ऑनलाइन गेमिंग से बर्बाद होते युवा

Summary :

बीते कुछ सालों में ऑनलाइन गेमिंग का दायरा कुछ इस कदर बढ़ा है कि देश के युवा इसकी चपेट में आकर बर्बाद हो रहे हैं, अपना लाखों-करोड़ों रुपया गंवा रहे हैं। सरकार का अनुमान है कि लगभग 45 करोड़ लोग ऑनलाइन रियल-मनी गेमिंग में हर साल लगभग 20,000 करोड़ रुपये गंवा देते हैं। बीते दिनों पंजाब के नवांशहर में ऑनलाइन गेमिंग में 5 से 7 लाख रुपये की भारी रकम हारने के बाद तीन दोस्तों ने कथित तौर पर जहर खा लिया। इस दर्दनाक घटना में 21 वर्षीय युवक और एक किशोर की मौत हो गई, जबकि तीसरे किशोर का…

बीते कुछ सालों में ऑनलाइन गेमिंग का दायरा कुछ इस कदर बढ़ा है कि देश के युवा इसकी चपेट में आकर बर्बाद हो रहे हैं, अपना लाखों-करोड़ों रुपया गंवा रहे हैं। सरकार का अनुमान है कि लगभग 45 करोड़ लोग ऑनलाइन रियल-मनी गेमिंग में हर साल लगभग 20,000 करोड़ रुपये गंवा देते हैं। बीते दिनों पंजाब के नवांशहर में ऑनलाइन गेमिंग में 5 से 7 लाख रुपये की भारी रकम हारने के बाद तीन दोस्तों ने कथित तौर पर जहर खा लिया।

इस दर्दनाक घटना में 21 वर्षीय युवक और एक किशोर की मौत हो गई, जबकि तीसरे किशोर का इलाज अस्पताल में जारी है। बीती 8 अगस्त को शाहजहांपुर में ऑनलाइन गेम में हारने से अवसादग्रस्त एक 36 वर्षीय युवक ने आत्महत्या कर ली। बीती 30 जुलाई को बिहार के कटिहार में ऑनलाइन गेमिंग की लत एक युवक के लिए जानलेवा साबित हुई। बीती मार्च में कर्नाटक के ‘बीदर आयुर्विज्ञान संस्थान’ के 21 वर्षीय मेडिकल छात्र ने ऑनलाइन गेमिंग में 80,000 रुपये गंवाने के बाद वित्तीय दबाव से परेशान होकर आत्महत्या कर ली।

सस्ते इंटरनेट और किफायती स्मार्टफोन के बदौलत भारत ने न सिर्फ ‘डिजिटल इंडिया’ तक का सफर तय किया। बल्कि इसके साथ-साथ ऑनलाइन रियल मनी गेमिंग और बेटिंग जैसी इंडस्ट्री भी फलने-फूलने लगी। भारत में ऑनलाइन रियल मनी गेमिंग की शुरुआत किफायती इंटरनेट और स्मार्टफोन के साथ ही शुरु हुआ। इंटरनेट और मोबाइल फोन ने इसका आधार बनाया और लोगों के बीच में तेजी से पॉपुलर किया। साल 2006 से 2010 के बीच में भारतीय मोबाइल यूजर्स के बीच ऐस-2-थ्री और ‘रम्मी सर्कल’ जैसे शुरुआती प्लेटफॉर्म्स ने ऑनलाइन रम्मी गेम्स को बढ़ावा दिया। 2008 में ‘ड्रीम11’ की शुरुआत हुई, जिसने 2012 से रियल मनी फैंटेसी क्रिकेट पेश किया।

इस गेम के विनर्स से ऐसी माउथ पब्लिसिटी मिली कि देश में लगभग हर तीसरे क्रिकेट फैन के फोन में यह ऐप या ऐसी ही दूसरी ऐप मिल जाएगी। साल 2016 में भारत में टेलीकॉम कंपनियां ने मोबाइल इंटरनेट को काफी हद तक किफायती कर दिया। पूरे महीने के लिए मिलने वाला 1 से 2 जीबी डाटा डेली कर दिया गया। इससे मोबाइल गेमिंग के यूजर्स में काफी बढ़ाैतरी हुई। किफायती इंटरनेट ने डिजिटल इंडिया को भी बढ़ावा मिला। यूपीआई ने न सिर्फ डिजिटल पेमेंट्स को आसान बनाया बल्कि रियल मनी गेमिंग प्लेटफॉर्म से ट्रांजैक्शन को भी आसान बना दिया। अब लोग आसानी से इन प्लेटफॉर्म में रुपये लगा सकते थे और जीतने पर आसानी से निकाल भी सकते थे।

2017 में पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने ‘ड्रीम 11’ के फॉर्मेट को ‘गेम ऑफ स्किल’ करार दिया। बाद में सुप्रीम कोर्ट ने भी इस फैसले को बरकरार रखा। इससे पहले रम्मी को भी स्किल-बेस्ड गेम करार दिया जा चुका था। सुप्रीम कोर्ट के इन फैसलों के बाद भारत में रियल मनी गेमिंग को कुछ हद तक कानूनी मान्यता मिली और भारत में गेमिंग इंडस्ट्री को तेजी मिली। कोविड-19 के चलते लगे लॉकडाउन में लाखों यूजर्स ने मनोरंजन के लिए इस तरह के गेमिंग प्लेटफॉर्म का रुख किया। वहीं इस बीच इस तरह के गेमिंग प्लेटफॉर्म को घरेलू निवेशकों के साथ-साथ जमकर एफडीआई भी मिले।

अकेले 2018 से 21 के बीच में ऑनलाइन गेमिंग को 700 मिलियन डॉलर से ज्यादा का विदेशी निवेश मिला और ड्रीम11, एमपीएल, गेम्स 24×7 जैसे स्टार्टअप देखते-देखते यूनिकॉर्न बन गए। भारत के ऑनलाइन गेमिंग को मिले बूम के चलते 2023 तक भारत में इसका मार्केट साइज 3.7 अरब डॉलर का हो चुका था। इसके साथ ही 2029 तक इसके 9.1 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान था। इन गेम्स को बूम मिलने का सबसे बड़ा कारण था कि इनका करीब 86 प्रतिशत रेवेन्यू रियल मनी फॉरमेंट से आता है।

निस्संदेह, ऑनलाइन गेम के लालच में किशोर-युवा विवेक खो देते हैं। लत लगाने वाले ये जहरीले खेल सुनहरे सपने तो दिखाते हैं, लेकिन हकीकत बेहद खुरदरी है।जानकार कहते हैं कि ये न केवल अपने ग्राहकों को लाखों रुपये का चूना लगाते हैं बल्कि उन्हें ऑनलाइन जुए की लत भी लगा देते हैं। वो कहते हैं कि आज कम कीमत पर मोबाइल फोन और कनेक्टिविटी मौजूद हैं और इसकी वजह से ऑनलाइन जुए की लोकप्रियता पूरी दुनिया में फ़ैल रही है जो कि यह एक चिंता का विषय बन गया है। इंटरनेट के माध्यम से होने वाला ऑनलाइन जुआ कई रूप में मौजूद है।

वास्तव में, आज मोबाइल दुधारी तलवार जैसे हो गए हैं। सूचना-संवाद तो देते हैं, साथ ही तमाम आघातों की आशंकाएं भी रहती हैं। जो मोबाइल बच्चों को ऑनलाइन पढ़ाई और संवाद के लिये दिये जाते हैं, उसका दुरुपयोग बच्चे ऑनलाइन गेमिंग व वर्जित सामग्री देखने के लिए करने लगे हैं। पुरानी पीढ़ी बेबस है कि वे बच्चों की निगरानी कैसे करें? वे पढ़ रहे हैं या गेम खेल रहे हैं?

दरअसल, देश-दुनिया में नई पीढ़ी के जीवन में तेजी से बदलाव आ रहे हैं। नित नई तकनीक हमारे दरवाजों पर दस्तक दे रही है, लेकिन हम उसके नकारात्मक दुष्प्रभावों से बच नहीं पा रहे हैं। उपभोक्तावादी संस्कृति समाज में इतनी गहरे तक घर कर गई है कि हर कोई रातों-रात अमीर बनने के सपने देखने लगा है। सोच है कि जैसे-तैसे पैसा कमाकर अमीर बना जाए। नवांशहर की घटना में पंद्रह साल के किशोर को आखिर क्यों ऑनलाइन गेमिंग से कमाई करने की ललक पैदा हुई? गेम खेलना बुरी बात नहीं है लेकिन उसका लत बनना घातक है। ये किशोर के खेलने-खाने की उम्र थी, लेकिन मैदान के खेल। लेकिन लालच के गेम में उलझकर आखिर वह क्या पाना चाह रहा था?

सरकार का मानना है कि ऑनलाइन रियल-मनी गेमिंग ‘समाज के लिए एक बड़ी समस्या’ बनती जा रही है। रियलमी मनी पर आधारित ऑनलाइन गेम के चलते कई गंभीर सामाजिक, आर्थिक और मनोवैज्ञानिक से जुड़े मामले सामने आए थे। इसके साथ ही कुछ मामलों में तो आत्महत्या, चोरी, कर्ज के बोझ और अवैध सोर्स से लोगों के पैसा जुटाने जैसी घटनाएं भी सामने आई थी।

इन सबके चलते भारत सरकार ने द प्रमोशन एंड रेगुलेशन ऑफ ऑनलाइन गेमिंग एक्ट, 2025 के तहत देश में सभी प्रकार के ऑनलाइन रियल-मनी गेम्स पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है। सरकार का मुख्य उद्देश्य युवाओं और संवेदनशील आबादी को इस लत के कारण होने वाले भारी आर्थिक नुक्सान, मानसिक तनाव और धोखाधड़ी से बचाना है। इससे भले ही सरकार को मिलने वाले रेवेन्यू को नुक्सान पहुंचेगा, लेकिन बजाय इसके देश के नागरिकों के हित को प्राथमिकता दी गई। कहना कठिन है कि ऑनलाइन खेलों को कितने पारदर्शी तरीके व ईमानदारी के साथ संचालित किया जाता है।

बहुत संभव है कि ये गेम भी ऑनलाइन फ्रॉड संस्कृति का ही हिस्सा हों, जो संचालकों के मुनाफे के लिये ही संचालित होते हों। बहरहाल, किशोर व युवक द्वारा मोटी रकम हारने के बाद खुदकुशी करना परिवार, समाज व देश की बड़ी क्षति है।

Team Desk