। जो पत्रकार ईमानदारी से काम करते हैं तो पूरा देश उसके साथ खड़ा होता है। मेरा उस पत्रकार को सलाम।
अब सबसे अधिक महत्वपूर्ण है मध्य प्रदेश में जहां गंदा पानी पीकर लोग बीमार हो रहे हैं, कई लोग जीवन से हाथ धो बैठे हैं, कई बच्चों की मृत्यु हो गई है। अगर सभी उस जगह खड़े होकर देखें तो गुस्सा भी आएगा, रोष भी होगा। तो सही समय है मंत्री जी इसका समाधान ढूंढें आैर लोगों की जिन्द​िगयां बचाएं, वो सच्ची माफी होगी और उस पत्रकार को ही नहीं सभी पत्रकारों और मीडिया जगत को संतोष मिलेगा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *


Make Punjab Kesari Your Trusted News Source

पंजाब केसरी एक हिंदी भाषा का समाचार पत्र है जो भारत में पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, हिमाचल प्रदेश और दिल्ली के कई केंद्रों से प्रकाशित होता है।