नई दिल्ली, 3 मई (आईएएनएस)। साइनस की समस्या आजकल आम हो गई है। नाक बंद रहना, सिर भारी होना और लगातार असुविधा कई लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित करती है। ऐसे में भारत सरकार का आयुष मंत्रालय बताता है कि योगासन इन समस्याओं से स्थायी राहत दिला सकता है।
आयुष मंत्रालय का संदेश साफ है- “योग-युक्त बनें। रोग-मुक्त रहें।” योग दिवस को कुछ दिन शेष है, इस मौके पर आयुष मंत्रालय लगातार जागरूकता फैला रहा है। मंत्रालय का कहना है कि योग न सिर्फ शारीरिक स्वास्थ्य बल्कि मानसिक शांति भी देता है। साइनस जैसी आम समस्याओं से छुटकारा पाने के लिए योग को अपनी दैनिक दिनचर्या में शामिल करें।
योग दिवस को कुछ ही दिन शेष हैं। ऐसे में मंत्रालय साइनस से राहत देने वाले योगासनों के बारे में जानकारी देते हुए सलाह देता है कि साइनस के पुराने दबाव को रोज की परेशानी नहीं बनने देना चाहिए। जब सांस सही ढंग से चलती है तो पूरा जीवन ही अलग और बेहतर महसूस होता है। योग सिर्फ शरीर को लचीला बनाने का नाम नहीं है, बल्कि यह सांस के प्रवाह, ऊर्जा के प्रवाह और जीवन के प्रवाह का विज्ञान है। नियमित योग अभ्यास से शरीर खुद को संतुलित करता है और स्वाभाविक रूप से ठीक होता है। इससे रोजमर्रा की जिंदगी में हल्कापन और स्पष्टता वापस आ जाती है।
मंत्रालय ने साइनस की समस्या से जूझ रहे लोगों के लिए कुछ आसान और प्रभावी योगासनों की सिफारिश की है। इनमें भ्रामरी प्राणायाम, नाड़ी शोधन प्राणायाम, ताड़ासन, गोमुखासन, जलनेति के साथ कपालभाति भी शामिल है।
भ्रामरी प्राणायाम:- इस अभ्यास में आंखें बंद करके भौंहों के बीच ध्यान केंद्रित कर ‘ओम’ की ध्वनि की तरह आवाज निकाली जाती है। इससे सिर और नाक से जुड़ी नसों को आराम मिलता है।
नाड़ी शोधन प्राणायाम:- एक नथुने से सांस अंदर और दूसरे से बाहर लेने की प्रक्रिया। यह दोनों नाड़ियों को संतुलित करती है और सांस की रुकावट दूर करती है।
ताड़ासन: – खड़े होकर शरीर को तानने वाला आसान आसन, जो मुद्रा सुधारता है और सही तरह से सांस लेने में मदद करता है।
गोमुखासन:- पैरों को विशेष तरीके से मोड़कर बैठने वाला आसन, जो छाती और कंधों को खोलता है।
जलनेति: – नाक को नमकीन पानी से साफ करने की क्रिया, जो साइनस की जड़ को साफ करती है।
कपालभाति:- तेजी से सांस छोड़ने वाला प्राणायाम, जो फेफड़ों और साइनस कैविटी को साफ करता है।
ये अभ्यास नियमित रूप से करने से साइनस की पुरानी समस्या भी कम हो सकती है। इनसे नाक की रुकावट दूर होती है, सिर का भारीपन जाता है और सांस लेना सहज हो जाता है।
–आईएएनएस
एमटी/एएस
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