6 या 7 जनवरी, कब रखा जाएगा सकट चौथ का व्रत? जानें शुभ मुहूर्त और संतान की दीर्घायु के लिए सटीक पूजन विधि

Sankashti Chaturthi Kab Hai
Sankashti Chaturthi Kab Hai: हिंदू धर्म में सकट चौथ का काफी महत्व होता है। माघ मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को सकट चौथ के रूप में मनाया जाता है। इसे ‘संकष्टी चतुर्थी’ भी कहा जाता है। यह दिन भगवान गणेश की आराधना के लिए समर्पित है। विशेष रूप से महिलाएं अपनी संतान की दीर्घायु और खुशहाली के लिए पूरे दिन निर्जला उपवास रखती हैं।
इस व्रत में शाम को विधि-विधान से पूजा की जाती है और व्रत कथा सुनी जाती है। रात में चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद ही व्रत संपन्न माना जाता है। इस दिन प्रसाद के रूप में तिल-गुड़ के लड्डू, शकरकंद और फल अर्पित किए जाते हैं। आइए जानते हैं इस बार संकष्टी चतुर्थी कब मनाई जाएगी, साथ ही जानेंगे पूजन का शुभ मुहूर्त और संपूर्ण विधि।

Sankashti Chaturthi Kab Hai: संकष्टी चतुर्थी तिथि

Sankashti Chaturthi Kab Hai
Sankashti Chaturthi Kab Hai (Image: AI Generated)
वर्ष 2026 में माघ चतुर्थी तिथि की शुरुआत 6 जनवरी, मंगलवार को सुबह 8:02 बजे से होगी और इसका समापन 7 जनवरी, बुधवार को सुबह 6:53 बजे होगा। चूंकि यह व्रत रात में चंद्र दर्शन के बाद खोला जाता है, इसलिए शास्त्रों के अनुसार 6 जनवरी को ही सकट चौथ का व्रत रखा जाना चाहिए। इसे ‘वक्रतुंड चतुर्थी’ के नाम से भी जाना जाता है।

Sankashti Chaturthi 2026: संकष्टी चतुर्थी पर पूजन के लिए शुभ मुहूर्त

  • लाभ मुहूर्त: सुबह 11:08 से दोपहर 12:27 तक।
  • अमृत मुहूर्त: दोपहर 12:27 से दोपहर 01:45 तक।

सकट चौथ की मुख्य पूजा शाम को प्रदोष काल में करना श्रेष्ठ होता है। इसके लिए शाम 4:39 से 6:39 तक का समय सबसे उत्तम है।

Sankashti Chaturthi Vrat Vidhi: संकष्टी चतुर्थी पूजन विधि

Sankashti Chaturthi Kab Hai
Sankashti Chaturthi Kab Hai (Image: AI Generated)
सकट चौथ व्रत वाले दिन सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इसके बाद हाथ में फूल और अक्षत लेकर व्रत का संकल्प लें और उन्हें गणेश जी को अर्पित करें। इसके बाद पूजा स्थल पर गुड़-तिल के लड्डू, शकरकंद, धूप, चंदन, फल और तांबे के लोटे में जल रखें। साथ ही मां दुर्गा की प्रतिमा भी स्थापित करें।
शाम की पूजा से पहले एक बार फिर से स्नान करें। गणेश जी के सामने घी का दीपक जलाएं, तिलक करें और मंत्रों का जाप करें। अब श्रद्धापूर्वक सकट चौथ की कथा सुनें और अंत में भगवान गणेश की आरती उतारकर उन्हें भोग लगाएं। रात में चंद्रमा के निकलने पर उन्हें अर्घ्य दें और पूजा करें। इसके बाद, जल ग्रहण करें और अपना उपवास खोलें।

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