टीवी सीरियल ‘क्योंकि सास भी कभी बहू थी’ के ताजा एपिसोड में एक बार फिर हाई-वोल्टेज ड्रामा देखने को मिला है। शांति निकेतन के आंगन में जहां एक तरफ जन्माष्टमी का त्योहार और दही हांडी का जश्न मनाया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर घर के भीतर साजिशों और राजों का पर्दाफाश हो रहा है। तुलसी अब किसी भी कीमत पर चुप रहने के मूड में नहीं है और उसने ठान लिया है कि वह तृप्ति का असली चेहरा सब के सामने लाकर ही सांस लेगी।
नकाबपोश का सच और शांति निकेतन में बढ़ता खौफ

कहानी की शुरुआत में तुलसी परिवार के सभी सदस्यों को यह समझाने की कोशिश करती है कि अनुपम अभी भी जिंदा है। उसका मानना है कि घर के आसपास जो नकाबपोश घूम रहा है, वह कोई और नहीं बल्कि अनुपम ही है। हालांकि, नंदिनी उसे पुरानी बातें याद दिलाते हुए कहती है कि केसर और अनुपम की मौत सालों पहले हो चुकी है, इसलिए उसे गलतफहमी हो रही है। करण भी तुलसी की बात पर नाराज होता है और उसे बनाई हुई कहानी बताता है। लेकिन तभी गौतम दखल देता है और स्टोर रूम में मिली तस्वीरों के बारे में बताकर सबको ध्यान रखने को कहता है।
इसी बहस के बीच बाहर से सुरक्षा गार्ड की चीख सुनाई देती है। गार्ड घायल हालत में मिलता है और बताता है कि उसने उस नकाबपोश को पकड़ने की कोशिश की थी, लेकिन वह चकमा देकर भाग निकला। हालांकि, भागने के दौरान नकाबपोश का मास्क गार्ड के हाथ में आ जाता है। गार्ड दावा करता है कि वह उसका आधा चेहरा पहचान सकता है।
15 लाख का ऑफर और तृप्ति के उड़ते हुए होश

नकाबपोश का मामला गर्म होते ही तृप्ति तुलसी के पास पहुंचती है और ताना मारने लगती है। लेकिन तुलसी इस बार कोई नरमी नहीं दिखाती। तुलसी साफ शब्दों में वार्निंग देती है कि कल रात तक वह तृप्ति को शांति निकेतन से बाहर फेंक देगी। तुलसी के इस रूप को देखकर तृप्ति अंदर से बुरी तरह डर जाती है।
इसके बाद तुलसी चुपके से शंकर नाम के पुराने ड्राइवर से मिलती है। तुलसी उसे सच उगलने के बदले 15 लाख रुपये का लालच देती है और पुलिस का डर भी दिखाती है। इस दबाव में आकर शंकर बड़ा खुलासा करता है। वह बताता है कि वह पहले सुभाष का ड्राइवर था और सुभाष की पहली पत्नी की मौत के पीछे तृप्ति का ही हाथ हो सकता है। यह सच सामने आते ही तुलसी का शक यकीन में बदल जाता है।
दही हांडी का जश्न और स्केच आर्टिस्ट का इंतजार

एक तरफ घर में सच और झूठ का खेल चल रहा है, तो दूसरी तरफ शांति निकेतन में दही हांडी का कंपटीशन शुरू होता है। घर के युवा और नई पीढ़ी मिलकर मटकी फोड़ने के खेल में जुट जाते हैं। हंसी-मजाक और नोक-झोंक के बीच करण, गौतम और साहिल की टीम खेल जीत जाती है। तृप्ति दूर खड़ी होकर जश्न देख रही होती है, लेकिन उसके मन में सिर्फ यही डर सता रहा होता है कि तुलसी उसके खिलाफ क्या कदम उठाने वाली है।
एपिसोड के आखिर में साहिल के पास पुलिस का फोन आता है। पुलिस बताती है कि नकाबपोश का चेहरा बनाने के लिए स्केच आर्टिस्ट जल्द ही शांति निकेतन पहुंचने वाला है। अब देखना दिलचस्प होगा कि क्या यह स्केच तृप्ति का पर्दाफाश करेगा या कहानी में कोई नया मोड़ आएगा।
Read More: Anupama 10 September 2026 Spoiler Alert: क्या मां Anupama बचा पाएगी अपनी बेटी का..


Download Android App
Download iOS App




