बहादुरगढ़ : बहादुरगढ़ मुंडका मेट्रो सेवा 24 जून को शुरु हो गई मगर उसके श्रेय के लिए मची होड में न तो अभी भाजपा चैन से बैठी और न ही कांग्रेस को संतोष हो रहा। अब आठ जुलाई को मेट्रो को लेकर कांग्रेस बहादुरगढ़ में सच से पर्दा हटाने की तैयारी में जुटी हुई है। आठ जुलाई को पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा मेट्रो से बहादुरगढ पहुंच कर जनसभा में बहादुरगढ़ में मेट्रो कैसे आई और कौन लेकर आया इसका खुलासा करेंगे जिसकी कई दिनों से तैयारी चल रही है। शुुक्रवार को रोहतक के सांसद दीपेंद्र हुड्डा तैयारियों की देखरेख के लिए बहादुरगढ पहुंचे और पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के भतीजे मोनू हुड्डा ने सभी तैयारियों का बहादुरगढ़ पहुंच कर जायजा लिया।
बहादुरगढ़ में मेट्रो सेवा चालू होने पर सांसद दीपेन्द्र सिंह हुड्डा ने बहादुरगढ़.वासियों को बधाई देते हुए कहा कि हरियाणा का जनसामान्य यह अच्छे से जानता है कि इस मेट्रो को लाने में पूर्व मुख्यमंत्री श्री भूपेन्द्र सिंह हुड्डा का अभूतपूर्व योगदान रहा है और लोगों की इसी भावना को देखते हुए 8 जुलाई को भूपेन्द्र सिंह हुड्डा का बहादुरगढ की जनता गौरय्या टूरिस्ट काम्पलैक्स के पास एक जनसभा में नागरिक अभिनन्दन करेगी। सांसद ने भाजपा सरकार पर बतौर जनप्रतिनिधि उनका अपमान करने का आरोप लगाते हुए कहा कि 24 जून को बहादुरगढ़ मेट्रो के उद्घाटन समारोह में वे सरकार के निमंत्रण पर गये थे और शिष्टाचार को निभाते हुए वे प्रधानमंत्री के पूरे भाषण के दौरान मौजूद रहे।
लेकिन जिस प्रकार पूरे देश के किसी भी इलाके का कोई सांसद किसी सरकारी समारोह में शामिल होता है, अपने विचार रखता ह, अपने क्षेत्र की मांगें रखता है तथा धन्यवाद करता है उस अधिकार से मुझे वंचित कर हरियाणा सरकार ने लोकतांत्रिक परम्परा और शिष्टाचार को तोड़ा है। मैंने सरकार के निमंत्रण पर उद्घघाटन समारोह में जाकर अपना शिष्टाचार और राजनीतिक धर्म निभाया लेकिन हरियाणा सरकार ने स्थानीय सांसद को यानि मुझे बोलने का मौका न देकर प्रजातांत्रिक शिष्टाचार तोड दिया।
दूसरी बार हुआ ऐसा दुव्र्यवहार : दीपेन्द्र ने बताया कि हरियाणा सरकार ने उनके साथ ऐसा दुव्र्यवहार दूसरी बार किया है। इससे पहले दिसम्बर 2015 को राष्ट्रीय कैंसर संस्थानए बाढ़सा के भूमि पूजन में भी हरियाणा सरकार ने उनको आमंत्रित किया जब वे इस समारोह में शामिल होने जा रहे थे तभी बीच रास्ते में उन्हें खबर मिली कि उनका निमंत्रण रद्द कर दिया गया है।
जब उन्होंने विनम्रता से ये कहा कि अख़बारों में जो विज्ञापन छपा है उसके अनुसार वे नीचे जनता के साथ बैठ कर समारोह में शामिल हो जायेंगे तो कुछ ही समय बाद उपायुक्त के माध्यम से सरकार का फरमान मिला कि उनके समारोह में शामिल होने पर ही बैन लगा दिया गया है। हरियाणा सरकार द्वारा पहले आमंत्रित करके निमंत्रण रद्द करना और अब दूसरी बार निमंत्रण देकर बोलने न देना और क्षेत्र की मांगें उठाने न देना न केवल एक जनप्रतिनिधि का अपमान है बल्कि प्रजातंत्र की परम्पराओं का घोर उल्लंघन भी है।
– प्रेम शर्मा


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