व्हाट्सएप का नया फीचर

Summary :

­­­­मानव स्वभाव बहुत जिज्ञासु होता है। जैसे ही सोशल मीडिया की क्रांति आई मनुष्य के लिए दुनियाभर में तुरंत सम्पर्क करना संभव हो गया। दुनिया के किसी भी व्यक्ति से बात करना पड़ोसी से बात करने जैसा हो गया है। घर की चारदीवारी में कम्प्यूटर, लैपटॉप और मोबाइल ने जगह बना ली। चाहे निजी उद्देश्य हो या व्यावसायिक संचार मनुष्य का काम आसान हो गया है। सोशल मीडिया साइटें संचार का एक महत्वपूर्ण घटक बन गई। सोशल मीडिया साइटें भौगोलिक दूरी के बावजूद दोस्तों, परिवार और समान विचारधारा वाले लोगों से जुड़ने का अवसर प्रदान करती हैं लेकिन सोशल मीडिया की…

­­­­मानव स्वभाव बहुत जिज्ञासु होता है। जैसे ही सोशल मीडिया की क्रांति आई मनुष्य के लिए दुनियाभर में तुरंत सम्पर्क करना संभव हो गया। दुनिया के किसी भी व्यक्ति से बात करना पड़ोसी से बात करने जैसा हो गया है। घर की चारदीवारी में कम्प्यूटर, लैपटॉप और मोबाइल ने जगह बना ली। चाहे निजी उद्देश्य हो या व्यावसायिक संचार मनुष्य का काम आसान हो गया है। सोशल मीडिया साइटें संचार का एक महत्वपूर्ण घटक बन गई। सोशल मीडिया साइटें भौगोलिक दूरी के बावजूद दोस्तों, परिवार और समान विचारधारा वाले लोगों से जुड़ने का अवसर प्रदान करती हैं लेकिन सोशल मीडिया की शक्ति का दुरुपयोग होना इतना बढ़ चुका है कि अब इस पर नियंत्रण के उपाय खोजे जा रहे हैं।

सोशल मीडिया कम्पनियां नए-नए ​फीचर लाती रही हैं ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग उनसे जुड़े रहें। कम्पनियां साइबर सुरक्षा की ओर ज्यादा ध्यान नहीं देतीं। अब व्हाट्सएप का नया ​​फीचर विवादों से घिर गया है। व्हाट्सएप ने मैसेजिंग सेवा के ‘यूजर नेम’ ​फीचर को शुरू किया जिसमें वह धीरे-धीरे उपयोगकर्ताओं को पहली बार किसी अन्य उपयोगकर्ता से सम्पर्क करते समय अपने उपयोगकर्ता का नाम चुनने और अपना फोन नम्बर छुपाने की सुविधा देगा। यह एक वैक​ल्पिक विशिष्ट पहचानकर्ता है जिसे उपयोगकर्ता अपने व्हाट्सएप खाते के लिए चुन सकता है। इसका उपयोग अन्य लोग भी उसे संदेश भेजने या कॉल करने के लिए कर सकते हैं जिससे उनका फोन नम्बर गोपनीय रहेगा।

जब विशेषज्ञों ने इस ​फीचर के गलत इस्तेमाल की आशंकाएं जताईं तो गृह मंत्रालय ने इलैक्ट्रोनिक्स और आईटी मंत्रालय के समक्ष चिन्ता व्यक्त की। तब सरकार ने मेटा के स्वामित्व वाली व्हाट्सएप को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। सरकार इस नए फीचर के जोखिम का मूल्यांकन करेगी और देखेगी कि क्या यह मौजूदा कानूनी ढांचे का उल्लंघन करता है। सरकार ने कम्पनी को निर्देश दिया है कि इस मामले पर परामर्श पूरा होने तक ​फीचर को लांच न किया जाए। ऐसी संभावना है कि कुछ शरारती तत्व प्रमुख हस्तियों, संस्थानों और संगठनों से मिलते-जुलते यूजरनेम या उनके मिलते-जुलते नामों का इस्तेमाल करके दूसरे यूजर्स को संदेश भेज सकते हैं और खुद को कोई और बता सकते हैं।

जो लोग तकनीकी रूप से इतने जानकार नहीं हैं कि अंतर समझ सकें, उनके लिए यह एक बड़ी चुनौती हो सकती है। हमने पहले ही देखा है कि शरारती तत्व व्हाट्सएप के जरिए डिजिटल गिरफ्तारियों जैसे फर्जीवाड़े कर रहे हैं और यह ​फीचर उन्हें और भी मदद कर सकता है।” एक बयान में व्हाट्सएप ने कहा कि वह इस साल के अंत तक धीरे-धीरे इन सुविधाओं को शुरू करने की योजना बना रहा है, लेकिन साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि उसने सुरक्षा उपाय किए हैं। “नकली पहचान से बचाव के लिए हमने सबसे चर्चित नामों–जैसे सार्वजनिक हस्तियां, सरकारी संस्थाएं, मशहूर हस्तियां, सत्यापित मेटा खाते को सुरक्षित रखा है, ताकि उन पर केवल उनके असली मालिक ही दावा कर सकें और जाने-माने नामों से मिलते-जुलते नामों को भी सुरक्षित रखा गया है।”

यद्यपि व्हाट्सएप का कहना है कि इसका इस्तेमाल करने के लिए उपयोगकर्ताओं को अभी भी फोन नम्बर की जरूरत होगी और उसने धोखाधड़ी से बचाव के लिए कई सुरक्षा उपाय शामिल किए हैं लेकिन विशेषज्ञों ने गम्भीर चिंताएं व्यक्त की हैं। साइबर ठग व्हाट्सएप पर यूजर नेम का गलत इस्तेमाल करके लोगों को धोखा दे सकते हैं। स्कैमर्स फोन नम्बर छुपाकर लोगों से सम्पर्क करेंगे। इससे इन्वेेस्टमेंट स्कैम, फिशिंग आैर नौकरी स्कैम जैसे फ्रॉड बढ़ेंगे। व्हाट्सएप पर अभी मोबाइल नम्बर दिखाई देता है जिससे उस व्य​क्ति की पहचान हो जाती है। अब यूजर नेम की वजह से उसको पहचानना मुश्किल हो जाएगा। ऐसे में अंजान लोगों पर भरोसा करना मुश्किल होगा।

व्हाट्सएप पर ठगी से पहले नम्बर आ जाता था जिसकी वजह से मोबाइल नम्बर से पहचान करना आसान हो जाता था। अब यूजर नेम आधारित बातचीत से जांच एजैंसियों के लिए ट्रेस करना मुश्किल हो जाएगा। ब्रांड और बिजनेस की नकल करना आसान होगा जिससे लोगों को ठगना बहुत आसान होगा। आज की युवा पीढ़ी बढ़ती यौन विकृतियों के चलते जिस शैली में चैटिंग करती है उसमें बढ़ौतरी होगी और हो सकता है कि रोज-रोज नए-नए स्कैम सामने आएं। कुछ दिन पहले ही साइबर अटैकर्स ने व्हाट्सएप पर एक मालवेयर हमला किया। जिसने व्हाट्सएप के वेब और डेस्कटॉप वर्जन से यूजर्स को टारगेट ​किया।

इससे डिवाइस का डाटा और दूसरी सभी सूचनाएं चुराई गईं। सोशल मीडिया का उपयोग साइबर धमकियों, शर्मनाक टिप्पणियों, आपत्तिजनक यौन तस्वीरों और आपत्तिजनक वीडियोज के लिए किया जा रहा है। निजता का खुला उल्लंघन हो रहा है। सोशल मीडिया प्लेटफार्मों के अत्यधिक उपयोग और उनका मानसिक स्वास्थ्य पर प्रभाव युवाओं के लिए चिंता का विषय है। सोशल मीडिया के उपयोग से लोगों के जुड़ने और संवाद करने के तरीके बहुत बदल चुके हैं। इसके चलते समाज में आपसी संवाद खत्म होता जा रहा है जो मानव स्वभाव के काले पक्ष को उजागर करता है।

हमें अंधकार फैलाने वाला सोशल मीडिया नहीं चाहिए। लोगों से फ्रॉड करने वाला या विकृतियां फैलाने वाला मीडिया नहीं चाहिए। इसके लिए जरूरी है कि सरकार ऐसे ​फीचर पर पाबंदी लगाए। व्हाट्सएप का नया फीचर काफी हद तक टेलीग्राम के यूजर नेम सिस्टम जैसा ही है। नीट पेपर लीक विवाद के दौरान टेलीग्राम पर सवाल उठे थे और सरकार ने नीट री-एग्जाम के दौरान टेलीग्राम एप पर पाबंदी लगा दी थी।

Aditya Chopra

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