Mahashivratri Mantra: फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को मनाई जानें वाली महाशिवरात्रि का काफी आध्यात्मिक महत्व है। भगवान शिव की उपासना के लिए महाशिवरात्रि से श्रेष्ठ कोई दिन नहीं है। इस वर्ष यह पर्व रविवार,15 फरवरी 2026 को मनाया जा रहा है। माना जाता है कि इस दिन पूरी श्रद्धा से पूजा-अर्चना करने से भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और जीवन के समस्त कष्टों का निवारण होता है।
महादेव को प्रसन्न करने के लिए भक्त कई प्रकार के पूजन और अनुष्ठान करते हैं, लेकिन शास्त्रों के अनुसार शिव जी के शक्तिशाली मंत्रों का जाप सबसे सरल और प्रभावशाली मार्ग है। यदि आप महाशिवरात्रि पर पूरी श्रद्धा से इन मंत्रों का पाठ करते हैं, तो आपकी समस्त मनोकामनाएं शीघ्र ही पूर्ण हो सकती हैं।
Shivratri Mantra in Hindi: शिवलिंग पूजा मंत्र

मन्दाकिन्यास्तु यद्वारि सर्वपापहरं शुभम् ।
तदिदं कल्पितं देव स्नानार्थं प्रतिगृह्यताम् ॥
श्रीभगवते साम्बशिवाय नमः । स्नानीयं जलं समर्पयामि।
तदिदं कल्पितं देव स्नानार्थं प्रतिगृह्यताम् ॥
श्रीभगवते साम्बशिवाय नमः । स्नानीयं जलं समर्पयामि।
Mahashivratri Mantra: शिव बीज मंत्र
ॐ ह्रीं नम: शिवाय
Bhole Baba Mantra: महामृत्युंजय मंत्र

ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥
Mantra for Shivratri: शिव पंचाक्षर मंत्र
ॐ नम: शिवाय।
Mahashivratri Mantra: कर्पूरगौरं करुणावतारं मंत्र
कर्पूरगौरं करुणावतारं संसारसारं भुजगेन्द्रहारम् । सदा बसन्तं हृदयारबिन्दे भबं भवानीसहितं नमामि ।।
Shiv Namavali Mantra: शिव नामावली मंत्र

- श्री शिवाय नम:।।
- श्री शंकराय नम:।।
- श्री महेश्वराय नम:।।
- श्री सांबसदाशिवाय नम:।।
- श्री रुद्राय नम:।।
- ओम पार्वतीपतये नम:।।
- ओम नमो नीलकण्ठाय नम:।।
- ॐ नमः पार्वती पतये हर हर महादेव (Om Namah Parvati Pataye Har Har Mahadev)
- ॐ नमः पार्वती पतये, हर-हर महादेव
Shiv Rudraya Mantra: शिव रुद्राय मंत्र
ॐ नमो भगवते रुद्राय नमः

Shiv Gayatri Mantra: शिव गायत्री मंत्र
ओम तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि तन्नो रुद्र: प्रचोदयात।।
Shivratri Puja Mantra: रुद्राभिषेक मंत्र

- ॐ नम: शम्भवाय च मयोभवाय च नम: शंकराय च
- मयस्कराय च नम: शिवाय च शिवतराय च ॥
- ईशानः सर्वविद्यानामीश्व रः सर्वभूतानां ब्रह्माधिपतिर्ब्रह्मणोऽधिपति
- ब्रह्मा शिवो मे अस्तु सदाशिवोय् ॥
- तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि। तन्नो रुद्रः प्रचोदयात्॥
- अघोरेभ्योथघोरेभ्यो घोरघोरतरेभ्यः सर्वेभ्यः सर्व सर्वेभ्यो नमस्ते अस्तु रुद्ररुपेभ्यः ॥
- वामदेवाय नमो ज्येष्ठारय नमः श्रेष्ठारय नमो
- रुद्राय नमः कालाय नम: कलविकरणाय नमो बलविकरणाय नमः
- बलाय नमो बलप्रमथनाथाय नमः सर्वभूतदमनाय नमो मनोन्मनाय नमः ॥
- सद्योजातं प्रपद्यामि सद्योजाताय वै नमो नमः ।
- भवे भवे नाति भवे भवस्व मां भवोद्भवाय नमः ॥
- नम: सायं नम: प्रातर्नमो रात्र्या नमो दिवा ।
- भवाय च शर्वाय चाभाभ्यामकरं नम: ॥
- यस्य नि:श्र्वसितं वेदा यो वेदेभ्योsखिलं जगत् ।
- निर्ममे तमहं वन्दे विद्यातीर्थ महेश्वरम् ॥
- त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिबर्धनम् उर्वारूकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मा मृतात् ॥
- सर्वो वै रुद्रास्तस्मै रुद्राय नमो अस्तु । पुरुषो वै रुद्र: सन्महो नमो नम: ॥
- विश्वा भूतं भुवनं चित्रं बहुधा जातं जायामानं च यत् । सर्वो ह्येष रुद्रस्तस्मै रुद्राय नमो अस्तु ॥
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Mahashivratri Mantra: महाशिवरात्रि श्लोक

1. सत सृष्टि तांडव रचयिता नटराज राज नमो नमः ।
हे आद्य गुरु शंकर पिता नटराज राज नमो नमः ॥2. ध्यायेन्नित्यं महेशं रजतगिरिनिभं चारुचन्द्रावतंसं
रत्नाकल्पोज्ज्वलाङ्गं परशुमृगवराभीतिहस्तं प्रसन्नम् ।
पद्मासीनं समन्तात् स्तुतममरगणैर्व्याघ्रकृत्तिं वसानं
विश्वाद्यं विश्ववन्द्यं निखिलभयहरं पञ्चवक्त्रं त्रिनेत्रम् ॥3. अखर्वसर्वमङ्गलाकलाकदम्बमञ्जरी- रसप्रवाहमाधुरीविजृम्भणामधुव्रतम्।
स्मरान्तकं पुरान्तकं भवान्तकं मखान्तकं गजान्तकान्धकान्तकं तमन्तकान्तकं भजे॥
हे आद्य गुरु शंकर पिता नटराज राज नमो नमः ॥2. ध्यायेन्नित्यं महेशं रजतगिरिनिभं चारुचन्द्रावतंसं
रत्नाकल्पोज्ज्वलाङ्गं परशुमृगवराभीतिहस्तं प्रसन्नम् ।
पद्मासीनं समन्तात् स्तुतममरगणैर्व्याघ्रकृत्तिं वसानं
विश्वाद्यं विश्ववन्द्यं निखिलभयहरं पञ्चवक्त्रं त्रिनेत्रम् ॥3. अखर्वसर्वमङ्गलाकलाकदम्बमञ्जरी- रसप्रवाहमाधुरीविजृम्भणामधुव्रतम्।
स्मरान्तकं पुरान्तकं भवान्तकं मखान्तकं गजान्तकान्धकान्तकं तमन्तकान्तकं भजे॥
4. न धर्मो न चार्थो न कामो न मोक्षः
चिदानन्दरूपः शिवोऽहं शिवोऽहम्॥
5. मंदाकिनी सलिल चन्दन चर्चिताय
नन्दी श्वर प्रमथ नाथ महेश्वराय।
मन्दार पुष्प बहुपुष्प सु पूजिताय
तस्मै मकाराय नमः शिवाय॥




















