संतान के सुख और खुशहाली के लिए आज Yashoda Jayanti पर इस तरह करें Puja, जानें Shubh Muhurat और Mahatva

Yashoda Jayanti 2026

Yashoda Jayanti 2026: फाल्गुन महीने के कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि को यशोदा जयंती मनाई जाती है। यह केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि मातृत्व और वात्सल्य का प्रतीक है। इस साल यह शुभ अवसर आज यानी 7 फरवरी को मनाया जा रहा है। Yashoda Jayanti 2026 पर यशोदा माता और भगवान श्रीकृष्ण की पूजा करने से जीवन के सभी संकटों का नाश होता है। साथ ही यह उन माता-पिता के लिए बहुत खास दिन है, जिनकी संतान किसी भी तरह के शारीरिक, मानसिक समस्या से जूझ रही है।

माना जाता है कि Yashoda Mata ki Jayanti पर पूजा करने से न केवल कान्हा का आशीर्वाद मिलता है, बल्कि बच्चों के जीवन में आने वाली तमाम बाधाएं भी दूर हो जाती हैं, तो आइए Yashoda Jayanti 7 February से जुड़ी प्रमुख बातों को जानते हैं।

Yashoda Jayanti 2026 Date and Time: कब है यशोदा जयंती 2026

Yashoda Jayanti 2026
Yashoda Jayanti 2026 (Source: AI Generated)
  • यशोदा जयंती 7 फरवरी 2026 को शनिवार के द‍िन है।
  • हिंदू पंचांग के अनुसार, फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि की शुरुआत 07 फरवरी को सुबह 1:18 पर होगी।
  • इस तिथि का समापन 08 फरवरी 2026 की सुबह 2:54 बजे को होगा।
  • इसलिए धार्मिक रीति-रिवाज के अनुसार, पूजा-अनुष्ठान और व्रत 07 फरवरी को ही किए जाएंगे।

Yashoda Jayanti 2026 Shubh Muhurat: यशोदा जयंती शुभ मुहूर्त

krishna ki mata Yashoda ki jayanti
krishna ki mata Yashoda ki jayanti (Source: AI Generated)
  • शुभ मुहूर्त की बात करें तो 7 फरवरी को पूजा के लिए बेहद शुभ संयोग बन रहा है।
  • इस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग और रवि योग सुबह 2 बजकर 28 मिनट से 7 बजकर 5 मिनट तक रहेगा, जो पूजा के लिए बहुत अच्छा समय है।
  • अमृत काल: शाम 7 बजकर 31 मिनट से रात 9 बजकर 15 मिनट तक
  • अभिजित मुहूर्त: दोपहर 12 बजकर 13 मिनट से 12 बजकर 57 मिनट तक
  • विजय मुहूर्त: दोपहर 2 बजकर 25 मिनट से 3 बजकर 9 मिनट तक
  • गोधूलि मुहूर्त: शाम 6 बजकर 3 मिनट से 6 बजकर 29 मिनट तक

Yashoda Jayanti Puja Vidhi: यशोदा जयंती पूजा विधि

Yashoda Jayanti Puja Vidhi
Yashoda Jayanti Puja Vidhi (Source: AI Generated)
  • सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ वस्त्र धारण करें।
  • हाथ में जल लेकर अपनी संतान की समस्या को दूर करने का संकल्प लें।
  • एक वेदी पर लाल वस्त्र बिछाएं और उस पर माता यशोदा और कान्हा जी की प्रतिमा स्थापित करें।
  • लड्डू गोपाल को पंचामृत से स्नान कराएं। मैया यशोदा को लाल चुनरी और शृंगार की सामग्री चढ़ाएं।
  • माता यशोदा और कान्हा को माखन-मिश्री, घर की बनी पंजीरी और ताजे फलों का भोग लगाएं।
  • गाय के घी का दीपक जलाएं और “ॐ देवकीसुत गोविंद वासुदेव जगत्पते। देहि मे तनयं कृष्ण त्वामहं शरणं गतः” का श्रद्धापूर्वक जप करें।
    अंत में आरती करें।
  • पूजा में हुई सभी गलती के लिए माफी मांगे।

यशोदा जयंती महत्व

यशोदा जयंती केवल एक धार्मिक तिथि नहीं, बल्कि मातृत्व की उस भावना का उत्सव भी है, जिसमें निस्वार्थ प्रेम और सेवा भाव समाया हुआ है। मां यशोदा का जीवन यह सिखाता है कि सच्चा प्रेम बिना किसी अपेक्षा के क‍िया जाता है। माना जाता है कि इस दिन श्रद्धा से की गई पूजा से परिवार में सुख-शांति बनी रहती है और संतान से जुड़ी चिंताएं भी दूर होती हैं। यही वजह है कि यह पर्व भावनात्मक जुड़ाव और आस्था के साथ मनाया जाता है। जहां भक्ति केवल कर्मकांड तक सीमित नहीं रहती, बल्कि मन की गहराइयों से निकलती है।

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